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Prabhasakshi NewsRoom: Houthis के Missile Attacks से दहला Saudi Arabia, पलटवार में Yemen में मचाई भारी तबाही

पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। मिसाइलों और ड्रोन से हमले हो रहे हैं, तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की धमकियां दी जा रही हैं और जवाब में यमन पर सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की ताबड़तोड़ बमबारी ने पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक दिया है। हम आपको बता दें कि सऊदी अरब के धहरान शहर में दुनिया की प्रमुख तेल कंपनियों में शामिल सऊदी अरामको के प्रशासनिक परिसर पर मिसाइल हमले के बाद इमारत में आग लग गई। उधर, सऊदी गठबंधन ने यमन की राजधानी सना और पश्चिमी हुदैदा प्रांत में हूतियों के ठिकानों पर हमले किए। दोनों तरफ से लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाई के बीच अब तेल ठिकाने और सामरिक रूप से अहम समुद्री मार्ग भी इस संघर्ष के केंद्र में आ गए हैं।

अरामको परिसर पर हमला, तीन मंजिलों को नुकसान

सऊदी अरब के पूर्वी शहर धहरान में मंगलवार देर रात अरामको के प्रशासनिक भवन पर हमला हुआ। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, हमले के बाद इमारत में लगी आग पर तुरंत काबू पाया गया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई और कोई घायल भी नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि अरामको के मुख्यालय परिसर पर बैलिस्टिक मिसाइल गिरी थी। सूत्र के मुताबिक, परिसर के एक कार्यालय टावर की ऊपरी तीन मंजिलों को नुकसान पहुंचा है। देखा जाये तो यह हमला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अरामको का यह परिसर कंपनी के प्रमुख परिचालन केंद्रों में शामिल है। यहां से तेल कुओं, पाइपलाइनों, रिफाइनरियों और निर्यात टर्मिनलों के विशाल नेटवर्क की गतिविधियों का संचालन और प्रबंधन जुड़ा हुआ है। ऐसे प्रतिष्ठान पर हमला सऊदी अरब की ऊर्जा व्यवस्था और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।

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हम आपको बता दें कि हूतियों ने पहले ही सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों को संभावित निशाना बताते हुए चेतावनी जारी की थी। संगठन ने तेल कर्मचारियों से उन स्थानों से दूर रहने को कहा था, जिन्हें वह हमलों के लिए वैध लक्ष्य मानता है। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सना पर सऊदी गठबंधन के हमलों के जवाब में कठोर और दर्दनाक प्रतिक्रिया की चेतावनी दी थी। अरामको का मुख्यालय और रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी संभावित लक्ष्यों में गिनाए गए थे।

रियाद में मिसाइलों की बारिश, नागरिक इलाकों तक पहुंचा मलबा

उधर, सऊदी अरब ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में कई मिसाइलों और ड्रोन को रोककर नष्ट किया। अल-अहसा गवर्नरेट के एक प्रशासनिक केंद्र की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को भी इंटरसेप्ट करने की जानकारी दी गई। लेकिन मिसाइलों को हवा में नष्ट कर देना भी खतरे को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाया। सऊदी नागरिक सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, रियाद में दो हूती मिसाइलों को रोकने के बाद गिरे मलबे से चार लोग घायल हो गए। घायलों में दो महिलाएं, एक पुरुष और एक बच्चा शामिल हैं। मलबे के कारण राजधानी में 15 मकानों को भी सीमित नुकसान पहुंचा। इससे पहले रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए हमलों में 13 लोगों की मौत हो गयी थी। इन हमलों के बाद देश में उड़ानों पर भी असर पड़ा।

