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गठबंधन रहेगा, पर मंत्री पद नहीं! MK Stalin ने Congress के लिए Tamil Nadu में खींची 'रेड लाइन'

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बुधवार को कांग्रेस और अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन के लिए दिशा-निर्देश जारी किए, क्योंकि राज्य में इस साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं। इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में बोलते हुए, स्टालिन ने कांग्रेस जैसे डीएमके के सहयोगियों के साथ किसी भी प्रकार के साझा शासन मॉडल को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया। हाल ही में कांग्रेस के भीतर से कुछ नेताओं ने डीएमके के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री पद की मांग उठाई थी। स्टालिन ने जोर देकर कहा कि सत्ता-साझाकरण व्यवस्था तमिलनाडु के लिए उपयुक्त नहीं होगी।
 

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स्टालिन ने कहा कि शासन में हिस्सेदारी की मांग तमिलनाडु पर लागू नहीं होती। वे इसे हमसे बेहतर जानते हैं। यह नारा उन लोगों की सोची-समझी साजिश है जो हमें एकजुट नहीं देख सकते। हालांकि, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि राज्य में चुनाव होने पर कांग्रेस सहयोगी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस निश्चित रूप से डीएमके गठबंधन में बनी रहेगी। हमारा गठबंधन सौहार्दपूर्ण है। मीडिया जानबूझकर कुछ अनावश्यक धारणाएं बना रहा है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ अपने संबंधों को दोनों पार्टियों के बीच निरंतर गठबंधन का एक महत्वपूर्ण तत्व बताया। गांधी ने डीएमके नेता कनिमोझी से बातचीत करके गठबंधन में तनाव कम करने में अग्रणी भूमिका निभाई है ताकि कांग्रेस डीएमके के साथ बनी रहे। स्टालिन ने कहा कि राहुल गांधी मेरे भाई जैसे हैं; वे मेरे परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने खुद भी कई बार यह कहा है। हमारा रिश्ता राजनीति से परे है।
 

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इससे पहले, तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सेल्वा पेरुंथगई ने भी संकेत दिया था कि डीएमके-कांग्रेस गठबंधन अंतिम रूप से तय है और औपचारिक सीट बंटवारे की बातचीत 22 फरवरी से शुरू होगी। उन्होंने कहा कि डीएमके के नेतृत्व वाला गठबंधन बेहद मजबूत गठबंधन है। जनता पहले ही यह प्रमाणित कर चुकी है कि यह सरकार बनी रहेगी। हमें लगातार जीत हासिल करने में कोई संदेह नहीं है। सब कुछ अच्छा ही हो रहा है। 22 तारीख को होने वाली गठबंधन वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न होगी।

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Prabhasakshi NewsRoom: Bangladesh में बन सकते हैं 2001 वाले हालात, चुनाव सर्वेक्षण देखकर हिंदू घबराये

बांग्लादेश में चुनाव से ठीक पहले एक हिंदू व्यापारी की निर्मम हत्या और चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में उसी दल और गठबंधन की बढ़त की खबरों ने वहां के हिंदुओं को भीतर तक झकझोर दिया है, जिनके पिछले शासनकाल के दौरान हिंदुओं पर अत्याचार, पलायन और भय का काला दौर देखा गया था। यादों के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि वर्तमान घटनाओं और राजनीतिक संकेतों ने फिर वही डर जगा दिया है कि कहीं इतिहास खुद को दोहरा न दे।

हम आपको बता दें कि 9 फरवरी की रात मयमनसिंह जनपद के दक्षिणकांदा गांव में 62 वर्ष के चावल व्यापारी सुषेन चंद्र सरकार की निर्मम हत्या कर दी गयी। हमलावरों ने धारदार हथियार से वार कर उन्हें दुकान के भीतर लहूलुहान छोड़ा, शटर गिराया और लाखों टका लेकर फरार हो गये। जब परिवार ने खोजबीन की तो वह खून से सने मिले। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत बताया। उनके पुत्र सुजन सरकार का कहना है कि पिता की किसी से दुश्मनी नहीं थी, फिर भी हत्या की गयी और धन लूटा गया। सुजन सरकार ने हत्यारों की शीघ्र पहचान कर उन्हें दंडित करने की मांग की है।

