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SEBI ने गेटफाइव फंड्स के 500 करोड़ रुपये के SME फंड को दी हरी झंडी

वैकल्पिक निवेश कोष कंपनी गेटफाइव फंड्स को बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से 500 करोड़ रुपये का दूसरा वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) शुरू करने करने की मंजूरी मिल गई है। इस कोष के जरिये तेजी से बढ़ रहे छोटे एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) में निवेश किया जाएगा। कंपनी ने बुधवार को बयान में कहा कि श्रेणी-1 का वैकल्पिक निवेश कोष गेटफाइव अपॉर्च्युनिटी फंड-2 महानगरों, मझोले और छोटे शहरों में उभरते कारोबारों पर ध्यान देगा।

यह रक्षा, एयरोस्पेस, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा, दवा, वित्तीय सेवाओं, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में निवेश करेगा। कंपनी ने कहा कि उसका पहला कोष भी छोटे एवं मझोले उद्यमों पर केंद्रित है, जबकि दूसरा कोष बड़े निवेश लक्ष्य के साथ निवेश के दायरे का विस्तार करेगा। इस कोष का प्रबंधन गेटफाइव फंड्स के प्रबंध निदेशक श्रीकांत गोयल करेंगे।

गोयल ने कहा, ‘‘भारत में छोटे एवं मझोले उद्यमों में निवेश के बड़े अवसर हैं।... अगले तीन से चार वर्षों में करीब 400 कंपनियों के बीएसई एसएमई और एनएसई इमर्ज मंच पर सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।’’ इस कोष का उद्देश्य अच्छे अवसरों वाले भारतीय छोटे एवं मझोले उद्यमों को दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही गेटफाइव वित्तीय सलाह और पूंजी जुटाने की सेवाओं से आगे बढ़कर कंपनियों के साथ निवेश साझेदारी भी करेगा।

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Reliance Jio IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा, 27 करोड़ नए Share जारी करेगी कंपनी

देश के शेयर बाजार में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ आने जा रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और दूरसंचार कंपनी रिलायंस जियो ने 14 अक्टूबर को कंपनी रजिस्ट्रार के पास अपना रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस जमा कर दिया है। इसके मुताबिक, जियो का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर तक इसमें निवेश के लिए आवेदन किया जा सकेगा। इस सार्वजनिक पेशकश के तहत 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। कंपनी की इस पेशकश पर घरेलू निवेशकों के साथ-साथ दुनिया भर के बड़े निवेशकों की भी नजर है।

इस आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों के लिए भी खास व्यवस्था की गई है। उनके लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित रखे जाएंगे। इसके अलावा, पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर अलग रखे जाएंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए पात्रता तय करने की रिकॉर्ड तारीख 14 अक्टूबर रखी गई है। यानी इस तारीख के आधार पर पात्र निवेशक आरक्षित श्रेणी में आवेदन करने का मौका पा सकते हैं।

गौरतलब है कि रिलायंस जियो अभी रिलायंस इंडस्ट्रीज के कारोबारी समूह का हिस्सा है। शेयर बाजार में अलग लिस्टेड होने के बाद जियो के कारोबार का मूल्य स्वतंत्र रूप से तय हो सकेगा। इससे निवेशकों को कंपनी के दूरसंचार और डिजिटल कारोबार की स्थिति समझने में मदद मिलेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के कारोबार में दूरसंचार के अलावा खुदरा व्यापार, तेल से रसायन बनाने और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।

जियो की संभावित कीमत को लेकर भी काफी चर्चा है। पहले आई खबरों के अनुसार, कंपनी का कुल मूल्यांकन करीब 106 अरब डॉलर यानी लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये रखा जा सकता है। शेयर का संभावित मूल्य दायरा 1,065 रुपये से 1,119 रुपये बताया गया है। इस आधार पर कंपनी करीब 30,200 करोड़ रुपये जुटा सकती है। हालांकि, अंतिम कीमत की पुष्टि आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगी। अगर यह पेशकश इसी आकार में आती है, तो यह 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के आईपीओ से भी बड़ी होगी।

फेसबुक की मूल कंपनी मेटा, गूगल, मुबाडाला और सऊदी अरब के सार्वजनिक निवेश कोष जैसे निवेशकों की हिस्सेदारी भी इस पेशकश में बिक्री के लिए नहीं रखी गई है। कंपनी को मिलने वाली रकम में से 27,500 करोड़ रुपये तक का इस्तेमाल कर्ज चुकाने या पहले से भुगतान करने में किया जाएगा। बाकी रकम सामान्य कारोबारी जरूरतों पर खर्च होगी।

मार्च तक जियो के ग्राहकों की संख्या करीब 52.4 करोड़ थी। कंपनी मोबाइल सेवाओं के साथ घरेलू ब्रॉडबैंड, क्लाउड, मनोरंजन, कारोबारी तकनीक और एआई से जुड़ी सेवाएं भी देती है। खबरों के मुताबिक, आईपीओ में संभावित निवेशकों की ओर से 20 अरब डॉलर से अधिक की दिलचस्पी दिखाई गई है। फिडेलिटी, एलियांज और कैपिटल ग्रुप जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के नाम भी चर्चा में हैं।

वहीं, गैर-आधिकारिक बाजार में जियो के शेयरों का प्रीमियम करीब 218 रुपये यानी 19% बताया जा रहा है। इसके आधार पर शेयर का अनुमानित भाव 1,337 रुपये बैठता है, लेकिन यह कीमत तय होने या सूचीबद्ध होने की गारंटी नहीं है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों पर भी इस आईपीओ का असर पड़ सकता है। हालांकि, जियो में रिलायंस की बहुमत हिस्सेदारी बने रहने और बाजार में कम शेयर उपलब्ध होने के कारण कंपनी के वास्तविक मूल्य का लाभ निवेशकों तक कितनी जल्दी पहुंचेगा, यह मांग और लिस्ट होने के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।

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  Sports

Jasprit Bumrah पर निर्भरता और दिशाहीन बॉलिंग, क्या T20 World Cup जीत पाएगी Team India?

