Uttarakhand Places: फरवरी में उत्तराखंड की 6 जगहें हैं परफेक्ट टूरिंग डेस्टिनेशंस, फैमिली के साथ बनाएं ट्रिप
Uttarakhand Places: फरवरी का महीना घूमने के लिहाज से सबसे बेहतरीन माना जाता है, खासकर अगर आप पहाड़ों का प्लान बना रहे हैं। न ज्यादा ठंड, न ज्यादा भीड़ और मौसम भी एकदम सुहावना। ऐसे में उत्तराखंड फैमिली ट्रिप के लिए परफेक्ट चॉइस बन जाता है। देवभूमि उत्तराखंड में ऐसी कई जगहें हैं, जहां फरवरी में घूमने का मजा दोगुना हो जाता है।
यहां बर्फ से ढकी चोटियां, शांत झीलें, हरे-भरे जंगल और साफ हवा फैमिली के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का शानदार मौका देती हैं। आइए जानते हैं उत्तराखंड की 6 ऐसी जगहों के बारे में, जहां फरवरी में ट्रिप यादगार बन सकती है।
उत्तराखंड की 6 लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेस
नैनीताल - फैमिली ट्रिप का ऑल टाइम फेवरेट
नैनीताल फरवरी में घूमने के लिए बेहद खूबसूरत रहता है। ठंडी हवा, नैनी झील में बोटिंग और स्नो व्यू पॉइंट्स फैमिली के लिए परफेक्ट हैं। मॉल रोड पर घूमना और लोकल फूड ट्राई करना बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आता है।
मसूरी - पहाड़ों की रानी का अलग ही अंदाज
फरवरी में मसूरी में हल्की ठंड और साफ मौसम मिलता है। गन हिल, केम्प्टी फॉल्स और कंपनी गार्डन फैमिली टूरिस्ट्स के बीच खासे लोकप्रिय हैं। यहां की शांत वादियां ट्रिप को रिलैक्सिंग बना देती हैं।
ऋषिकेश - सुकून और एडवेंचर का कॉम्बिनेशन
अगर फैमिली ट्रिप में शांति के साथ थोड़ा रोमांच भी चाहते हैं, तो ऋषिकेश बढ़िया ऑप्शन है। फरवरी में गंगा किनारे मौसम बेहद सुखद रहता है। यहां योग, ध्यान और गंगा आरती के साथ हल्की एडवेंचर एक्टिविटीज भी एंजॉय की जा सकती हैं।
अल्मोड़ा - शांत पहाड़ों का असली अनुभव
अल्मोड़ा उन लोगों के लिए परफेक्ट है, जो भीड़-भाड़ से दूर रहना चाहते हैं। फरवरी में यहां का मौसम ठंडा लेकिन आरामदायक होता है। फैमिली के साथ लोकल संस्कृति, मंदिर और पहाड़ी व्यंजन एक्सप्लोर करने का अच्छा मौका मिलता है।
कौसानी - हिमालय का शानदार नजारा
कौसानी फरवरी में बेहद खूबसूरत नजर आता है। नंदा देवी और त्रिशूल जैसी चोटियों का साफ नजारा फैमिली ट्रिप को खास बना देता है। यह जगह बच्चों और बुजुर्गों दोनों के लिए शांत और सुरक्षित मानी जाती है।
औली - बर्फ और मस्ती का परफेक्ट डेस्टिनेशन
अगर फैमिली के साथ बर्फ देखने का मन है, तो औली फरवरी में बेस्ट रहता है। यहां स्नोफॉल, केबल कार राइड और बर्फ से ढकी ढलानें ट्रिप को यादगार बना देती हैं। हालांकि बच्चों के साथ जाने पर गर्म कपड़ों की पूरी तैयारी जरूरी है।
क्यों चुनें फरवरी में उत्तराखंड
फरवरी में उत्तराखंड का मौसम ट्रैवल के लिए संतुलित रहता है। होटल्स की उपलब्धता बेहतर होती है और पीक सीजन के मुकाबले भीड़ भी कम रहती है। फैमिली के साथ आरामदायक और बजट फ्रेंडली ट्रिप के लिए यह समय काफी सही माना जाता है।
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Eye Care Tips: सुबह उठते ही देखने लगते हैं मोबाइल? आई केयर के लिए 5 बातें रखें ध्यान
Eye Care Tips: अलार्म बंद करते ही क्या आपका हाथ सीधे मोबाइल की स्क्रीन पर चला जाता है? आंखें पूरी तरह खुली भी नहीं होतीं और हम नोटिफिकेशन, मैसेज और सोशल मीडिया स्क्रॉल करने लगते हैं। यह आदत आज की डिजिटल लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसका असर आपकी आंखों पर कितना पड़ता है?
सुबह उठते ही मोबाइल देखने से आंखों पर अचानक तेज रोशनी और ब्लू लाइट का दबाव पड़ता है। इससे ड्राईनेस, जलन, सिरदर्द और आंखों की थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अगर आप अपनी आई केयर को लेकर सच में सजग हैं, तो इन 5 जरूरी बातों को रोजमर्रा की आदत में शामिल करना बेहद जरूरी है।
आंखों की केयर के लिए ध्यान रखें 5 बातें
जागने के बाद तुरंत स्क्रीन न देखें
नींद से उठते समय आंखें आराम की स्थिति में होती हैं। अचानक मोबाइल की तेज रोशनी उन्हें स्ट्रेस दे सकती है। कोशिश करें कि उठने के बाद कम से कम 15–20 मिनट तक स्क्रीन से दूरी रखें। इस दौरान हल्की स्ट्रेचिंग या पानी पीने जैसी आदत अपनाएं।
आंखों को दें नेचुरल मॉइश्चर
रातभर सोने के दौरान आंसुओं का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे आंखें थोड़ी ड्राई हो सकती हैं। सुबह उठकर ठंडे पानी से आंखों को धोएं। इससे आंखों को ताजगी मिलेगी और ड्राईनेस कम होगी।
प्राकृतिक रोशनी में समय बिताएं
सुबह की हल्की धूप आंखों के लिए फायदेमंद होती है। मोबाइल देखने की बजाय खिड़की खोलकर बाहर की प्राकृतिक रोशनी में कुछ मिनट बिताएं। इससे आंखों की मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और दिनभर के लिए बेहतर फोकस मिलता है।
20-20-20 नियम अपनाएं
अगर सुबह मोबाइल देखना जरूरी हो, तो 20-20-20 नियम का पालन करें। हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। इससे आंखों पर पड़ने वाला तनाव कम होता है।
ब्लू लाइट फिल्टर का इस्तेमाल करें
मोबाइल की ब्लू लाइट आंखों के लिए हानिकारक मानी जाती है। नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर ऑन रखें। इससे आंखों की थकान और जलन में कमी आ सकती है। साथ ही स्क्रीन ब्राइटनेस को भी जरूरत के मुताबिक कम रखें।
क्यों जरूरी है सावधानी?
लगातार स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन, धुंधला दिखना और सिरदर्द जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। बच्चों और युवाओं में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर आप अपनी आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं।
(Disc।aimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी डॉक्टर/विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)
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(लेखक:कीर्ति)
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