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जंग सिर्फ हथियारों से नहीं, हौसलों से....F-15, एपीजी 63 जैसे लेटेस्ट US वेपन से लैस सऊदी, फिर भी हूती से क्यों हार रहे?

सऊदी अरब का सबसे बड़ा डर आज हकीकत बन चुका है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी की अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर सीधा प्रहार किया है—हमला हुआ है दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको के हेडक्वार्टर पर। क्या यमन जंग अब और भी खौफनाक मोड़ लेने जा रही है? और अगर हां, तो क्या सऊदी अरब इस नई चुनौती के लिए तैयार है? आखिर हूतियों के पास ऐसे कौन से हथियार हैं और क्या वे सऊदी अरब पर भारी पड़ने की ताकत रखते हैं? सऊदी सेना ने एक चेतावनी जारी की। उन्होंने आम नागरिकों से सना में मौजूद एक पेट्रोलियम साइट को खाली करने के लिए कहा। जैसा कि मैंने बताया, सना यमन की राजधानी है। 2014 में हुतियों ने इस पर कब्ज़ा कर लिया था। सऊदी सेना ने नागरिकों से वहां से चले जाने को कहा। चेतावनी के बाद हमले शुरू हो गए। सना में हुए एक ज़बरदस्त धमाके की तस्वीरें सामने आई हैं। इनमें आसमान की ओर उठती आग की एक विशाल लपट देखी जा सकती है। हालाँकि, इनमें से किसी भी वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन हमारे पास एक दूसरे शहर की तस्वीरें ज़रूर हैं। इस शहर का नाम बाज़िल है।

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हूती मिसाइल अरामको इमारत से टकराई


यमन के हूती आंदोलन द्वारा दागी गई एक मिसाइल, सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी 'अरामको' की पूर्वी शहर धहरान स्थित एक इमारत से टकरा गई। यह घटना रात के समय हुई, जब सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन की राजधानी सना के पास एक ईंधन डिपो पर हमला किया था। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि हूती हमले के कारण अरामको के मुख्यालय परिसर की एक प्रशासनिक इमारत में सीमित आग लग गई। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि कई अन्य जगहों पर मिसाइलों और ड्रोनों को रोका गया, और राजधानी रियाद में इनके मलबे के गिरने से चार लोग घायल हो गए। हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने अरामको और रियाद हवाई अड्डे को इसलिए निशाना बनाया, क्योंकि गठबंधन ने मंगलवार को यमन पेट्रोलियम कंपनी की 'अल-सबाहा' सुविधा पर हमला किया था। ईरान समर्थित इस समूह ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और भी हमले किए जा सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा ने कहा कि बढ़ता हुआ यह संघर्ष "हर जगह, हर किसी के लिए नकारात्मक परिणाम" ला सकता है। क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अध्यक्षता में सऊदी कैबिनेट ने मंगलवार को कहा कि हूती विद्रोहियों को सऊदी अरब पर किए गए अपने हालिया हमलों का "खामियाजा भुगतना पड़ेगा"। इन हमलों में शनिवार को रियाद हवाई अड्डे पर किया गया मिसाइल हमला भी शामिल है, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी।