भारतीय क्रिकेट टीम ने इस साल T20 विश्व कप का किताब एक बार फिर से अपने नाम किया है। यह लगातार दूसरा मौका है जब टीम इंडिया ने यह किताब जीता था। हालांकि, उसके बाद टीम इंडिया में कई परिवर्तन हुए। सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाया गया। हालांकि वर्तमान स्थिति में देखें तो टीम इंडिया कई मौके पर लड़खड़ाती हुई नजर आ रही है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम इंडिया ने आयरलैंड और इंग्लैंड में बेहद खराब प्रदर्शन किया। वर्तमान में देखें तो अपनी ही जमीन पर वेस्टइंडीज के खिलाफ भी लड़खड़ाती हुई नजर आ रही है। वर्तमान में देखें तो टीम इंडिया में ऐसी कई कमजोरी नजर आती है जो उसके 2028 T20 वर्ल्ड कप अभियान को कमजोर कर सकती है। T20 वर्ल्ड कप 2018 का आयोजन ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होना है।

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बल्लेबाजी में ये है कमजोरी

अगर टीम इंडिया को क्रिकेट में अपना दबदबा कायम रखना है तो समय रहते अपनी गलतियों और कमजोरियों को दूर करनी होगी। वर्तमान में देखें तो टीम इंडिया अपने ओपनिंग बल्लेबाजों पर ज्यादा डिपेंडेंट है। अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी ऐसे खिलाड़ी हैं जो मौका मिलने पर टीम को एक अच्छी शुरुआत दिलाने में कामयाब हो जा रहे हैं। इसके अलावा ईशान किशन भी तीसरे नंबर पर अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं। लेकिन उसके बाद के खिलाड़ियों में निरंतरता की कमी देखी जा रही है जिसकी वजह से मिडिल ऑर्डर कमजोर सा दिखाई दे रहा है। ऐसे में टीम इंडिया वर्तमान में कई प्रयोग कर रही है। लेकिन विश्व कप जीतने के लिए मिडिल ओवर में स्थिरता बेहद जरूरी है।

ऑलराउंडर पर भी ज्यादा जोर

टीम इंडिया में वर्तमान में देखें तो ऑलराउंडर पर भी ज्यादा जोर दिया जा रहा है। यही कारण है कई प्रयोग हो रहा है। शिवम दुबे के अलावा वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, नीतीश कुमार रेड्डी, नमम धीर जैसे खिलाड़ियों को T20 में कई मौके दिए जा रहे हैं। कई बार यह खिलाड़ी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन कई बार यह फ्लॉप होते हैं जिसका असर सीधे-सीधे टीम के प्रदर्शन पर पड़ता है। पहले हार्दिक पांड्या की उपस्थिति में कम से कम ऑलराउंडर का स्टॉल भरा रहता था। वर्तमान में हार्दिक पांड्या टीम में नहीं है। लेकिन अगर वह अपनी फिटनेस को साबित करने में कामयाब हो जाते हैं तो टीम की बड़ी समस्या सॉल्व हो सकती है।
 


गेंदबाजी बड़ी कमजोरी

टीम के लिए सबसे बड़ी कमजोरी वर्तमान में देखें तो गेंदबाजी है। जसप्रीत बुमराह अगर नहीं खेल रहे होते हैं तो गेंदबाजी बेहद ही कमजोर और दिशाहीन नजर आती है। अर्शदीप सिंह अनुभवी और सीनियर खिलाड़ी जरूर है। लेकिन बड़े मौके पर वह कुछ खास कमाल दिखाने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। हाल के दिनों में का फॉर्म भी ऊपर-नीचे हो रहा है। इसके अलावा अर्शदीप के साथ टीम में किस गेंदबाज को मौका दिया जाए, यह बड़ा सवाल रह रहा है। मयंक यादव, प्रिंस यादव जैसे खिलाड़ियों को टीम में शामिल किया गया। लेकिन अब तक इन्होंने कुछ खास कमाल नहीं किया है। यही कारण है कि न्यूजीलैंड दौरे के लिए अनुभवी भुवनेश्वर कुमार की 4 साल बाद टीम इंडिया में वापसी कराई गई है।

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स्पिनर्स कौन होंगे?

स्पिनर्स की बात करें तो अक्षर पटेल नियमित खेलते नजर आते हैं। लेकिन उनके साथ दूसरा स्पिनर कौन होगा यह बड़ा सवाल रहता है? कभी टीम में वॉशिंगटन सुंदर होते हैं तो कभी कुलदीप यादव को मौका मिल जाता है। इसके अलावा वरुण चक्रवर्ती ने बीच में अच्छा खेल दिखाया था। अगला विश्व कप ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में होना है जहां तेज गेंदबाजों को मदद मिलेगी। ऐसे में टीम इंडिया को तेज गेंदबाजी पर खास ध्यान देना होगा। इसके अलावा फील्डिंग में भी टीम इंडिया लगातार कई बड़े मौके पर कैच छोड़ रही है जिसका नुकसान टीम को होता है। इसमें भी सुधार की जरूरत है।

Thu, 15 Oct 2026 18:37:00 +0530

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