दशहरा-दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले? आज कैबिनेट में बोनस पर लग सकती है मुहर...
त्योहारी सीजन से ठीक पहले रेलवे कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर आने की उम्मीद जताई जा रही है. सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को होने वाली बैठक में रेलवे कर्मचारियों के लिए उत्पादकता आधारित बोनस यानी पीएलबी (प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस) के प्रस्ताव पर विचार हो सकता है. बताया जा रहा है कि इस पर करीब 1,900 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है.
कैबिनेट की बैठक कब है और क्या एजेंडा बताया जा रहा है?
सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय कैबिनेट की बैठक 14 अक्टूबर को सुबह 11 बजे होनी है। एक रिपोर्ट के अनुसार इसमें तीन अहम प्रस्ताव आ सकते हैं. पहला, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेलवे कर्मचारियों का उत्पादकता आधारित बोनस है. दूसरा, राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल के लिए आगे बढ़ाना और तीसरा, सेबी और ब्रिटेन के बीच एक समझौता ज्ञापन है.
???? एकता • शक्ति • विजय????
— AISMA (@aismair1953) October 9, 2026
????UNITY • STRENGTH • VICTORY????
Our Right! Our Dues! — Bonus as per 7th CPC, Rs.46159/-????
AISMA ZINDABAD✊ #RailwayBonus46159 @nsitharaman @nsitharamanoffc @PMOIndia @narendramodi @AshwiniVaishnaw @RailMinIndia @news24tvchannel@aajtak pic.twitter.com/e9k6e2OFKc
क्या बोनस पर फैसला पक्का हो चुका है?
जानकारी के मुताबिक फिलहाल यह सिर्फ अनुमान और सूत्रों की जानकारी पर आधारित है. कैबिनेट में किसी प्रस्ताव पर चर्चा होने का मतलब यह नहीं कि उसे मंजूरी मिल ही गई है और न ही यह रकम की अंतिम पुष्टि है. अंतिम फैसला बैठक के बाद सरकार की आधिकारिक घोषणा से ही साफ होगा.
फिलहाल कितना बोनस मिलता है?
अभी की व्यवस्था में पात्र नॉन-गजटेड रेलवे कर्मचारियों को अधिकतम 17,951 रुपये का बोनस मिलता है. इसकी गणना 7,000 रुपये प्रति माह की वेतन सीमा के आधार पर होती है. यह सीमा साल 2014-15 से लागू बताई जाती है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बोनस में आमतौर पर 78 दिन के वेतन का पैटर्न देखा गया है और अगर इस बार भी यही फॉर्मूला चला तो रकम पिछले स्तर के आसपास रह सकती है.
बोनस की गणना किस फॉर्मूले से होती है?
रेलवे कर्मचारी एसोसिएशनों के मुताबिक मासिक वेतन की तय सीमा को बोनस के दिनों से गुणा किया जाता है और फिर 30.4 से भाग दे दिया जाता है. इसी हिसाब से 7,000 रुपये की सीमा और 78 दिनों पर अधिकतम राशि करीब 17,951 रुपये बैठती है.
किन कर्मचारियों को यह बोनस मिलता है?
यह बोनस रेलवे के गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को मिलता है. इसमें ट्रैक मेंटेनर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर, स्टेशन मास्टर, सुपरवाइजर, टेक्नीशियन, टेक्नीशियन हेल्पर और मिनिस्टीरियल स्टाफ जैसे कर्मचारी शामिल होते हैं. रेलवे सुरक्षा बल के कर्मचारी इस दायरे से बाहर रहते हैं. कुल लाभार्थियों की संख्या लाखों में होती है.
कर्मचारी संगठन क्या मांग कर रहे हैं?
रिपोर्टों के मुताबिक रेलवे कर्मचारी संघ लंबे समय से इस बात की मांग करते रहे हैं कि 7,000 रुपये की वेतन सीमा बहुत पुरानी हो चुकी है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए. उनका तर्क है कि इतने सालों में वेतन और महंगाई दोनों बढ़ चुके हैं इसलिए बोनस की गणना का आधार भी बदलना चाहिए.
चुनाव से पहले ईरान पर हमले की तैयारी? ट्रंप और नेतन्याहू की बातचीत से बढ़ी हलचल
US-Iran War: अमेरिका और इजरायल में चुनावी सरगर्मी के बीच ईरान को लेकर सैन्य कार्रवाई की अटकलें तेज हो गई हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हाल ही में बातचीत हुई. बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों नेताओं के बीच ईरान पर दोबारा हमला करने की संभावना पर चर्चा हुई. हालांकि, इस मुद्दे पर अभी तक किसी अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं हुई है
अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सिओम की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बातचीत की जानकारी दो अमेरिकी अधिकारियों, एक इजरायली अधिकारी और एक अन्य जानकार सूत्र से मिली है. बताया गया है कि नेतन्याहू ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सामने आई खुफिया जानकारियों से चिंतित हैं. इजरायल को आशंका है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
हालांकि, ट्रंप ने पिछले बीते गुरुवार को इस बात के संकेत दिए थे कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं की जाएगी. बावजूद इसके रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों की सेनाएं संभावित घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए सतर्क हैं और अपनी तैयारियां जारी रखे हुए हैं.
नेतन्याहू चाहते हैं ईरान के खिलाफ फिर कार्रवाई?
रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि नेतन्याहू ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने के पक्ष में हैं. उन्होंने इस विषय पर ट्रंप के साथ कई बार बातचीत की है. सूत्र के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू को तैयारियां शुरू करने के लिए कहा, लेकिन हमले की तारीख या किसी निश्चित समयसीमा को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई. अमेरिकी अधिकारी का कहना था कि तैयारी करने का निर्देश मिलने का यह मतलब नहीं है कि हमला तत्काल होने वाला है. यानी हमले की कार्रवाई बाद में हो सकती है और यह भी संभव है कि ऐसा कोई कदम न उठाया जाए.
ईरान के साथ नहीं होगी दोबारा बातचीत
वहीं इस पूरे मामले पर अमेरिकी प्रशासन की ओर से अलग रुख सामने आया है. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने दोनों नेताओं के बीच ईरान के साथ युद्ध दोबारा शुरू करने पर चर्चा होने की बात से इनकार किया. वहीं, नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ नियमित संपर्क में रहते हैं.
ईरान पर हमले को लेकर क्यों असमंजस में हैं ट्रंप?
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई के प्रस्ताव को लेकर ट्रंप का रुख पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. एक इजरायली अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति इस विचार के प्रति सकारात्मक दिखाई दिए, लेकिन बाद में उनकी हिचकिचाहट सामने आने लगी. एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इस मुद्दे पर ट्रंप का रुख बदलता रहा है. अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी सैन्य कार्रवाई को लेकर एक जैसी राय नहीं है.
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