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हम आपको याद दिला दें कि इसी क्षेत्र में एक अन्य हिंदू युवक दिपु चंद्र दास की भी भीड़ ने पीटकर हत्या कर उसे जला दिया था। इन घटनाओं ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समाज सुरक्षित है? देखा जाये तो पिछले एक वर्ष में हत्या, आगजनी, मंदिरों में तोड़फोड़, जमीन कब्जाने और झूठे आरोपों के सहारे भीड़ को उकसाने की घटनाएं बढ़ी हैं। कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूह लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि राजनीतिक बदलाव के बाद अल्पसंख्यकों पर दबाव तेज हुआ है। भारत ने भी चिंता जताते हुए कहा है कि बार बार हो रहे हमलों को निजी झगड़ा या साधारण विवाद बताकर टालना दोषियों का हौसला बढ़ाता है। भारत का कहना है कि ऐसे माहौल से भय और असुरक्षा फैलती है। 

हम आपको बता दें कि 12 फरवरी को बांग्लादेश में होने वाले चुनाव में 300 में से 299 सीटों पर मतदान होगा और साथ में जनमत संग्रह भी होगा। प्रचार अवधि समाप्त हो चुकी है। इस बार अवामी लीग को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी गयी, जिसका शेख हसीना ने विरोध किया है। वह इस समय भारत में निर्वासन में हैं और उनके विरुद्ध मृत्यु दंड का आदेश भी सुनाया जा चुका है। उनके करीबी और पूर्व वित्त मंत्री हसन महमूद ने चुनाव को पूर्व नियोजित बताते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया एक खास सोच को सत्ता में बनाये रखने के लिए गढ़ी गयी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समाज से बहिष्कार की अपील करते हुए यह भी दावा किया है कि वर्तमान अंतरिम सरकार बाहरी असर में काम कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि शेख हसीना सुरक्षित हैं और जल्द ही लौटेंगी।

दूसरी ओर, चुनावी मैदान में मुख्य टक्कर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात ए इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन के बीच मानी जा रही है। एक विस्तृत जनमत सर्वेक्षण में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के गठजोड़ को बढ़त दिखायी गयी है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि 200 से अधिक स्थान उस गठजोड़ को मिल सकते हैं, जबकि जमात वाले मोर्चे को चार दर्जन के आसपास स्थान मिलेंगे। 41 हजार से अधिक लोगों की राय पर आधारित इस आकलन में महिलाओं और कुछ क्षेत्रों में राष्ट्रवादी दल को विशेष समर्थन बताया गया है। कई स्थानों पर कड़ी टक्कर का अनुमान है। परिणाम 13 फरवरी को आयेंगे।

इस बीच, मत गणित से परे एक गहरी बेचैनी भी देखने को मिल रही है। बांग्लादेश के हिंदू और उदार सोच वाले वर्ग में यह भावना बढ़ रही है कि वे दो पाटों के बीच पिस रहे हैं। एक ओर जमीनी स्तर पर हमले, जबरन वसूली और जमीन कब्जे की शिकायतें हैं, दूसरी ओर उन्हें लगता है कि भारत अपनी नीति बदल रहा है। बहुत से लोगों को याद है कि 2001 से 2006 के दौर में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात के शासन के समय हजारों हिंदू देश छोड़ने पर मजबूर हुए थे, सैंकड़ों महिलाओं पर अत्याचार हुए थे। उस काले दौर की स्मृति आज भी जिंदा है। उस समय खालिदा जिया बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं और उनके निधन के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की कमान उनके बेटे संभाल रहे हैं।

यहां यह भी काबिलेगौर है कि जब भारत ने हाल में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेताओं से संवाद बढ़ाया और जमात से भी संपर्क के संकेत दिये, तो उदार और हिंदू वर्ग के बीच असमंजस गहरा गया। उन्हें लगता है कि जिन मूल्यों के कारण वे भारत की ओर भरोसे से देखते थे, वही आधार कमजोर पड़ रहा है। जनसंख्या में हिंदुओं का हिस्सा दशक दर दशक घटा है, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत भी घटी है। ऐसे में हर हमला उनके भविष्य को लेकर डर बढ़ाता है।

उधर, बांग्लादेश के भीतर एक नई पीढ़ी भी है जो लोकतंत्र, स्वाभिमान और बाहरी दखल से मुक्ति की बात कर रही है। विश्वविद्यालयों की दीवारों पर लिखे नारे बताते हैं कि युवा पीढ़ी भारत के असर को संदेह की नजर से देखती है। सीमा पर तनाव, पानी बंटवारा, व्यापार बाधाएं और कठोर बयानबाजी ने इस सोच को हवा दी है। कुल मिलाकर बांग्लादेश इस समय एक कठिन मोड़ पर खड़ा है। चुनावी अनिश्चितता, अल्पसंख्यक सुरक्षा का सवाल और पड़ोसी देशों की सामरिक खींचतान, सब एक साथ चल रहे हैं। देश का भूगोल ऐसा है कि यहां कई शक्तियों के हित टकराते हैं। जो भी सरकार बनेगी, उसे भीतर की दरारें भरनी होंगी और बाहर के रिश्ते संभालने होंगे।

