सऊदी की वो भूल जो करा रही फजीहत, अंसारुल्लाह कैसे चढ़ बैठे, ट्रंप की धकधकी क्यों बढ़ी?
यमन से जिस तरह से प्रतिकार अंसारुल्लाह हूती कर रहे हैं वो सऊदी अरब के लिए गले की फांस बनता चला जा रहा है। मिडिल ईस्ट में सऊदी अरब की हालत ऐसी हो गई है जैसे किसी शख्स ने अपनी सारी एनर्जी और वक्त घर के लिए बेहतर ताले और अलार्म बनाने, बाहर से बुलाने और लगाने में खर्च कर डाले। लेकिन अब जब वक्त आया तो ताले टूट गए हैं। ताले काम नहीं आ रहे हैं। अलार्म बज नहीं रहे हैं। जब घर तक धावा बोल दिया गया तो अब इस्लामाबाद, अंकारा, वाशिंगटन और लंदन में ताला बनाने वालों से पूछ रहा है सऊदी कि क्या उनके पास कुछ बेहतर है। मिडिल ईस्ट की सऊदी हूती जंग पर नजर रख रहे एक्सपर्ट तो यही कहते हैं। सोशल मीडिया पर लोग चर्चा कर रहे हैं कि आखिर 3 महीनों में सऊदी अरब हूतियों या अंसारुल्लाह से पार क्यों नहीं पा सका? रॉयल सऊदी एयरफोर्स एक ऐसी ताकत है जिसे जीता जाना बेहद मुश्किल है। बरसों से अमेरिका सऊदी अरब को वो फाइटर जेट और डिफेंस सिस्टम देता रहा है जिसके लिए दुनिया भर की एयरफोर्स तरसती है। सऊदी के पास F-15 एस एफ-15 ईगल का एडवांस वेरिएंट है। इतनी तादाद में कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा F1-15 बेड़ा वह बन जाता है जो सिर्फ अमेरिकी एयरफोर्स के बाद दुनिया में दूसरा है। इतना ही नहीं एफ-15 ऐसे में एपीजी 63 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन रडार कंप्यूटर आर्किटेक्चर डिजिटल फ्लाई बाय वायर फ्लाइट कंट्रोल जैसी सुविधाएं सऊदी के पास हैं।
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F-15 के बेड़े के साथ सऊदी अरब रॉयल एयरफोर्स के पास यूरो फाइटर, टाइफोन, टोरनेडो और टैंकरों, इलेक्ट्रॉनिक जंगी जहाज और खुफिया जानकारी हासिल करने के प्लेटफार्मों का एक पूरा बुनियादी ढांचा है। जिसका सपना उस ख्ते के बाकी देशों की एयरफोर्स बस देख ही सकती हैं। उसे हासिल नहीं कर सकती। लेकिन यमन में अंसार उल्लाह के कंट्रोल वाले इलाके पर सऊदी एयरफोर्स कहर तो बरपा रही हैं। मगर आरोप लग रहा है कि ये अंसारुल्ला के ठिकाने हैं ही नहीं बल्कि सिविलियन इलाके हैं। डिफेंस एक्सपर्ट कहते हैं कि सऊदी एयरफोर्स जब यमन में अंसार उल्लाह के ठिकानों और हथियारों के जखीरे वाली पहाड़ियों पर हमला कर रही हैं तो पहाड़ियों से उठते धुएं और धूल के गुबार को देखकर तो ऐसा लगता है कि भारी तबाही हुई है। लेकिन हकीकत यह है कि यह सिर्फ उस पहाड़ की ऊपरी सतह होती है। दरअसल पहाड़ों में छेद बनाए गए हैं और उनके भीतर कई कई सुरंगे हैं। सऊदी एयरफोर्स सिर्फ उसके ऊपरी हिस्से पर बम गिराकर निकल जाती है। उसके महंगे हथियार जाया हो जाते हैं। लेकिन अंसारुल्ला लड़ाकों का बुनियादी ढांचा वहीं का वहीं रहता है।
