Bengaluru Police कमिश्नर दफ्तर पहुंचे HD Kumaraswamy, Priyank Kharge पर साधा सीधा निशाना
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने गुरुवार को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर तीखा हमला बोला। यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से जुड़े एक कथित मानहानि वाले 'स्टिंग ऑपरेशन' का है। कुमारस्वामी ने राज्य सरकार को चुनौती दी कि वे जनता दल (सेक्युलर) के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के बजाय, सीधे उन्हें (कुमारस्वामी को) बुलाएं और पूछताछ करें। बेंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर के कार्यालय पहुंचे कुमारस्वामी ने गृह मंत्री की उस चेतावनी पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया था कि इस मामले में शामिल होने के संदेह वाले किसी भी व्यक्ति जिसमें वे खुद भी शामिल हैं। उन्होंने मांग की कि पुलिस अपनी जांच की शुरुआत उनसे करे। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपनी सत्ता का दुरुपयोग करके उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है, जबकि इस विवाद के लिए जिम्मेदार लोगों को कथित तौर पर संरक्षण दे रही है। खड़गे पर सीधा निशाना साधते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि क्या गृह मंत्रालय तुम्हारे पिता का है? तुम्हारे पिता ने तुम्हें यह विभाग नहीं दिया है। यह तुम्हारे पिता का नहीं है। अगर तुम गृह मंत्री हो, तो गृह मंत्री की तरह काम करो। अगर हिम्मत है, तो मुझे नोटिस भेजो।
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उन्होंने आगे आरोप लगाया कि गृह मंत्री ने उन लोगों से हाथ मिला लिया है जिन्होंने "राज्य को बर्बाद कर दिया है"। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि कथित अपमानजनक वीडियो फैलाने के मामले में उनके पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कैसा बर्ताव किया गया। उन्होंने कहा कि उनके (राकेश शेट्टी) साथ तो शाही बर्ताव किया जाता है। मेरे कार्यकर्ताओं ने ऐसा क्या किया है कि आप उन्हें गिरफ्तार कर लेते हैं और हिरासत में ले लेते हैं? क्या यह विभाग आपके पिता की संपत्ति है? मेरी भी एक सीमा है, मेरे धैर्य की भी एक हद है। आप सिर्फ इसलिए कितने और घर बर्बाद करना चाहते हैं क्योंकि आपके पास सत्ता है और आप जो चाहें कर सकते हैं?" केंद्रीय मंत्री की यह टिप्पणी तब आई है, जब सिद्धारमैया से जुड़े कथित अपमानजनक वीडियो फैलाने के मामले में JD(S) के एक कार्यकर्ता को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की गई। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि बुधवार सुबह 6 बजे से 8.30 बजे तक उस कार्यकर्ता से पूछताछ की गई और उसे परेशान किया गया, ताकि उससे ऐसा बयान लिया जा सके जो गृह मंत्री और मुख्यमंत्री के पक्ष में हो।
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उन्होंने आरोप लगाया कि कल वे हमारे एक कर्मचारी को सुबह 6 बजे से 8:30 बजे तक अपने साथ ले गए। उन्होंने उससे न केवल कानूनी तरीके से, बल्कि गैर-कानूनी तरीके से पूछताछ की। उन्होंने उसे परेशान करने की कोशिश की, ताकि वे उससे वह सब लिखवा सकें जो गृह मंत्री और मुख्यमंत्री किसी को फंसाने के लिए लिखवाना चाहते हैं। कल उन्होंने कोशिश तो की, लेकिन नाकाम रहे। मुझे जानकारी मिली है कि उससे अपनी मनचाही बातें लिखवाने के लिए किस तरह का दबाव डाला गया।" खड़गे के इस बयान पर कि पुलिस किसी पर भी शक होने पर जांच करेगी, कुमारस्वामी ने कहा कि वे विशेष रूप से गृह मंत्री की टिप्पणियों के कारण ही कमिश्नर के कार्यालय आए हैं।
Crime पर हमारी Zero Tolerance नीति, Ankita Case में बोले CM Dhami, Politics कर रही Congress
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर सियासत तेज है। इस बीत उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि पहले दिन से ही हमने इस मामले में हर संभव कोशिश की है और सभी जरूरी कानूनी कदम उठाए हैं। परिवार से बातचीत के बाद, जिसमें उनकी CBI जांच की मांग भी शामिल थी, हमने ऐसी जांच कराने के लिए आगे और प्रयास किए। हमारे स्थानीय प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी से की गई कार्रवाई के कारण ही हाई कोर्ट ने तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कानूनी प्रक्रिया चल रही है, और इस तरह के अपराध के लिए हमारी 'जीरो टॉलरेंस' (बिल्कुल बर्दाश्त न करने) की नीति है। यह साफ है कि कांग्रेस पार्टी के पास कोई ठोस मुद्दा या एजेंडा नहीं है, इसलिए वे बार-बार इस मामले का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।
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दूसरी ओर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने को लेकर बृहस्पतिवार को सरकार पर निशाना साधा और कहा कि उनकी पार्टी पीड़ित परिवार के साथ तब तक खड़ी रहेगी, जब तक उसे न्याय नहीं मिल जाता। गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि कि सुबह चार बजे अंकिता भंडारी के माता-पिता को उस वक्त हिरासत में ले लिया गया, जब वे इंडिया गेट पर शांतिपूर्वक बैठे थे। ऋषिकेश के निकट वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट रही 19 वर्षीय अंकिता की सितंबर 2022 में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को अदालत ने दोषी ठहराया था और तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अंकिता के माता-पिता की मांग थी कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पूरी होने तक भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल न बनाया जाए। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि वह और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा एक दिन पहले अंकिता के माता-पिता से मिले थे। गांधी ने आरोप लगाया कि जिस जांच का नतीजा आया नहीं, उसके पहले ही नियुक्ति की और सवाल पूछने वाले मां-बाप को रात के अंधेरे में उठा लिया गया।
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कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने सरकार पर पीड़ितों की आवाज दबाने और सवाल उठाने वालों को हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पर न्याय की लड़ाई न दबेगी, न रुकेगी। कांग्रेस अंकिता भंडारी के परिवार के साथ खड़ी है, और खड़ी रहेगी—जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।’’ पुलिस ने अंकिता के माता पिता और कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया था, हालांकि बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
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