बांग्लादेश की आज की तस्वीर चेतावनी देती है कि लोकतंत्र केवल मतपेटी से नहीं चलता, बल्कि नागरिक सुरक्षा और भरोसे से चलता है। जब अल्पसंख्यक अपने घर और दुकान में सुरक्षित न हों, तब चुनाव का उत्सव खोखला लगता है। सुषेन चंद्र सरकार की हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि राज्य की विश्वसनीयता पर चोट है।

बहरहाल, भारत और बांग्लादेश का रिश्ता केवल कूटनीति नहीं, इतिहास और संस्कृति से जुड़ा है। पर रिश्ते बराबरी, सम्मान और संवेदनशीलता से चलते हैं। बांग्लादेश की सत्ता को समझना होगा कि अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमला देश की छवि, निवेश और स्थिरता सबको नुकसान पहुंचाता है। भारत को भी समझना होगा कि सामरिक दृष्टि से अस्थिर बांग्लादेश किसी के हित में नहीं है। चरमपंथ, अवैध हथियार, सीमा तनाव और बाहरी दखल पूरे क्षेत्र को असुरक्षित बनाते हैं।

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  Sports

U19 World Cup 2026: आयुष म्हात्रे की ऐतिहासिक कप्तानी, सचिन तेंदुलकर से मिला खास तोहफा

जिम्बाब्वे में इतिहास रचकर लौटे भारत अंडर-19 टीम के कप्तान आयुष म्हात्रे अब मुंबई में हैं और उनकी यह वापसी यादगार पलों से भरी रही। बता दें कि उनकी अगुवाई में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को फाइनल में सात विकेट से हराकर आईसीसी अंडर-19 विश्व कप का खिताब रिकॉर्ड छठी बार जीता है।

स्वदेश लौटने के बाद आयुष ने भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े नाम सचिन तेंदुलकर से मुलाकात की। यह मुलाकात युवा कप्तान के लिए खास बन गई, जब मास्टर ब्लास्टर ने उन्हें अपनी टेस्ट जर्सी भेंट की। जर्सी पर सचिन तेंदुलकर ने हाथ से लिखा संदेश भी दिया, जिसमें उन्होंने आयुष के उज्ज्वल करियर की कामना की।

आयुष म्हात्रे ने इस पल को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए भावुक शब्दों में लिखा कि वह बचपन में सचिन को स्क्रीन पर देखा करते थे और आज उनके घर पर खड़े होकर उनके सफर का एक हिस्सा हाथ में पकड़े हैं। उन्होंने इस सम्मान को जीवन भर संजोकर रखने की बात कही।

गौरतलब है कि विश्व कप जीत के बाद आयुष और उनके साथी खिलाड़ी उधव मोहन का अपने-अपने घरों में जोरदार स्वागत किया गया। मुंबई के विरार में आयुष को स्थानीय नायक की तरह सम्मान मिला, जहां परिवार, दोस्त और पड़ोसी बड़ी संख्या में जुटे। वहीं, उधव मोहन को नई दिल्ली में गर्मजोशी से स्वागत मिला।

मौजूद जानकारी के अनुसार आयुष म्हात्रे ने नॉकआउट मुकाबलों में टीम को आगे से लीड किया। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में 51 गेंदों पर 53 रन बनाए, जबकि अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में 59 गेंदों पर 62 रन की अहम पारी खेली। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने सात पारियों में 214 रन बनाए और भारत के चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे।

हालांकि, टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा चर्चा वैभव सूर्यवंशी के प्रदर्शन की रही। उन्होंने 439 रन बनाकर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का पुरस्कार जीता। फाइनल में उनकी 175 रन की विस्फोटक पारी ने कई अंडर-19 विश्व कप रिकॉर्ड तोड़े, जिसमें 15 चौके और 15 छक्के शामिल रहे।

कुल मिलाकर यह जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की मजबूत झलक मानी जा रही है, जिसमें आयुष म्हात्रे जैसे युवा नेतृत्वकर्ता अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। 
Wed, 11 Feb 2026 23:34:06 +0530

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