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जानकार कहते हैं कि इसके लिए हमें यमन में अंडरग्राउंड ढांचे के इतिहास को समझना होगा। जिसमें अंसारुल्लाह ने बरसों से मेहनत की है और इसे डेवलप किया हुआ है। टूटे-फूटे इलाके, चट्टानें और घाटियां उन्हें कुदरती सेफ जोोन या गलियारे देती हैं। सऊदी वायुसेना सुरंग के प्रवेश द्वारों यानी एंट्री पॉइंट पर बमबारी कर रही है। यहूतियों के लिए कुछ घंटों का खेल है। उनके इंजीनियर्स और एक्सपर्ट कुछ ही घंटों में उस नुकसान की भरपाई कर लेते हैं। उसे दुरुस्त कर देते हैं। मीडिया रिपोर्ट बताती है कि जब अंसारुल्ला तहरीक ने यमन में साल 2014-15 में सरकार बनाई और सना को राजधानी बनाया और उस पर कंट्रोल हासिल किया तो उन्होंने सबसे पहले अपने डिफेंस के बुनियादी ढांचे को विरासत में लिया जिसमें सैन्य अड्डे, गोला बारूद, डिपो, कमांड सेंटर और तकनीकी सुविधाएं शामिल हैं, जो 1970 की दहाई से बन रहे थे। क्योंकि पहले भी यमन में लंबी जंगे चली हैं और यमनी आर्म फोर्स ने जमीन के अंदर सुरंगों पर काफी मेहनत कर रखी थी। उनमें से कई तो सोवियत और चीनी मदद से मिडिल ईस्ट में पकड़ बनाए रखने के लिए कोल्ड वॉर के वक्त में बनाई गई थी। इसके उलट सऊदी एयरफोर्स ने खुद को लंबे टारगेट के लिए तैयार किया था।
OpenAI में जासूसी के खुलासे से हड़कंप! AI ने पकड़ा अपना ही इंजीनियर Abdulrahman Alfozan, Silicon Valley में मचा घमासान
दुनिया को AI की ताकत दिखाने वाली अमेरिकी कंपनी OpenAI के अपने दफ्तर में ही जासूसी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस खबर के सामने आते ही सैन फ्रांसिस्को से लेकर सिलिकॉन वैली तक हड़कंप मच गया है। दरअसल, कंपनी के एक इंजीनियर पर आरोप है कि उसने बड़े अधिकारियों की गुप्त बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए कमरे में छिपकर एक डिवाइस लगा दिया। मामला खुला तो OpenAI ने अपने ही AI की मदद से आरोपी का सुराग खोज निकाला और बात FBI तक पहुंच गई। उधर, Apple पर भी आरोप लगे हैं कि उसके पास OpenAI के 100 से ज्यादा गोपनीय दस्तावेज पहुँचे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि AI की दुनिया में आखिर कौन किसके राज चुरा रहा है? सवाल यह भी है कि क्या तकनीक की इस जंग में कंपनियों के सबसे बड़े रहस्य भी सुरक्षित नहीं रहे?
