शाह बोले- राहुल SIR के बहाने घुसपैठियों को बचा रहे:2029 में लगातार चौथी बार उनकी हार होगी; INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन के बीच पहला बयान
देश भर में SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पहली बार बयान दिया। उन्होंने कहा- राहुल गांधी SIR की आड़ में घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस देश की जनता उनके एजेंडे को अच्छी तरह समझती है। शाह ने कहा- मैं राहुल और उनके साथियों से कहना चाहता हूं कि 2029 में एक बार फिर करारी हार के लिए तैयार रहें। 2029 के लोकसभा चुनाव में NDA भारी बहुमत से जीत हासिल करेगा और कांग्रेस को लगातार चौथी हार का सामना करना पड़ेगा। इस देश की जनता पीएम मोदी, भाजपा और NDA के साथ खड़ी है। आप इस सच्चाई को नकार नहीं सकते। शाह बोले- बैलेट पेपर से चुनाव हुए, फिर मशीनों पर सवाल क्यों? शाह ने चुनाव नतीजों के लिए बैलेट मशीनों को जिम्मेदार ठहराने वालों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन चुनावों का वह जिक्र कर रहे हैं, वे बैलेट पेपर से कराए गए थे। शाह ने दावा किया कि इससे भाजपा की जीत के लिए बैलेट मशीनों को जिम्मेदार ठहराने का तर्क खारिज होता है। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में 33 साल से कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री नहीं बना है और पश्चिम बंगाल में कांग्रेस 54 साल से कोई चुनाव नहीं जीती है। शाह ने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या इन नतीजों को भी SIR से जोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि SIR 2024 के बाद लागू हुआ, जबकि कांग्रेस उनके प्रमुख नेता, पार्टी अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से लगातार चुनाव हार रही है। शाह बोले- गुजरात में कांग्रेस 41 साल से एक भी चुनाव नहीं जीती अमित शाह ने गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की जीत का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने कुल 104 सीटों में से 90 सीटें जीती हैं। उन्होंने दावा किया कि गुजरात के मतदाता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूती से खड़े हैं। शाह ने कहा- आम आदमी पार्टी ने सभी 32 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन हर सीट पर उसकी जमानत जब्त हो गई। कांग्रेस 41 साल से गुजरात में एक भी चुनाव नहीं जीती है। कांग्रेस ने आखिरी चुनाव 1985 में जीता था। बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के उपचुनावों का जिक्र किया शाह ने हाल में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में हुए उपचुनावों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस इनमें एक भी सीट नहीं जीत सकी। उन्होंने कहा- पश्चिम बंगाल के नाओगांव में भाजपा उम्मीदवार ने 1.42 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की। नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार को 76% वोट मिले और उन्होंने 1.22 लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। शाह के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के रेजिनगर में भाजपा ने 75 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की और यह सीट तृणमूल कांग्रेस से छीन ली। वहीं, पुडुचेरी में NDA के सहयोगी AINRC के उम्मीदवार ने 8,482 वोटों से जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 22% वोट मिले। राजस्थान और त्रिपुरा के चुनावों में भी BJP-NDA की जीत का दावा अमित शाह ने राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा ने 90% नगर निगमों, 66% नगर परिषदों और 65% नगरपालिकाओं में जीत हासिल की। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में 85% से अधिक वार्डों में आम आदमी पार्टी की जमानत जब्त हो गई। शाह ने त्रिपुरा के ग्राम समिति चुनावों के बारे में कहा कि NDA ने करीब 4,000 सीटें जीतीं और उसे कुल 77.5% वोट मिले। उनके मुताबिक, कांग्रेस 4,600 सीटों में से केवल 14 सीटें जीत सकी। शाह ने इन चुनाव नतीजों का हवाला देते हुए कांग्रेस को लगातार मिल रही हार पर आत्ममंथन करने की सलाह दी।
इलेक्शन कमिश्नर्स को कानूनी छूट देने वाली धारा को चुनौती:सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, चुनाव आयोग से जवाब मांगा; जनवरी में रोक लगाने से इनकार किया था
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को CEC और ECs को कानूनी छूट देने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिका सुनी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। याचिका NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने दायर की है। इसमें 2023 के कानून की धारा 16 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। यह धारा CEC और ECs को अपने आधिकारिक काम के दौरान किए गए कुछ कामों, बातों या फैसलों पर सिविल और आपराधिक कार्रवाई से छूट देती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को इसी मुद्दे पर लंबित एक दूसरी याचिका के साथ जोड़ दिया है। जनवरी में भी हुई थी सुनवाई इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने CEC और ECs को धारा 16 के तहत मिली छूट को चुनौती देने वाली एक दूसरी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी। यह याचिका NGO लोक प्रहरी ने दायर की थी। तब कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस समय धारा 16 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। याचिका में दावा किया गया था कि यह प्रावधान CEC और ECs को अपने पद के गंभीर दुरुपयोग और गलत कामों के लिए जीवनभर की पूरी छूट देता है। याचिका के मुताबिक, इससे CEC और ECs को “अभूतपूर्व और बेलगाम शक्ति” मिलती है। यह छूट सिविल और आपराधिक, दोनों तरह की कार्यवाही से है। ----------------------
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