इलेक्शन कमिश्नर्स को कानूनी छूट देने वाली धारा को चुनौती:सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, चुनाव आयोग से जवाब मांगा; जनवरी में रोक लगाने से इनकार किया था
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को CEC और ECs को कानूनी छूट देने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिका सुनी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। याचिका NGO एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने दायर की है। इसमें 2023 के कानून की धारा 16 को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। यह धारा CEC और ECs को अपने आधिकारिक काम के दौरान किए गए कुछ कामों, बातों या फैसलों पर सिविल और आपराधिक कार्रवाई से छूट देती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को इसी मुद्दे पर लंबित एक दूसरी याचिका के साथ जोड़ दिया है। जनवरी में भी हुई थी सुनवाई इस साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने CEC और ECs को धारा 16 के तहत मिली छूट को चुनौती देने वाली एक दूसरी याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी। यह याचिका NGO लोक प्रहरी ने दायर की थी। तब कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उस समय धारा 16 पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। याचिका में दावा किया गया था कि यह प्रावधान CEC और ECs को अपने पद के गंभीर दुरुपयोग और गलत कामों के लिए जीवनभर की पूरी छूट देता है। याचिका के मुताबिक, इससे CEC और ECs को “अभूतपूर्व और बेलगाम शक्ति” मिलती है। यह छूट सिविल और आपराधिक, दोनों तरह की कार्यवाही से है। ----------------------
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