OpenAI में जासूसी के खुलासे से हड़कंप! AI ने पकड़ा अपना ही इंजीनियर Abdulrahman Alfozan, Silicon Valley में मचा घमासान
दुनिया को AI की ताकत दिखाने वाली अमेरिकी कंपनी OpenAI के अपने दफ्तर में ही जासूसी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस खबर के सामने आते ही सैन फ्रांसिस्को से लेकर सिलिकॉन वैली तक हड़कंप मच गया है। दरअसल, कंपनी के एक इंजीनियर पर आरोप है कि उसने बड़े अधिकारियों की गुप्त बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए कमरे में छिपकर एक डिवाइस लगा दिया। मामला खुला तो OpenAI ने अपने ही AI की मदद से आरोपी का सुराग खोज निकाला और बात FBI तक पहुंच गई। उधर, Apple पर भी आरोप लगे हैं कि उसके पास OpenAI के 100 से ज्यादा गोपनीय दस्तावेज पहुँचे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि AI की दुनिया में आखिर कौन किसके राज चुरा रहा है? सवाल यह भी है कि क्या तकनीक की इस जंग में कंपनियों के सबसे बड़े रहस्य भी सुरक्षित नहीं रहे?
टॉयलेट पेपर के पीछे छिपा था जासूसी का कथित उपकरण
अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, OpenAI के सैन फ्रांसिस्को कार्यालय में 30 सितंबर को सुरक्षा जांच के दौरान एक अंगूठे के आकार का रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। इसे एक कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे USB पोर्ट में लगाया गया था और कथित तौर पर टॉयलेट पेपर से छिपाया गया था, ताकि सामान्य जांच में इसका पता न चले। जांच में सामने आए विवरणों के मुताबिक, डिवाइस में माइक्रोफोन, अलग किया जा सकने वाला कैमरा सेंसर और माइक्रोएसडी स्टोरेज जैसी सुविधाएं थीं। इसमें रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने के लिए एन्क्रिप्शन और डेटा ट्रांसफर की क्षमता होने की भी बात कही गई है। बताया गया कि यह कमरा OpenAI के अधिकारियों की उन बैठकों के लिए इस्तेमाल होता था, जिनमें कंपनी की अत्याधुनिक AI तकनीक, भविष्य के उत्पादों, कारोबारी रणनीति और संभावित साझेदारियों पर चर्चा होती थी। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI के मुताबिक, डिवाइस को लगभग 28 सितंबर को लगाया गया था। हालांकि, उसकी सामग्री एन्क्रिप्टेड होने के कारण रिकॉर्डिंग तक पहुंच नहीं बन सकी।
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AI ने ही खोज निकाला कथित आरोपी का सुराग
इस मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया, जब OpenAI ने बताया कि उसने डिवाइस को समझने और उसके स्रोत का पता लगाने के लिए अपने AI मॉडल्स का इस्तेमाल किया। कंपनी के मुताबिक, इस विश्लेषण से उसे उस कर्मचारी की पहचान करने में मदद मिली, जिसने डिवाइस लगाया था। अमेरिकी अधिकारियों ने 35 वर्षीय सऊदी नागरिक अब्दुलरहमान अलफोजान को 9 अक्टूबर को गिरफ्तार किया। वह OpenAI में इंजीनियरिंग लीड के रूप में काम कर चुका था और जुलाई 2025 में कंपनी से जुड़ा था। वह अमेरिका का स्थायी निवासी भी बताया गया है।
साथ ही अभियोजन पक्ष के आरोप इससे भी आगे जाते हैं। जांचकर्ताओं का दावा है कि अलफोजान ने कंपनी की इमारतों, मीटिंग रूम, बैठकों के कैलेंडर और अधिकारियों की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने के लिए एक प्रोडक्टिविटी टूल का इस्तेमाल किया। आरोप है कि 24 से 30 सितंबर के बीच उसने अपनी पत्नी से जुड़े AI चैटबॉट अकाउंट पर रिकॉर्डिंग डिवाइस बनाने, लगाने, छिपाने और दूर से संचालित करने से संबंधित सवाल भी पूछे।
शिकायत में CCTV फुटेज का भी उल्लेख है। जांचकर्ताओं के मुताबिक, कुछ मौकों पर अलफोजान को उस कॉन्फ्रेंस रूम के आसपास देखा गया, जहां जाने या बैठक में शामिल होने की उसे अनुमति नहीं थी। पांच अक्टूबर की फुटेज में कथित तौर पर उसे टीवी के पीछे देखते हुए दिखाया गया। उसी दिन दूसरे कमरे में छोड़े गए एक बैग की तलाशी के दौरान सुरक्षा कर्मियों को एक अन्य एन्क्रिप्टेड रिकॉर्डिंग डिवाइस मिलने का भी दावा किया गया है।