सना और हुदैदा पर सऊदी गठबंधन की ताबड़तोड़ कार्रवाई

दूसरी ओर, हूतियों के हमलों और धमकियों के बीच सऊदी अरब ने भी अपने सैन्य अभियान को तेज कर दिया है। मंगलवार को सना और पश्चिमी हुदैदा प्रांत में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के हवाई हमलों के बाद जोरदार विस्फोटों की खबरें आईं। गठबंधन ने यमन में ईंधन भंडार, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही। उसका कहना है कि अभियान का उद्देश्य हूतियों की उन क्षमताओं को निष्प्रभावी करना है, जिनके जरिए वे सऊदी अरब, यमन और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को खतरे में डाल रहे हैं।

उधर, हूती संचालित मीडिया ने सना के बाहरी इलाके में यमन पेट्रोलियम कंपनी के एक केंद्र पर हमले की सूचना दी। वहीं, हूतियों ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में यमन के विभिन्न इलाकों में सऊदी अरब ने 104 हवाई हमले किए और उनमें नागरिक हताहत हुए। हम आपको बता दें कि सऊदी अरब की कैबिनेट ने भी हूतियों के लगातार हमलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे। इस तरह दोनों पक्षों की बयानबाजी अब वास्तविक सैन्य कार्रवाई में बदल चुकी है और हर नए हमले के साथ जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ने का खतरा बना हुआ है।

बाब अल-मंदेब पर नजर, तेल बाजार में उबाल

इस संघर्ष का एक बड़ा मोर्चा लाल सागर से जुड़ा समुद्री क्षेत्र भी है। हूतियों ने पिछले महीने लाल सागर के तट से आगे बढ़ते हुए बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश की थी। सऊदी समर्थित सरकारी बलों के अभियान के बाद उन्हें जलडमरूमध्य के निकटवर्ती इलाके से पीछे धकेले जाने की खबरें आईं, लेकिन संगठन की मौजूदगी आसपास बनी हुई है। इसी महीने ताइज़ शहर के आसपास भी हूतियों की बढ़त की सूचना मिली। हम आपको बता दें कि बाब अल-मंदेब लाल सागर में प्रवेश का महत्वपूर्ण दक्षिणी द्वार है। यहां अस्थिरता बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर दबाव पड़ सकता है।

दूसरी ओर, युद्ध की आशंकाओं का असर तेल बाजार में भी दिखाई दिया। कारोबारियों की चिंता इस बात को लेकर है कि यदि सऊदी तेल प्रतिष्ठानों या प्रमुख समुद्री मार्गों पर हमले बढ़े, तो आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हालांकि रूस से डीजल की संभावित अतिरिक्त आपूर्ति इस दबाव को कुछ हद तक संतुलित कर सकती है।

पुरानी जंग फिर हुई तेज

हम आपको यह भी याद दिला दें कि यमन में संघर्ष 2014 के अंत में हूतियों के राजधानी सना और उत्तरी क्षेत्रों पर कब्जे के बाद तेज हुआ था। 2015 में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया। अब सऊदी अरब ने हूतियों की हालिया बढ़त को पलटने के लिए अपना अभियान फिर तेज किया है। रियाद अपने सहयोगियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका ने अब तक हूतियों के खिलाफ युद्ध में सीधे शामिल होने की सऊदी मांग स्वीकार नहीं की है।

देखा जाये तो इस पूरे संघर्ष की पृष्ठभूमि में ईरान की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। ईरान सऊदी अरब का पुराना क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी है और हूतियों के साथ उसके संबंधों को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब और हूतियों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि सऊदी अरब और हूतियों के बीच यह मिसाइल युद्ध कहां जाकर रुकेगा। अरामको जैसे महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठान पर हमला, रियाद में नागरिकों के घायल होने की घटनाएं और यमन में लगातार हवाई हमले दिखाते हैं कि टकराव अब केवल सीमावर्ती सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। यदि दोनों पक्षों ने हमलों का दायरा बढ़ाया, तो इसकी कीमत सऊदी अरब और यमन के नागरिकों के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को भी चुकानी पड़ सकती है।

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दशहरा-दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले? आज कैबिनेट में बोनस पर लग सकती है मुहर...