अमेरिका भी घबराया हुआ है

पहले भी यमन में लंबी जंगे चली हैं और यमनी आर्म फोर्स ने जमीन के अंदर सुरंगों पर काफी मेहनत कर रखी थी। उनमें से कई तो सोवियत और चीनी मदद से मिडिल ईस्ट में पकड़ बनाए रखने के लिए कोल्ड वॉर के वक्त में बनाई गई थी। इसके उलट सऊदी एयरफोर्स ने खुद को लंबे टारगेट के लिए तैयार किया था। लेकिन पड़ोस में यमन से उसका पाला पड़ेगा और इस कदर पड़ेगा यह उनके लिए भी बहुत नया है। 13 जुलाई को सऊदी ने ईरान में जनाजे से शिरकत कर लौट रहे अंसारुल्लाह के डेलीगेशन वाले ईरानी प्लेन को जिस तरह टारगेट करके हमला किया था उससे लग रहा था कि सऊदी अगर जंग शुरू भी करता है तो इस बार अंसारुल्लाह का तख्ता पलट हो ही जाना है। और शुरू में इस तरह के बयान भी आए थे कि हमारा टारगेट राजधानी सना है। लेकिन अब तो हाल बेहाल है। अपना ताला चला नहीं, अपने अलार्म बज नहीं रहे हैं। दूसरे कितनी मदद कर रहे हैं, यह भी साफ नहीं हो पा रहा है। लेकिन अंसारुल्लाह की मिसाइलें तो सऊदी की राजधानी के व्यस्ततम एयरपोर्ट पर गिर रही हैं। यह दुनिया ने देखा है और काफी नुकसान भी हो रहा है। आरोप तो यह भी लगता है कि अमेरिका भी घबराया हुआ है। वह सऊदी में मौजूद तो है, लेकिन जब अंसारुल्लाह की मिसाइलें उनके ठिकानों की तरफ आती हैं, तो उनका पेट्रियाट और दूसरा एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो जाता है। मगर सऊदी के एयरपोर्ट के लिए अमेरिकी डिफेंस सिस्टम उस तरह से काम क्यों नहीं कर रहे हैं? यही वजह है कि सऊदी के एयरपोर्ट पर भारी तबाही हो रही है। इस तरह की चर्चा भी लोग सोशल मीडिया पर कर रहे हैं। और तो और यमन के अंसारुल्ला लड़ाकों ने सऊदी समर्थित सेना के बंकरों, ठिकानों और ट्रेंचों पर आसमान से बारूद का ऐसा अनवरत तांडव मचाया है कि पूरे मोर्चे पर सिर्फ धुआं ही धुआं है और बदहवास भागते सैनिक हैं। खुले और तपते रेगिस्तान में बने सऊदी समर्थित सेना के मजबूत बंकर उनके बचाव का ज़रिया नहीं बल्कि उनकी सीधी कब्रगाह साबित हो रहे हैं। 

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हूती ने लगा दी अनगाइडेड बमों की बेहिसाब झड़ी


अंसारुल्ला के हूती लड़ाकों के खामोश और एडवांस्ड ड्रोन ने सऊदी समर्थित सेना की गहरी खंदकों यानी ट्रेंचों के ठीक ऊपर मंडराते हुए अनगाइडेड बमों की ऐसी बेहिसाब झड़ी लगा दी है जो सीधे सैकड़ों फीट की ऊंचाई से नीचे बेबस पड़े सैनिकों के सिर पर आकर जोरदार धमाकों के साथ फट रहे हैं। आसमान में इतनी खौफनाक ऊंचाई पर मंडराते हुए इन बारूदी ड्रोन को नीचे खंदकों में छिपे सैनिक अपनी आंखों से नहीं देख पा रहे हैं। जब तक सऊदी हिमायती फौजों को एहसास होता है। वो सांस संभालने की कोशिश करते हैं तब तक आसमान से एक के बाद एक लहरों की तरह भारी-भरकम अनगाइडेड बम सीधे उनकी ट्रेंचों के अंदर प्लंज कर जाते हैं। एक के बाद एक हो रहे गगन भेदी धमाकों का खौफ इतना जबरदस्त है। खौफनाक है कि अमेरिकी और पश्चिमी हथियारों से लैस होने के बावजूद सऊदी हिमायती फौजी अपने हथियार, बंकर और पोस्ट छोड़कर खुले रेगिस्तान में बदहवास भागते नजर आ रहे हैं। लेकिन आसमान से बरसती मौत से भला कोई कहां तक भागेगा? यही काम यमन के अंदर भी हो रहा है। यमन में हूतियों के कंट्रोल वाले ठिकानों पर भी हो रहा है। जहां पर सऊदी अरब जबरदस्त बमबारी कर रहा है अपनी एयरफोर्स के जरिए। तो चारों तरफ से खुले और रेतीले मैदानों में उड़ते हुए ड्रोनों से बचने का कोई जरिया नहीं बचा है सऊदी फोर्सेस के पास। हूतियों के स्पिन पॉइंट बारूदी तांडव ने पूरी सऊदी समर्थित ब्रिगेड की रीड तोड़ कर रख दी है। वह अपने लड़ाकू तैयारों से लाखों टन बारूद गिरा रहे हैं। लेकिन आज वही यमनी लड़ाके बहुत ही कम लागत वाले ड्रोनों और अनगाइडेड बमों की मदद से अरबों डॉलर के अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम और आर्म्ड व्हीकल की धज्जियां उड़ा रहे हैं। कहा जा रहा है कि आज यमन के रेगिस्तान में ना तो कोई सुरक्षित बंकर बचा है ना ही कोई बख्तरबंद गाड़ी काम आ रही है। हूतियों की इस नई बेहद अग्रेसिव और घातक ड्रोन वॉरफेयर रणनीति ने साबित कर दिया है कि रियाद की तरफ से लड़ने वाली सेना अब जमीन पर पूरी तरह पस्त बेबस और लाचार है। सऊदी अरब ने जिस फौज के दम पर यमन को झुकाने का ख्वाब देखा था। आज वही फौज यमनी ड्रोनों के निशाने पर आकर मिट रही है।
 

