Original Leather: असली लेदर की पहचान चुटकियों में होगी, इन ट्रिक्स को करें फॉलो, नहीं खाएंगे धोखा!
Original Leather: मार्केट में लेदर जैकेट, बैग, बेल्ट और जूते की भरमार है। हर दुकानदार दावा करता है कि उसका सामान सौ फीसदी जेन्युइन लेदर है, लेकिन हकीकत कई बार इससे बिल्कुल उलट निकलती है। नकली या सिंथेटिक लेदर दिखने में असली जैसा होता है, लेकिन कीमत चुकाने के बाद पछतावा हाथ लगता है।
अगर आप भी लेदर का सामान खरीदते समय धोखा नहीं खाना चाहते, तो कुछ आसान और भरोसेमंद ट्रिक्स जानना बेहद जरूरी है। अच्छी बात यह है कि असली लेदर की पहचान करना कोई मुश्किल काम नहीं, बस सही तरीका पता होना चाहिए। आइए जानते हैं वो आसान तरीके, जिनसे आप चुटकियों में असली और नकली लेदर में फर्क कर सकते हैं।
असली लेदर की पहचान के ट्रिक्स
स्मेल टेस्ट: खुशबू बताएगी सच
असली लेदर की एक खास प्राकृतिक गंध होती है, जो जानवर की खाल से आती है। यह खुशबू हल्की और मिट्टी जैसी होती है। वहीं नकली लेदर में प्लास्टिक या केमिकल जैसी तीखी गंध आती है। खरीदते समय अगर संभव हो, तो लेदर को सूंघकर जरूर देखें।
टच और फील से करें पहचान
असली लेदर छूने में नरम और थोड़ा गर्म महसूस होता है। जब आप उसे दबाते हैं, तो उस पर हल्की सिलवटें बनती हैं, जो थोड़ी देर में वापस सामान्य हो जाती हैं। नकली लेदर ज्यादा सख्त और ठंडा लगता है, और दबाने पर सिलवटें अक्सर बनी रहती हैं।
पानी की बूंद से करें टेस्ट
यह तरीका बेहद आसान और असरदार है। लेदर पर पानी की एक-दो बूंद डालें। अगर पानी धीरे-धीरे अंदर सोख लिया जाता है, तो वह असली लेदर है। नकली लेदर पर पानी ठहर जाता है या फिसल जाता है, क्योंकि वह पानी नहीं सोखता।
किनारों को ध्यान से देखें
असली लेदर के कटे हुए किनारे थोड़े खुरदरे और अनियमित होते हैं, जबकि नकली लेदर के किनारे एकदम चिकने और प्लास्टिक जैसे दिखते हैं। यह फर्क खासतौर पर बैग या बेल्ट के अंदरूनी हिस्से में आसानी से नजर आता है।
लेबल और कीमत पर रखें नजर
अगर प्रोडक्ट पर “Genuine Leather”, “Full Grain Leather” या “Top Grain Leather” लिखा है, तो उसके असली होने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं “PU Leather” या “Synthetic Leather” साफ तौर पर नकली लेदर की पहचान है। साथ ही, बहुत कम कीमत पर मिलने वाला “असली लेदर” अक्सर शक के दायरे में होता है।
फायर टेस्ट (घर पर सावधानी से)
यह टेस्ट दुकान पर नहीं, बल्कि घर पर ही करें। असली लेदर को हल्की आंच देने पर वह जलेगा नहीं, बल्कि थोड़ा सिकुड़ सकता है और जले बाल जैसी गंध देगा। नकली लेदर आग लगते ही पिघलने लगता है और तेज प्लास्टिक की बदबू आती है। ध्यान रहे, यह टेस्ट बहुत सावधानी से करें।
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(लेखक:कीर्ति)
Dalchini Benefits: ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मददगार है दालचीनी, इम्यूनिटी भी करेगी बूस्ट, 5 फायदे जानें
Dalchini Benefits: भारतीय रसोई में दालचीनी सिर्फ स्वाद और खुशबू बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सेहत का खजाना भी मानी जाती है। सर्दी-खांसी से लेकर पाचन तक, दालचीनी का इस्तेमाल सदियों से आयुर्वेद में किया जा रहा है। आज के समय में भी इसकी उपयोगिता कम नहीं हुई है।
एक छोटी सी दालचीनी की स्टिक में कई औषधीय गुण छिपे होते हैं। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। नियमित और सीमित मात्रा में इसका सेवन कई हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचाने में मदद कर सकता है।
दालचीनी सेवन के बड़े फायदे
पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है दालचीनी
दालचीनी पाचन से जुड़ी समस्याओं में काफी फायदेमंद मानी जाती है। गैस, अपच और पेट भारीपन जैसी दिक्कतों में यह राहत देती है। भोजन के बाद हल्का सा दालचीनी पानी पीने से डाइजेशन बेहतर होता है और पेट साफ रहता है।
ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में सहायक
दालचीनी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस करने में मदद करती है। खासतौर पर टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए यह उपयोगी मानी जाती है। दालचीनी इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाती है, जिससे शुगर लेवल तेजी से नहीं बढ़ता।
इम्यून सिस्टम को करता है मजबूत
दालचीनी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं। बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल संक्रमण से बचाव के लिए दालचीनी का सेवन फायदेमंद हो सकता है।
वजन घटाने में मिलती है मदद
अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो दालचीनी आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। यह मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और शरीर में जमा फैट को एनर्जी में बदलने में मदद करती है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में दालचीनी डालकर पीना काफी लोकप्रिय उपाय है।
दिल की सेहत के लिए फायदेमंद
दालचीनी खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखने में सहायक मानी जाती है। इससे हार्ट डिजीज और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा कम हो सकता है। नियमित लेकिन सीमित मात्रा में इसका सेवन दिल को स्वस्थ रखने में मदद करता है।
सूजन और दर्द में देती है राहत
दालचीनी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। आर्थराइटिस जैसी समस्याओं में भी इसका इस्तेमाल लाभकारी माना जाता है। हल्के दर्द में दालचीनी वाला दूध या काढ़ा राहत दे सकता है।
दालचीनी का सेवन कैसे करें
दालचीनी को चाय, दूध, काढ़ा या सब्जियों में मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसका ज्यादा सेवन नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए रोजाना सीमित मात्रा में ही लें।
(Disc।aimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी डॉक्टर/विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।)
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