अलफोजान पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के जरिए मौखिक बातचीत को अवैध रूप से रिकॉर्ड करने या ऐसा करने का प्रयास करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि दोषी पाए जाने पर उसे पांच साल तक की जेल, 2.5 लाख डॉलर का जुर्माना और तीन साल तक निगरानी में रिहाई की सजा हो सकती है।
OpenAI का दावा: डेटा चोरी का सबूत नहीं
उधर, इतने गंभीर आरोपों के बावजूद OpenAI ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उसे ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि आरोपी ने कंपनी के मॉडल वेट्स, सोर्स कोड या ग्राहकों के डेटा तक अनुचित पहुंच बनाई अथवा उन्हें बाहर भेजा। कंपनी ने मामला FBI को सौंपने और जांच में सहयोग करने की बात कही है। FBI निदेशक काश पटेल ने इसे अमेरिकी AI नवाचार की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया है। वहीं अब्दुलरहमान अलफोजान का पेशेवर अनुभव भी ध्यान खींचता है। वह इससे पहले Meta, Microsoft और SAP जैसी कंपनियों में काम कर चुका है। वह MIT से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की डिग्रीधारी बताया गया है और निवेश फर्म Raed Ventures से भी जुड़ा है।
Apple और OpenAI की जंग में 100 से ज्यादा फाइलों का विवाद
उधर, Apple के साथ चल रहे कानूनी विवाद ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है। OpenAI का आरोप है कि उसका एक पूर्व कर्मचारी कंपनी के उत्पाद से जुड़ी 100 से अधिक फाइलें अपने निजी अकाउंट पर भेजने के बाद Apple के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने उस उत्पाद का प्रेजेंटेशन दे चुका था। हालांकि, Apple ने इन आरोपों को खारिज किया है। OpenAI की ओर से अदालत में दाखिल याचिका के मुताबिक, Apple में नौकरी करने पहुंचे उसके एक पूर्व कर्मचारी ने 100 से अधिक फाइलें अपने निजी अकाउंट पर भेजी थीं। आरोप है कि उसने बाद में अपने उत्पाद से जुड़ी प्रस्तुति Apple के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने दी। OpenAI को आशंका है कि उसकी गोपनीय जानकारी अब Apple के भीतर मौजूद हो सकती है और कंपनी के इंजीनियर इसका इस्तेमाल अपने आगामी उत्पादों को विकसित करने में कर सकते हैं। हालांकि Apple ने कहा है कि उसके पास पूर्व नियोक्ताओं की गोपनीय जानकारी के इस्तेमाल को रोकने के लिए नीतियां और प्रक्रियाएं हैं तथा उसकी जांच में अब तक OpenAI की फाइलें Apple के सर्वरों पर नहीं मिली हैं।
Apple के वकीलों ने यह भी कहा कि OpenAI द्वारा बताए गए दो निजी फोन नंबर उस कर्मचारी के Apple कार्य-संबंधी नंबर से मेल नहीं खाते। Apple के अनुसार, उसे कथित प्रेजेंटेशन की जानकारी भी नहीं थी और उसने OpenAI से अतिरिक्त विवरण मांगे थे। कंपनी का आरोप है कि OpenAI ने जवाब देने के बजाय अदालत का रुख किया। हम आपको यह भी बता दें कि OpenAI की ओर से Apple के पूर्व कर्मचारियों द्वारा गोपनीय जानकारी ले जाने के आरोपों को भी पहले खारिज किया जा चुका है।
इस बीच, अदालत ने Apple को अपने कुछ पूर्व कर्मचारियों के डिजिटल उपकरणों से डेटा जुटाने और तीन लोगों से निर्धारित समय से पहले पूछताछ करने की अनुमति दी है। इनमें पूर्व वरिष्ठ सिस्टम इंजीनियर चांग लियू और iPhone तथा Apple Watch के डिजाइन से जुड़े रहे पूर्व उपाध्यक्ष टैंग येव टैन शामिल हैं। मुकदमे की सुनवाई अक्टूबर 2027 में होने की संभावना है, हालांकि OpenAI ने जून 2027 तक तैयार होने की बात कही है। देखा जाये तो इन दोनों मामलों में अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं। रिकॉर्डिंग डिवाइस से कोई संवेदनशील जानकारी बाहर गई या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। इसी तरह Apple के पास OpenAI की गोपनीय जानकारी पहुंचने के आरोप भी अभी साबित नहीं हुए हैं।