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Pramila Jayapal ने भारत की Voter List से 13 करोड़ नाम हटने पर जताई चिंता

(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 15 अक्टूबर भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भारत में मतदाता सूची के मसौदे से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की खबरों पर चिंता जताई है। जयपाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बुधवार को कहा, ‘‘भारत सरकार द्वारा 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई को लेकर मैं बेहद चिंतित हूं।’’ इस मुद्दे पर किसी अमेरिकी सांसद की ओर से यह पहली टिप्पणी है। वाशिंगटन राज्य से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद जयपाल ने भारत में ‘‘लोकतंत्र विरोधी प्रयासों’’ का मुकाबला करने के लिए किए जा रहे अहिंसक विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया।

उन्होंने कहा कि भारत में हो रहे घटनाक्रम अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा लोकतंत्र में मतदान के अधिकारों को कमजोर करने के लिए अपनाए जा रहे तरीकों जैसे प्रतीत होते हैं। जयपाल ने कहा कि हर जगह लोकतंत्र की रक्षा करना बेहद जरूरी है और भारतीय नागरिकों को भी अमेरिकियों की तरह स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव का अधिकार है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में अहिंसक प्रतिरोध आंदोलन बेहद जरूरी हैं।

मैं भारत में लोकतंत्र विरोधी प्रयासों का मुकाबला करने के लिए अहिंसक विरोध प्रदर्शन कर रहे भारतीय लोगों के साथ खड़ी हूं।’’ भारत निर्वाचन आयोग के साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के पहले और दूसरे चरण के दौरान मसौदा मतदाता सूचियों से करीब 7.2 करोड़ नाम हटाए गए। एसआईआर के तीसरे चरण के तहत 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूचियां प्रकाशित की गई हैं। इस चरण में हटाए गए मतदाताओं की संख्या 6.16 करोड़ है।

निर्वाचन आयोग ने कहा है कि यदि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम अनजाने में छूट गया है, तो वह दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के तहत नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके बाद वह फॉर्म छह के माध्यम से भी नाम शामिल कराने का अनुरोध कर सकता है।

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BCCI में पर्दे के पीछे बड़ा खेल! कोई नहीं बनना चाहता चीफ सेलेक्टर? पार्थिव पटेल क्यों पीछे हटे

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए चीफ सेलेक्टर पद पर एक भी आवेदन नहीं आया. आवेदन की अंतिम तारीख 14 अक्टूबर थी, लेकिन इस पद के लिए किसी ने आवेदन नहीं किया. चीफ सेलेक्टर पद पर पार्थिव पटेल की दावेदारी की खूब चर्चा थी, लेकिन अंतिम समय पर वह पीछे हट गए. ऐसे में आइए समझते हैं कि बीसीसीआई में पर्दे के पीछे क्या खेल चल रहा है. Thu, 15 Oct 2026 12:18:58 +0530

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