Leather Sofa: बारिश में लेदर सोफा हो जाता है चिपचिपा और बदरंग? अपनाएं ये 5 आसान ट्रिक्स, सालों तक रहेगा नए जैसा
Leather Sofa Maintainance: मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं घर के फर्नीचर की देखभाल की चुनौती भी बढ़ा देता है। खासतौर पर लेदर सोफा नमी और उमस की वजह से जल्दी चिपचिपा होने लगता है। अगर समय रहते इसकी सही तरीके से सफाई और देखभाल न की जाए तो लेदर की चमक फीकी पड़ सकती है, बदबू आने लगती है और सोफे की उम्र भी कम हो सकती है।
अच्छी बात यह है कि कुछ आसान मेंटेनेंस टिप्स अपनाकर आप अपने लेदर सोफे को बारिश के पूरे सीजन में साफ, फ्रेश और चमकदार बनाए रख सकते हैं। सही सफाई, नमी से बचाव और नियमित देखभाल न सिर्फ सोफे की खूबसूरती बनाए रखती है, बल्कि महंगे फर्नीचर को लंबे समय तक सुरक्षित भी रखती है।
लेदर का सोफा मेंटेन करने के टिप्स
माइक्रोफाइबर कपड़े से नियमित सफाई करें
बारिश के मौसम में हवा में मौजूद नमी और धूल लेदर की सतह पर जल्दी जम जाती है। इसलिए सप्ताह में कम से कम दो से तीन बार सूखे या हल्के गीले माइक्रोफाइबर कपड़े से सोफे को साफ करें। इससे धूल, पसीने के दाग और गंदगी हट जाएगी। ध्यान रखें कि अधिक पानी का इस्तेमाल न करें, क्योंकि अतिरिक्त नमी लेदर को नुकसान पहुंचा सकती है।
कमरे में नमी को कंट्रोल रखें
उमस लेदर फर्नीचर की सबसे बड़ी दुश्मन होती है। अगर घर में नमी ज्यादा रहती है तो सोफा चिपचिपा महसूस होने लगता है और उस पर फफूंदी बनने का खतरा भी बढ़ जाता है। कमरे में अच्छी वेंटिलेशन रखें और जरूरत पड़ने पर डीह्यूमिडिफायर या एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करें। इससे लेदर लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा।
लेदर कंडीशनर का करें इस्तेमाल
लेदर समय के साथ सूखने या फटने लगता है। बारिश के मौसम में महीने में एक बार अच्छी गुणवत्ता वाले लेदर कंडीशनर का इस्तेमाल करें। इससे लेदर की प्राकृतिक नमी और चमक बनी रहती है। कंडीशनर लगाने से पहले किसी छोटे हिस्से पर टेस्ट करना बेहतर रहेगा।
गीले दाग तुरंत साफ करें
अगर सोफे पर पानी, चाय, कॉफी या कोई अन्य तरल पदार्थ गिर जाए तो उसे तुरंत सूखे कपड़े से साफ करें। दाग को रगड़ने के बजाय हल्के हाथों से थपथपाकर साफ करें। ज्यादा देर तक नमी रहने से लेदर पर स्थायी दाग या बदबू आ सकती है।
सीधी धूप और गीली दीवार से रखें दूर
बरसात में कई घरों की दीवारों में सीलन आ जाती है। ऐसे में लेदर सोफे को गीली दीवार से सटाकर न रखें। साथ ही तेज धूप में भी लंबे समय तक न रखें, क्योंकि इससे लेदर की सतह फट सकती है और उसका रंग फीका पड़ सकता है। सोफे को ऐसी जगह रखें जहां हवा का अच्छा प्रवाह हो।
लेदर सोफा मेंटेनेंस के लिए अतिरिक्त टिप्स
- तेज केमिकल वाले क्लीनर का इस्तेमाल न करें।
- महीने में एक बार पूरी तरह वैक्यूम क्लीनिंग करें।
- पालतू जानवरों के नाखूनों से लेदर को बचाएं।
- बच्चों को पेन या मार्कर से सोफे पर ड्राइंग करने से रोकें।
- लंबे समय तक इस्तेमाल न होने पर कॉटन कवर से ढककर रखें।
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लेखक: (कीर्ति)
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Protein Deficiency: शरीर में प्रोटीन की कमी पड़ सकती है भारी! इन 5 समस्याओं का बढ़ सकता है खतरा, ऐसे करें भरपाई