बहरहाल, एक बात साफ है। AI की दुनिया में जंग अब सिर्फ सबसे ताकतवर मॉडल बनाने की नहीं, बल्कि एक-दूसरे के तकनीकी राज हथियाने और अपने रहस्यों को बचाने की भी है। किसके पास कितनी उन्नत तकनीक है, कौन अगली बड़ी छलांग लगाने वाला है और किसकी गोपनीय जानकारी किसके हाथ लग रही है, इन्हीं सवालों के बीच दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां आमने-सामने हैं। हैरानी देखिए, जिस AI को इंसानी दिमाग की सबसे जटिल पहेलियां सुलझाने के लिए बनाया गया, वही अब जासूसी के सुराग खोजने और साजिशों का पर्दाफाश करने में जुटा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब तकनीक के महारथी ही एक-दूसरे के राज तलाशने में लगे हों, तो इस डिजिटल महायुद्ध में आखिर किसके रहस्य सुरक्षित हैं और किसकी अगली चाल पहले ही बेनकाब हो जाएगी?
-नीरज कुमार दुबे
तीन दिवसीय दौरे पर UAE पहुंचे S Jaishankar, शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से द्विपक्षीय संबंधों पर की बात
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अपने समकक्ष शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की और द्विपक्षीय तथा वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की। जयशंकर ने बुधवार को हुई इस मुलाकात को ‘‘सौहार्दपूर्ण और सार्थक’’ बताया। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि उन्होंने और जायद अल नाहयान ने ‘‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी की भावना के अनुरूप द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार विमर्श किया।’’ जयशंकर द्विपक्षीय संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा करने के लिए तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर बुधवार को यूएई पहुंचे थे।
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने हाल के वर्षों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपना सहयोग बढ़ाया है। मई 2022 में लागू हुआ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। जयशंकर ने इससे पहले बुधवार को ‘रायसीना मिडिल ईस्ट’ कार्यक्रम के दूसरे संस्करण में हिस्सा लिया।
इस दौरान उन्होंने शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान के साथ ‘आगे की दुनिया : शक्ति, उद्देश्य और संभावनाएं’ विषय पर चर्चा की। शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान यूएई के उप प्रधानमंत्री भी हैं। उन्होंने अबू धाबी में जॉर्जिया की विदेश मंत्री माका बोचोरिश्विली से भी मुलाकात की और कारोबार, संपर्क तथा संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर चर्चा की।
पिछले महीने जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर जायद अल नाहयान और फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो से मुलाकात की थी। इस दौरान आपसी हित के सहमत क्षेत्रों में त्रिपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की।
इससे पहले जयशंकर ने अप्रैल में यूएई का दौरा किया था और जायद अल नाहयान से मुलाकात कर क्षेत्र में बदलती स्थिति तथा उसके प्रभावों पर चर्चा की थी। खाड़ी क्षेत्र में यूएई भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है। वहां बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं।
यह देश ऊर्जा आपूर्ति तथा निवेश का एक प्रमुख स्रोत भी है। अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार,प्रवासी भारतीय समुदाय यूएई का सबसे बड़ा जातीय समुदाय है और देश की आबादी में इसकी हिस्सेदारी लगभग 35 प्रतिशत है। वर्ष 2024 में यूएई में रह रहे भारतीय नागरिकों की संख्या लगभग 43 लाख आंकी गई थी।
प्रवासी भारतीय समुदाय के करीब 15 प्रतिशत लोग अबू धाबी अमीरात में रहते हैं, जबकि बाकी छह अमीरातों, जिनमें दुबई भी शामिल है, में बसे हुए हैं।
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