भारतनेट डिजिटल डिवाइड कम करने में निभा रहा अहम भूमिका, अब तक 2.14 लाख ग्राम पंचायतें जुड़ीं : ज्योतिरादित्य सिंधिया
नई दिल्ली, 12 फरवरी (आईएएनएस)। भारतनेट दुनिया के सबसे बड़े सरकारी नेतृत्व वाले कनेक्टिविटी कार्यक्रमों में से एक है और यह डिजिटल डिवाइड को पाटने और ग्रामीण भारत में ब्रॉडबैंड पहुंच का विस्तार करने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रहा है। यह बयान केंद्रीय संचार और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को दिया।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि भारतनेट भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को इंटरनेट कनेक्टिविटी प्रदान करना है और पिछले ग्यारह वर्षों में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने मोबाइल और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व विस्तार देखा है, जो ऐतिहासिक डिजिटल परिवर्तन को गति दे रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारटनेट ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाकर कनेक्टिविटी प्रदान करता है। देश की 2,56,000 ग्राम पंचायतों में से लगभग 2,14,000 को भारतनेट चरण I और II के तहत ऑनलाइन किया गया है, जिसकी अनुमानित लागत 42,000 करोड़ रुपए है।
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, देश में मोबाइल ग्राहकों की संख्या 2014 में 93 करोड़ से बढ़कर आज 1.2 अरब हो गई है, जबकि मोबाइल पहुंच 75 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई है।
उन्होंने आगे कहा कि इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 2014 में 25 करोड़ से बढ़कर 1 अरब से अधिक हो गई है, जबकि पहुंच 20 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 71.8 प्रतिशत हो गई है। ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या भी 6 करोड़ से बढ़कर 1 अरब से अधिक हो गई है, जबकि औसत फिक्स्ड ब्रॉडबैंड स्पीड अब लगभग 61.55 एमबीपीएस है।
सिंधिया ने 1 अप्रैल 2025 को लॉन्च किए गए राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड मिशन (एनबीएम) 2.0 के 2030 के लक्ष्यों के बारे में भी बताया।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय औसत फिक्स्ड ब्रॉडबैंड डाउनलोड स्पीड 61.55 एमबीपीएस है, 2030 तक लक्ष्य, इसे 100 एमबीपीएस तक ले जाना है। वहीं, दिसंबर 2025 तक 42,000 गांवों में 95 प्रतिशत अपटाइम के साथ ओएफसी कनेक्टिविटी हासिल की गई है, इसे 2030 तक 2.7 लाख गांवों तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मौजूदा समय में प्रति 100 आबादी पर ग्रामीण इंटरनेट ग्राहक 47.16 हैं और इसे 2030 तक 60 ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
--आईएएनएस
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पंजाब के 90% से अधिक घरों का बिजली बिल आया जीरो, फिर भी मुनाफ़े में पंजाब के बिजली निगम : अनुराग ढांडा
पंजाब के 90 फीसदी लोगों के बिजली बिल 0 आने के बाद भी पंजाब का बिजली निगम फायदे में चल रहा है. ये दावा है आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा का. उन्होंने पंजाब की आप सरकार ने लगातार आम जनता के लिए कई कदम उठाए इसी का नतीजा है कि प्रदेश में ज्यादा लोगों के यहां बिजली बिल शून्य ही आया. यानी उन्हें किसी भी तरह का बिजली इस्तेमाल के लिए खर्च करना पड़ा.
खास बात यह है कि ज्यादातर लोगों के बिजली बिल कम आने बाद भी प्रदेश का बिजली निगम फायदे में चल रहा है. यही नहीं यह सब काम महज 5 साल का सरकार ने कर दिखाया है. जबकि हरियाणा में ऐसा नहीं है.
अनुराग ढांडा ने दावा किया कि हरियाणा के बिजली वितरण निगमों पर 27,915 करोड़ का संचित घाटा है और कुल उधारी 20,311 करोड़ तक पहुंच चुकी है. यह स्थिति बताती है कि सरकार न तो वित्तीय सुधार कर पाई और न ही उपभोक्ताओं को राहत दे पाई. हरियाणा का आम परिवार महंगे टैरिफ, भारी फिक्स्ड चार्ज और लगातार बढ़ते बिजली बिलों से परेशान है.
पंजाब बिजली निगम ने कमाया 2600 करोड़ का लाभ
अनुराग ढांडा ने कहा कि हरियाणा में बिजली निगमों की हालत लगातार बिगड़ती गई. घाटा कम करने के बजाय उधारी बढ़ती गई और उसका बोझ सीधे जनता पर डाला गया. उन्होंने इसके विपरीत पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2024-25 में 2600 करोड़ का लाभ कमाया है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी बढ़ोतरी है. राष्ट्रीय रैंकिंग में PSPCL ने A+ ग्रेड के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया है. यह दिखाता है कि सही नीयत और पारदर्शी प्रशासन से बिजली क्षेत्र को लाभ में लाया जा सकता है.
“रोशन पंजाब मिशन” के तहत 300 यूनिट तक बिजली फ्री
यही नहीं ढांडा ने यह भी कहा कि 'रोशन पंजाब मिशन' के तहत प्रदेश में 300 यूनिट तक फ्री बिजली दी जा रही है. उन्होंने दावा किया कि पंजाब में 90 प्रतिशत से अधिक घरेलू उपभोक्ताओं को शून्य बिल का लाभ मिला है और लाखों परिवारों को सीधी राहत पहुंची है.
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