टॉयलेट पेपर के पीछे छिपा था जासूसी का कथित उपकरण
अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, OpenAI के सैन फ्रांसिस्को कार्यालय में 30 सितंबर को सुरक्षा जांच के दौरान एक अंगूठे के आकार का रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। इसे एक कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे USB पोर्ट में लगाया गया था और कथित तौर पर टॉयलेट पेपर से छिपाया गया था, ताकि सामान्य जांच में इसका पता न चले। जांच में सामने आए विवरणों के मुताबिक, डिवाइस में माइक्रोफोन, अलग किया जा सकने वाला कैमरा सेंसर और माइक्रोएसडी स्टोरेज जैसी सुविधाएं थीं। इसमें रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने के लिए एन्क्रिप्शन और डेटा ट्रांसफर की क्षमता होने की भी बात कही गई है। बताया गया कि यह कमरा OpenAI के अधिकारियों की उन बैठकों के लिए इस्तेमाल होता था, जिनमें कंपनी की अत्याधुनिक AI तकनीक, भविष्य के उत्पादों, कारोबारी रणनीति और संभावित साझेदारियों पर चर्चा होती थी। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के मुताबिक, डिवाइस को लगभग 28 सितंबर को लगाया गया था। हालांकि, उसकी सामग्री एन्क्रिप्टेड होने के कारण रिकॉर्डिंग तक पहुंच नहीं बन सकी।
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AI ने ही खोज निकाला कथित आरोपी का सुराग
इस मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब OpenAI ने बताया कि उसने डिवाइस को समझने और उसके स्रोत का पता लगाने के लिए अपने AI मॉडल्स का इस्तेमाल किया। कंपनी के मुताबिक, इस विश्लेषण से उसे उस कर्मचारी की पहचान करने में मदद मिली, जिसने डिवाइस लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों ने 35 वर्षीय सऊदी नागरिक अब्दुलरहमान अलफोजान को 9 अक्टूबर को गिरफ्तार किया। वह OpenAI में इंजीनियरिंग लीड के रूप में काम कर चुका था और जुलाई 2025 में कंपनी से जुड़ा था। वह अमेरिका का स्थायी निवासी भी बताया गया है।
साथ ही अभियोजन पक्ष के आरोप इससे भी आगे जाते हैं। जांचकर्ताओं का दावा है कि अलफोजान ने कंपनी की इमारतों, मीटिंग रूम, बैठकों के कैलेंडर और अधिकारियों की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए एक प्रोडक्टिविटी टूल का इस्तेमाल किया। आरोप है कि 24 से 30 सितंबर के बीच उसने अपनी पत्नी से जुड़े AI चैटबॉट अकाउंट पर रिकॉर्डिंग डिवाइस बनाने, लगाने, छिपाने और दूर से संचालित करने से संबंधित सवाल भी पूछे।
शिकायत में CCTV फुटेज का भी उल्लेख है। जांचकर्ताओं के मुताबिक, कुछ मौकों पर अलफोजान को उस कॉन्फ्रेंस रूम के आसपास देखा गया, जहां जाने या बैठक में शामिल होने की उसे अनुमति नहीं थी। पांच अक्टूबर की फुटेज में कथित तौर पर उसे टीवी के पीछे देखते हुए दिखाया गया। उसी दिन दूसरे कमरे में छोड़े गए एक बैग की तलाशी के दौरान सुरक्षा कर्मियों को एक अन्य एन्क्रिप्टेड रिकॉर्डिंग डिवाइस मिलने का भी दावा किया गया है।
अलफोजान पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए मौखिक बातचीत को अवैध रूप से रिकॉर्ड करने या ऐसा करने का प्रयास करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि दोषी पाए जाने पर उसे पांच साल तक की जेल, 2.5 लाख डॉलर का जुर्माना और तीन साल तक निगरानी में रिहाई की सजा हो सकती है।
OpenAI का दावा: डेटा चोरी का सबूत नहीं
उधर, इतने गंभीर आरोपों के बावजूद OpenAI ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उसे ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि आरोपी ने कंपनी के मॉडल वेट्स, सोर्स कोड या ग्राहकों के डेटा तक अनुचित पहुंच बनाई अथवा उन्हें बाहर भेजा। कंपनी ने मामला FBI को सौंपने और जांच में सहयोग करने की बात कही है। FBI निदेशक काश पटेल ने इसे अमेरिकी AI नवाचार की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया है। वहीं अब्दुलरहमान अलफोजान का पेशेवर अनुभव भी ध्यान खींचता है। वह इससे पहले Meta, Microsoft और SAP जैसी कंपनियों में काम कर चुका है। वह MIT से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की डिग्रीधारी बताया गया है और निवेश फर्म Raed Ventures से भी जुड़ा है।
