कीमती धातुओं ने फिर पकड़ी रफ्तार, सोना 1.58 लाख के पार तो चांदी 2.61 लाख के ऊपर
मुंबई, 11 फरवरी (आईएएनएस)। मंगलवार को आई भारी गिरावट के बाद सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को कमोडिटी बाजार में जोरदार हलचल देखने को मिल रही है और कीमती धातुओं सोने और चांदी की कीमतों में मजबूत रिकवरी देखने को मिल रही है। एमसीएक्स पर सुबह से ही दोनों कीमती धातुओं में तेजी का माहौल है। खासतौर पर चांदी, जो मंगलवार को करीब 10,000 रुपए तक टूट गई थी, आज फिर तेजी की राह पर लौटती नजर आ रही है।
बुधवार को शुरुआती कारोबार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना करीब एक प्रतिशत बढ़कर 1,58,436 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्रा-डे हाई पर पहुंच गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी करीब 3 प्रतिशत चढ़कर 2,62,892 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के उच्च स्तर पर पहुंच गई।
हालांकि खबर लिखे जाने तक (दोपहर करीब 12.56 बजे) एमसीएक्स पर 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना करीब 1 प्रतिशत यानी 1,554 रुपए की तेजी के साथ 1,58,357 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था, तो वहीं 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी 3.72 प्रतिशत यानी 9,401 रुपए की उछाल के साथ 2,61,949 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही थी।
हालांकि, अगर रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें तो अब भी दोनों धातुएं अपने ऑल टाइम हाई से काफी नीचे हैं। 29 जनवरी को सोने ने 1,83,000 रुपए और चांदी ने 4,20,000 रुपए का उच्चतम स्तर छुआ था।
अमेरिका में उपभोक्ता खर्च के कमजोर आंकड़े आने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, जिस कारण सोने-चांदी की कीमतों में तेजी आई।
शुरुआती कारोबार में डॉलर इंडेक्स भी थोड़ा कमजोर होकर 96.80 से घटकर 96.59 पर आ गया। डॉलर के कमजोर होने से विदेशी निवेशकों के लिए सोना-चांदी थोड़ा सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है। इससे भी कीमतों को सहारा मिला।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी की कीमतों में बढ़त देखी गई। अमेरिका में दिसंबर महीने के रिटेल सेल्स के आंकड़े उम्मीद से कम रहे, जिससे यह संकेत मिला कि लोगों का खर्च कम हो रहा है और अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार अब इस साल कम से कम तीन बार ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कर रहा है, जबकि पहले दो बार कटौती की संभावना जताई जा रही थी। ब्याज दर कम होने से सोना-चांदी जैसे निवेश विकल्पों को फायदा होता है।
कॉमेक्स गोल्ड फिलहाल 4,900 से 5,100 डॉलर के दायरे में कारोबार कर रहा है। पहले यह 5,500 से 5,600 डॉलर के ऊंचे स्तर तक पहुंच गया था, जिसके बाद इसमें कुछ गिरावट आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट सामान्य मुनाफावसूली है और लंबी अवधि में सोने की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
चांदी के बारे में भी कहा गया है कि उद्योगों में इसकी मांग और सप्लाई की कमी लंबे समय में इसकी कीमतों को सहारा दे रही है, हालांकि इसमें उतार-चढ़ाव ज्यादा रहता है। कॉमेक्स सिल्वर के लिए 65 से 70 डॉलर का स्तर मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, सोने के लिए 1,55,500 और 1,54,000 रुपए का स्तर सपोर्ट है, जबकि 1,57,700 और 1,59,000 रुपए पर रेजिस्टेंस हो सकता है। चांदी के लिए 2,44,000 और 2,48,800 रुपए सपोर्ट स्तर हैं, जबकि 2,60,000 रुपए पर रेजिस्टेंस देखा जा सकता है।
निवेशक अब अमेरिका के रोजगार (नॉन-फार्म पेरोल) और महंगाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि फेड की आगे की ब्याज दर नीति के बारे में संकेत मिल सके।
--आईएएनएस
डीबीपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ईरान की ओर बढ़ रहा 'विशाल बेड़ा,' ट्रंप बोले- डील करें तेहरान वरना नतीजे भुगतें
वाशिंगटन, 11 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की ओर एक विशाल नौसैनिक बेड़ा तैनात किया है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि ईरान बातचीत करना चाहता है, लेकिन अमेरिका की शर्तें स्पष्ट और सख्त होंगी।
फॉक्स बिजनेस के लैरी कडलो को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने क्षेत्र में बढ़ी अमेरिकी सैन्य सक्रियता का जिक्र करते हुए कहा, जैसा कि आप जानते हैं, इस समय एक विशाल बेड़ा ईरान की ओर जा रहा है। देखते हैं क्या होता है।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है ईरान समझौता करना चाहता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है वे डील करना चाहते हैं। अगर वे ऐसा नहीं करते तो यह उनकी मूर्खता होगी। हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि किसी भी समझौते में अमेरिका की मूल चिंताओं को शामिल करना जरूरी होगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, डील अच्छी होनी चाहिए। कोई परमाणु हथियार नहीं, कोई मिसाइल नहीं, और बाकी सभी मुद्दे जिन्हें आप खत्म करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या मौजूदा ईरानी शासन पर भरोसा किया जा सकता है।
ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और जो बाइडेन की ईरान नीति की आलोचना की। उन्होंने कहा, ओबामा और बाइडेन ने ईरान के मामले में एक राक्षस खड़ा कर दिया। वह परमाणु समझौता सबसे बेवकूफी भरे समझौतों में से एक था जो मैंने देखा है।
उन्होंने पहले ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी कार्रवाई का भी जिक्र किया और कहा, पिछली बार हमने उनकी परमाणु क्षमता खत्म की थी, इस बार और करना पड़ेगा या नहीं, यह देखना होगा।
ट्रंप ने सैन्य तैनाती और कूटनीति को एक व्यापक रणनीति का हिस्सा बताया, जिसमें आर्थिक दबाव और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों शामिल हैं। उन्होंने दावा किया, मैंने आठ युद्ध सुलझाए, जिनमें से कम से कम छह टैरिफ के जरिए सुलझे।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर तनाव बना हुआ है। पश्चिम एशिया में ईरान की भूमिका ऊर्जा बाजार, समुद्री मार्गों और भू-राजनीतिक समीकरणों को सीधे प्रभावित करती है।
भारत, जिसके ईरान से ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध हैं, खाड़ी क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखता है। ऊर्जा निर्भरता, कनेक्टिविटी परियोजनाएं, और समुद्री सुरक्षा भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम हैं।
--आईएएनएस
वीकेयू/एएस
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