बांग्लादेश में गुरुवार को हुए सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चुनावों में मतदान आगे बढ़ने के साथ ही, लेखिका और कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन ने भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) और बांग्लादेश जमात-ए-इस्लाम के सत्ता में आने पर देश को संभावित खतरों और चुनौतियों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। एक बयान में नसरीन ने जमात द्वारा उत्पन्न "इस्लामी खतरे" के प्रति आगाह किया और चेतावनी दी कि यदि इनमें से कोई भी सत्ता में आता है तो बीएनपी को "बहुत गंभीर चुनौतियों" का सामना करना पड़ेगा।
नसरीन ने चिंता व्यक्त की कि यदि बीएनपी चुनाव जीतती है और सरकार बनाती है, तो जमात बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार मुख्य विपक्षी दल बन सकती है। जमात को "कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी" बताते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि यह अपने दृष्टिकोण में "लोकतंत्र विरोधी, महिला विरोधी, गैर-मुस्लिम विरोधी और धर्मनिरपेक्ष विरोधी है, और देश में अस्थिरता के खतरे की चेतावनी देते हुए दावा किया कि पार्टी के कुछ तत्व चुनी हुई सरकार के खिलाफ हिंसा या चरमपंथ का सहारा ले सकते हैं।
कई लोगों का मानना है कि बीएनपी चुनाव जीतेगी और सरकार बनाएगी। तब जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश के इतिहास में पहली बार मुख्य विपक्षी दल बन जाएगी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि यह एक कट्टरपंथी इस्लामी दल है जो लोकतंत्र विरोधी, महिला विरोधी, गैर-मुस्लिम विरोधी, धर्मनिरपेक्ष विरोधी और सांप्रदायिक सद्भाव का विरोधी है। इस दल में कई उग्रवादी और जिहादी शामिल हैं, और इस बात का वास्तविक खतरा है कि यह चुनी हुई सरकार के खिलाफ हिंसा या आतंकवाद का सहारा ले सकता है।
नसरीन ने चेतावनी दी कि अगर जमात सत्ता में आती है, तो “लोकतंत्र का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा, उनका दावा है कि ऐसी स्थिति से धर्मतांत्रिक व्यवस्था की स्थापना, अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न और महिलाओं के अधिकारों का हनन हो सकता है। उन्होंने कहा कि जमात के सरकार बनाने से बांग्लादेश “एक और अफगानिस्तान” बन जाएगा। उनके बयान में कहा गया है, धर्मतंत्र सत्ता में आ जाएगा और सब कुछ नष्ट कर देगा। अल्पसंख्यकों को उत्पीड़न का सामना करना पड़ेगा और उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जाएगा। महिलाओं को बुर्का और नकाब के अंधेरे में धकेल दिया जाएगा, और देश के एक और अफगानिस्तान में तब्दील होने का खतरा होगा।
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रूस सरकार ने मंगलवार को लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप और टेलीग्राम को ब्लॉक करने की कोशिश की है। विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य रूस के अपने खुद के प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देना और इंटरनेट स्पेस पर सरकारी नियंत्रण को और कड़ा करना है। रूस फिलहाल 'मैक्स' नाम के एक सरकारी सपोर्टेड ऐप को प्रमोट कर रहा है, जिसे आलोचक एक सर्विलांस टूल मान रहे हैं।
व्हाट्सएप की कड़ी प्रतिक्रिया
व्हाट्सएप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी कर इस कदम की आलोचना की है। कंपनी ने कहा कि इस ब्लॉक से 100 मिलियन (10 करोड़) से ज्यादा यूजर्स अपनों से अलग-थलग पड़ जाएंगे। व्हाट्सएप के मुताबिक, लोगों को एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म से हटाकर सरकारी सर्विलांस ऐप पर ले जाने की कोशिश एक 'उल्टा कदम' है, जिससे रूस के नागरिकों की ऑनलाइन सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि वे यूजर्स को कनेक्टेड रखने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
टेलीग्राम का बयान और रूस का रुख
दूसरी तरफ, टेलीग्राम के फाउंडर पावेल डुरोव ने इसे एक 'तानाशाही कदम' बताया है। उन्होंने साफ किया कि रूस की इस दबाव की राजनीति से कंपनी का रास्ता नहीं बदलेगा और वे यूजर प्राइवेसी और आजादी के लिए खड़े रहेंगे। हालांकि, रूस के अधिकारियों ने इन आरोपों को गलत बताया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव का कहना है कि अगर मेटा रूसी कानूनों का पालन करती है और अधिकारियों से बातचीत करती है तो समझौता होने की संभावना है, वरना ऐप की वापसी का कोई चांस नहीं है।
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