त्योहारी सीजन से ठीक पहले रेलवे कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर आने की उम्मीद जताई जा रही है. सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को होने वाली बैठक में रेलवे कर्मचारियों के लिए उत्पादकता आधारित बोनस यानी पीएलबी (प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस) के प्रस्ताव पर विचार हो सकता है. बताया जा रहा है कि इस पर करीब 1,900 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है.

कैबिनेट की बैठक कब है और क्या एजेंडा बताया जा रहा है?

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय कैबिनेट की बैठक 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे होनी है। एक रिपोर्ट के अनुसार इसमें तीन अहम प्रस्ताव आ सकते हैं. पहला, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेलवे कर्मचारियों का उत्पादकता आधारित बोनस है. दूसरा, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल के लिए आगे बढ़ाना और तीसरा, सेबी और ब्रिटेन के बीच एक समझौता ज्ञापन है.

क्या बोनस पर फैसला पक्का हो चुका है?

जानकारी के मुताबिक फिलहाल यह सिर्फ अनुमान और सूत्रों की जानकारी पर आधारित है. कैबिनेट में किसी प्रस्ताव पर चर्चा होने का मतलब यह नहीं कि उसे मंजूरी मिल ही गई है और न ही यह रकम की अंतिम पुष्टि है. अंतिम फैसला बैठक के बाद सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही साफ होगा.

फिलहाल कितना बोनस मिलता है?

अभी की व्यवस्था में पात्र नॉन-गजटेड रेलवे कर्मचारियों को अधिकतम 17,951 रुपये का बोनस मिलता है. इसकी गणना 7,000 रुपये प्रति माह की वेतन सीमा के आधार पर होती है. यह सीमा साल 2014-15 से लागू बताई जाती है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बोनस में आमतौर पर 78 दिन के वेतन का पैटर्न देखा गया है और अगर इस बार भी यही फॉर्मूला चला तो रकम पिछले स्तर के आसपास रह सकती है.

बोनस की गणना किस फॉर्मूले से होती है?

रेलवे कर्मचारी एसोसिएशनों के मुताबिक मासिक वेतन की तय सीमा को बोनस के दिनों से गुणा किया जाता है और फिर 30.4 से भाग दे दिया जाता है. इसी हिसाब से 7,000 रुपये की सीमा और 78 दिनों पर अधिकतम राशि करीब 17,951 रुपये बैठती है.

किन कर्मचारियों को यह बोनस मिलता है?

यह बोनस रेलवे के गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को मिलता है. इसमें ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, स्टेशन मास्टर, सुपरवाइजर, टेक्नीशियन, टेक्नीशियन हेल्पर और मिनिस्टीरियल स्टाफ जैसे कर्मचारी शामिल होते हैं. रेलवे सुरक्षा बल के कर्मचारी इस दायरे से बाहर रहते हैं. कुल लाभार्थियों की संख्या लाखों में होती है.

कर्मचारी संगठन क्या मांग कर रहे हैं?

रिपोर्टों के मुताबिक रेलवे कर्मचारी संघ लंबे समय से इस बात की मांग करते रहे हैं कि 7,000 रुपये की वेतन सीमा बहुत पुरानी हो चुकी है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए. उनका तर्क है कि इतने सालों में वेतन और महंगाई दोनों बढ़ चुके हैं इसलिए बोनस की गणना का आधार भी बदलना चाहिए.

CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए, जंतर-मंतर मामले में हुई कार्रवाई

 

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IND vs WI: तिलक वर्मा के ‘घर’ में मनेगी बर्थडे पार्टी! गौतम गंभीर को गिफ्ट में T20 सीरीज देने उतरेगी टीम इंडिया

गौतम गंभीर का बर्थडे है और साथ में भारत-वेस्टइंडीज के बीच चौथा T20I मैच भी. मुकाबला हैदराबाद में है, जो कि तिलक वर्मा का घर है. अब तिलक के घर में गंभीर का बर्थडे कैसा होगा, ये टीम इंडिया तय करेगी. Wed, 14 Oct 2026 10:28:07 +0530

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