ED Action: Reliance Power की 2000 करोड़ से अधिक की संपत्ति FEMA के तहत जब्त
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को कहा कि उसने अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड (आरपीएल) के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत जांच के सिलसिले में कंपनी की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि जब्त की गई संपत्ति में आरपीएल के बैंक खातों में जमा राशि और सासन पावर लिमिटेड में उसकी हिस्सेदारी शामिल है। ईडी ने 12 अक्टूबर को फेमा की धारा 37ए के तहत 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का आदेश जारी किया था।
कंपनी ने मंगलवार को नियामकीय सूचना में ईडी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह एजेंसी के आरोपों को ‘‘विवादित’’ मानती है और अपने हितों के साथ-साथ सभी शेयरधारकों तथा अन्य हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी सलाह के अनुसार सभी उचित कदम उठाएगी। ईडी की जांच भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की उस कार्रवाई से शुरू हुई जो आरपीएल की लेखा में 2,101.46 करोड़ रुपये की राशि को बट्टे खाते में डालने या उसके लिए प्रावधान करने से संबंधित थी। एजेंसी के अनुसार, यह राशि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश तथा उन्हें दिए गए अग्रिम भुगतान से संबंधित थी।
ईडी ने कहा कि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (जिसका बाद में आरपीएल में विलय हो गया) ने 2006 में विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉण्ड जारी कर 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाए थे। इसमें से 27.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर की अनुषंगी कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (सिंगापुर) प्राइवेट लिमिटेड (आरएनआरएल-एस) में किया गया था। ईडी ने आरोप लगाया, ‘‘आरएनआरएल-एस ने यह राशि जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (स्विस) एसए में जमा कराई थी।
इस जमा राशि का इस्तेमाल ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत कंपनियों को दिए गए ऋण के लिए जमानत के रूप में किया गया था।’’ एजेंसी ने दावा किया कि जांच में पता चला कि इन बीवीआई कंपनियों का नियंत्रण और प्रबंधन भारत से रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) द्वारा ऐसे लोगों के माध्यम से किया जाता था जो समूह के निर्देशों के अनुसार काम करते थे। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि ऋण से प्राप्त राशि का इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया गया, जिनमें मॉरीशस स्थित विदेशी कंपनियों के माध्यम से धन को अस्थायी रूप से भारत वापस लाना भी शामिल था। एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस धन से रिलायंस अनिल अंबानी समूह को लाभ हुआ।
CJP को विदेशी फंडिंग के आरोपों पर MEA ने दिया जवाब, Saudi Arabia पर हमले की निंदा की, Canada पर भी दिया बड़ा बयान
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभिन्न मुद्दों पर पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए सऊदी अरब में अरामको मुख्यालय पर हमले की कड़ी निंदा की और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अहम जानकारी दी। इसी दौरान प्रभासाक्षी की ओर से अमेरिकी गायिका मैरी मिलिबेन के उस सोशल मीडिया पोस्ट पर भी सवाल पूछा गया, जिसमें उन्होंने भारत के युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की थी। हम आपको बता दें कि मिलिबेन ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया था कि अमेरिका में कुछ दानदाता प्रधानमंत्री मोदी के विरोध में काम करने वाले लोगों को आर्थिक मदद दे रहे हैं और भारत में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं से ऐसे कथित प्रयासों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से संगठित होने का आह्वान किया। इस पोस्ट पर पूछे गए सवाल के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि “यह टिप्पणी हमने अभी देखी नहीं है।'' प्रभासाक्षी के एक अन्य सवाल के जवाब में प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की ओर से भारत सरकार पर लगाये जा रहे आरोपों को भी बेबुनियाद बताया।
रणधीर जायसवाल ने एक अन्य प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि सऊदी अरब में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर किए जा रहे हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। अरामको मुख्यालय पर हुए हमले समेत लगातार हो रहे हमलों की कड़ी निंदा करते हुए भारत ने इन्हें तत्काल रोकने की मांग की है। भारत ने सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए वहां की सरकार और जनता के साथ एकजुटता जताई तथा क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद व्यक्त की।
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जायसवाल ने बताया कि सऊदी अरब में भारतीय दूतावास वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लगातार संपर्क में है और उनकी सुरक्षा के लिए परामर्श जारी कर रहा है। उल्लेखनीय है कि हवाई अड्डों पर हमलों के कारण उड़ान सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जिसका असर विशेष रूप से रियाद, दम्माम, मदीना और जेद्दा आने-जाने वाली भारतीय विमानन कंपनियों की उड़ानों पर पड़ा है। दूतावास यात्रियों और फंसे हुए लोगों को लगातार अपडेटेड जानकारी उपलब्ध करा रहा है।
उन्होंने 10 अक्टूबर को हुए हमले में घायल भारतीयों का ब्योरा देते हुए कहा कि 12 लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक की दुर्भाग्यवश मौत हो गई। परिवार की इच्छा के अनुसार रियाद में ही उनका अंतिम संस्कार कराया गया। शेष 11 घायलों में से तीन को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है, जबकि आठ का इलाज जारी है। इनमें चार आईसीयू में भर्ती हैं। दूतावास के अधिकारी घायलों और उनके परिवारों के संपर्क में हैं।
ईरान के साथ बातचीत में भारतीय नाविकों और टैंकरों की सुरक्षा पर जोर
इसके अलावा, भारत और ईरान के बीच सुरक्षा संबंधी संवाद पर जायसवाल ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने 12 अक्टूबर को ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव डॉ. मोहसिन रेजाई से बातचीत की। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिति और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। इस दौरान भारतीय नाविकों और भारतीय टैंकरों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
भारत-कनाडा व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने की तैयारी
इसके अलावा, भारत और कनाडा के संबंधों पर प्रवक्ता ने कहा कि कनाडा के व्यापार मंत्री की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई है। ओटावा में वार्ता का पांचवां दौर भी आयोजित हो चुका है। उन्होंने कहा कि दोनों प्रधानमंत्रियों की बातचीत में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा समेत रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई है। द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गति दिखाई दे रही है।
बांग्लादेश को मुद्दे सुलझाने की अपेक्षा, BIMSTEC में आतंकवाद पर सहयोग
साथ ही बांग्लादेश से जुड़े एक सवाल पर जायसवाल ने कहा कि भारत को अपेक्षा है कि संबंधित मुद्दों का समाधान बांग्लादेशी पक्ष की ओर से किया जाएगा। वहीं, भारत की मेजबानी में आयोजित BIMSTEC गृह मंत्रियों की वार्ता के बाद दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया गया। इसमें आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक और धनशोधन विरोधी सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
दिल्ली प्रदर्शन पर संयुक्त राष्ट्र की टिप्पणी को बताया अनुचित
इसके अलावा, दिल्ली में प्रदर्शन को लेकर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की टिप्पणियों पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया। जायसवाल ने इन्हें अनुचित और अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के समान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन का रवैया चुनिंदा मुद्दों पर प्रतिक्रिया देने वाला है। उनके मुताबिक, इस तरह का दृष्टिकोण बहुपक्षवाद में विश्वास को कमजोर करने के साथ संगठन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है।
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