Apple और OpenAI की जंग में 100 से ज्यादा फाइलों का विवाद
उधर, Apple के साथ चल रहे कानूनी विवाद ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है। OpenAI का आरोप है कि उसका एक पूर्व कर्मचारी कंपनी के उत्पाद से जुड़ी 100 से अधिक फाइलें अपने निजी अकाउंट पर भेजने के बाद Apple के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने उस उत्पाद का प्रेजेंटेशन दे चुका था। हालांकि, Apple ने इन आरोपों को खारिज किया है। OpenAI की ओर से अदालत में दाखिल याचिका के मुताबिक, Apple में नौकरी करने पहुंचे उसके एक पूर्व कर्मचारी ने 100 से अधिक फाइलें अपने निजी अकाउंट पर भेजी थीं। आरोप है कि उसने बाद में अपने उत्पाद से जुड़ी प्रस्तुति Apple के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने दी। OpenAI को आशंका है कि उसकी गोपनीय जानकारी अब Apple के भीतर मौजूद हो सकती है और कंपनी के इंजीनियर इसका इस्तेमाल अपने आगामी उत्पादों को विकसित करने में कर सकते हैं। हालांकि Apple ने कहा है कि उसके पास पूर्व नियोक्ताओं की गोपनीय जानकारी के इस्तेमाल को रोकने के लिए नीतियां और प्रक्रियाएं हैं तथा उसकी जांच में अब तक OpenAI की फाइलें Apple के सर्वरों पर नहीं मिली हैं।
Apple के वकीलों ने यह भी कहा कि OpenAI द्वारा बताए गए दो निजी फोन नंबर उस कर्मचारी के Apple कार्य-संबंधी नंबर से मेल नहीं खाते। Apple के अनुसार, उसे कथित प्रेजेंटेशन की जानकारी भी नहीं थी और उसने OpenAI से अतिरिक्त विवरण मांगे थे। कंपनी का आरोप है कि OpenAI ने जवाब देने के बजाय अदालत का रुख किया। हम आपको यह भी बता दें कि OpenAI की ओर से Apple के पूर्व कर्मचारियों द्वारा गोपनीय जानकारी ले जाने के आरोपों को भी पहले खारिज किया जा चुका है।
इस बीच, अदालत ने Apple को अपने कुछ पूर्व कर्मचारियों के डिजिटल उपकरणों से डेटा जुटाने और तीन लोगों से निर्धारित समय से पहले पूछताछ करने की अनुमति दी है। इनमें पूर्व वरिष्ठ सिस्टम इंजीनियर चांग लियू और iPhone तथा Apple Watch के डिजाइन से जुड़े रहे पूर्व उपाध्यक्ष टैंग येव टैन शामिल हैं। मुकदमे की सुनवाई अक्टूबर 2027 में होने की संभावना है, हालांकि OpenAI ने जून 2027 तक तैयार होने की बात कही है। देखा जाये तो इन दोनों मामलों में अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं। रिकॉर्डिंग डिवाइस से कोई संवेदनशील जानकारी बाहर गई या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। इसी तरह Apple के पास OpenAI की गोपनीय जानकारी पहुंचने के आरोप भी अभी साबित नहीं हुए हैं।
बहरहाल, एक बात साफ है। AI की दुनिया में जंग अब सिर्फ सबसे ताकतवर मॉडल बनाने की नहीं, बल्कि एक-दूसरे के तकनीकी राज हथियाने और अपने रहस्यों को बचाने की भी है। किसके पास कितनी उन्नत तकनीक है, कौन अगली बड़ी छलांग लगाने वाला है और किसकी गोपनीय जानकारी किसके हाथ लग रही है, इन्हीं सवालों के बीच दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां आमने-सामने हैं। हैरानी देखिए, जिस AI को इंसानी दिमाग की सबसे जटिल पहेलियां सुलझाने के लिए बनाया गया, वही अब जासूसी के सुराग खोजने और साजिशों का पर्दाफाश करने में जुटा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब तकनीक के महारथी ही एक-दूसरे के राज तलाशने में लगे हों, तो इस डिजिटल महायुद्ध में आखिर किसके रहस्य सुरक्षित हैं और किसकी अगली चाल पहले ही बेनकाब हो जाएगी?
-नीरज कुमार दुबे
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