Protein Deficiency: प्रोटीन शरीर के लिए सिर्फ मसल्स बनाने वाला पोषक तत्व नहीं है, बल्कि यह कोशिकाओं की मरम्मत, हार्मोन और एंजाइम के निर्माण से लेकर इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने तक कई महत्वपूर्ण काम करता है। अगर शरीर को रोजाना पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन नहीं मिलता, तो इसका असर धीरे-धीरे पूरे शरीर पर दिखने लगता है। शुरुआत में थकान या कमजोरी जैसी सामान्य समस्याएं नजर आती हैं, लेकिन लंबे समय तक कमी रहने पर गंभीर स्वास्थ्य परेशानियां भी हो सकती हैं।
आजकल अनियमित खानपान, फास्ट फूड और असंतुलित डाइट के कारण कई लोग अनजाने में प्रोटीन की कमी का शिकार हो रहे हैं। खासकर बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और जिम करने वाले लोगों को पर्याप्त प्रोटीन की जरूरत होती है।
प्रोटीन की कमी से शुरू हो सकती हैं 5 समस्याएं
मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं
प्रोटीन मसल्स की ग्रोथ और रिपेयर के लिए जरूरी होता है। इसकी कमी होने पर शरीर धीरे-धीरे मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है। इससे ताकत कम होने लगती है, शरीर जल्दी थक जाता है और रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल लग सकता है। लंबे समय तक कमी रहने पर मसल्स लॉस का खतरा बढ़ जाता है।
बार-बार बीमार पड़ना
इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में भी प्रोटीन की अहम भूमिका होती है। शरीर में पर्याप्त प्रोटीन न होने पर एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति को बार-बार सर्दी, खांसी, वायरल संक्रमण और अन्य बीमारियां परेशान कर सकती हैं।
बाल झड़ना और नाखून कमजोर होना
बाल और नाखून मुख्य रूप से प्रोटीन से बने होते हैं। जब शरीर में इसकी कमी होती है तो बाल बेजान होकर झड़ने लगते हैं और नाखून पतले व कमजोर हो जाते हैं। कई बार नाखून आसानी से टूटने भी लगते हैं, जो प्रोटीन की कमी का शुरुआती संकेत हो सकता है।
घाव देर से भरना
शरीर में किसी भी चोट या घाव को ठीक करने के लिए नई कोशिकाओं का निर्माण जरूरी होता है और इसमें प्रोटीन अहम भूमिका निभाता है। यदि शरीर में पर्याप्त प्रोटीन नहीं है तो घाव भरने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है और रिकवरी में अधिक समय लग सकता है।
लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
यदि पर्याप्त कैलोरी के साथ प्रोटीन भी नहीं मिल रहा है, तो शरीर की ऊर्जा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में बिना ज्यादा मेहनत किए भी थकान महसूस होती है, काम में मन नहीं लगता और कमजोरी बनी रहती है। यह संकेत लंबे समय तक नजर आए तो खानपान पर ध्यान देना जरूरी है।
इन तरीकों से पूरी करें प्रोटीन की कमी
- रोजाना डाइट में दाल, राजमा, छोले और सोयाबीन जैसी चीजें शामिल करें।
- दूध, दही, पनीर और छाछ जैसे डेयरी उत्पादों का नियमित सेवन करें।
- अंडा, मछली और चिकन जैसे हाई-प्रोटीन फूड्स को संतुलित मात्रा में लें।
- बादाम, मूंगफली, कद्दू के बीज और चिया सीड्स जैसे हेल्दी स्नैक्स खाएं।
- हर भोजन में प्रोटीन का एक स्रोत जरूर शामिल करें ताकि पूरे दिन शरीर को पर्याप्त मात्रा मिल सके।
- जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेकर ही प्रोटीन सप्लीमेंट का इस्तेमाल करें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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