एआई विनियमन पर भारत का संतुलित रुख, नवाचार और निवेश को बाधित नहीं कर रही सरकार : आईबीएम इंडिया के एमडी
मुंबई, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। आईबीएम इंडिया और दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक संदीप पटेल ने मंगलवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर भारत विनियमन के मामले में बेहद समझदारी भरा दृष्टिकोण अपना रहा है। सरकार एआई को इस हद तक विनियमित कर रही है कि नवाचार और निवेश पर इसका प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण दौर में एआई गवर्नेंस बेहद जरूरी है।
आईबीएम थिंक 2026 सम्मेलन के दौरान न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में पटेल ने कहा कि जैसे-जैसे एआई तकनीक विकसित होगी, यह संतुलित दृष्टिकोण कुछ समय तक जारी रहेगा।
उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि बड़ा सवाल यह है कि हम डिजिटल संप्रभुता को कैसे आगे बढ़ाएं। संप्रभुता का मुद्दा केवल भारत का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का है।
पटेल ने कहा कि डिजिटल संप्रभुता का मतलब डिजिटल स्वराज है। उन्होंने कहा, एआई और बुनियादी ढांचे दोनों के दृष्टिकोण से यह महत्वपूर्ण है। एक उद्यम के रूप में आपको उस स्तर की संप्रभुता बनाए रखनी होगी जो आपके ऊपर लागू नियमों और उन कार्यभारों के अनुरूप हो, जिन पर आप काम कर रहे हैं।
सरकार जल्द ही एआई नियमों पर एक चर्चा पत्र लाने की योजना बना रही है, जिसमें एआई सुरक्षा सुनिश्चित करने और डीपफेक से उत्पन्न खतरों को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह चर्चा पत्र स्किलिंग, सुरक्षा और एआई प्रगति के दौरान किसी भी व्यक्ति को पीछे न छूटने देने जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगा।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, एआई को केवल कानून के माध्यम से नियंत्रित नहीं किया जा सकता और इसके लिए टेक्नो-लीगल समाधान की आवश्यकता है।
पटेल ने कहा कि डेटा की उत्पत्ति, डेटा की सटीकता, जिस डेटा का उपयोग किया जा रहा है उसकी वैधता और उसके उपयोग को लेकर पारदर्शिता, ये सभी गवर्नेंस का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा, मॉडल गवर्नेंस भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसका मतलब है कि आप कौन से मॉडल इस्तेमाल कर रहे हैं, कब कर रहे हैं, क्या आप उन्हें अपडेट कर रहे हैं और क्या वे आपके उपयोग के लिए उपयुक्त हैं। ये सभी सवाल मॉडल गवर्नेंस के दायरे में आते हैं।
उन्होंने कहा कि समग्र एआई गवर्नेंस का एक महत्वपूर्ण पहलू पारदर्शिता भी है।
पटेल ने कहा, क्या आपके पास इस बात को लेकर पारदर्शिता है कि एआई आपके मॉडलों का उपयोग कैसे कर रहा है? आप कौन सा डेटा इस्तेमाल कर रहे हैं? सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्या आप अपने परिणामों को समझा सकते हैं? या फिर आप अपने मॉडलों को मनमाने तरीके से काम करने दे रहे हैं? ये सभी तत्व मिलकर एआई गवर्नेंस के ढांचे का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि आईबीएम को अपने एआई गवर्नेंस समाधान पर गर्व है, क्योंकि इसे बाजार में मान्यता मिल चुकी है, खासकर भारत में।
पटेल ने कहा, इन्फोसिस अपना खुद का गवर्नेंस मॉडल विकसित करने की कोशिश कर रही थी। लेकिन जब उन्होंने हमारा समाधान देखा तो उन्होंने अपना मॉडल बनाने का विचार छोड़ दिया और हमारे वॉटसनएक्स.गव को अपनाया। अब वे इसका उपयोग केवल आंतरिक कार्यों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने ग्राहकों के लिए भी कर रहे हैं। इसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है।
--आईएएनएस
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत को बढ़ती ऊर्जा मांग के चलते तेजी से बढ़ानी होगी कोयला आधारित क्षमता: सीईए चेयरमैन
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के चेयरमैन घनश्याम प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि भारत को अपनी तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग को बनाए रखने के लिए रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के साथ पहले लगाए गए अनुमान से अधिक कोयला आधारित ऊर्जा क्षमता को तैयार करना होगा।
इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में सीईए प्रमुख ने कहा कि मांग के रुझानों की वजह से नीति निर्मताओं को आने वाले दशक में भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोयले से बिजली बनाने की क्षमता बढ़ाने के पैमाने पर फिर से विचार करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, सरकार ने पिछले साल अनुमान लगाया था कि 2035 तक देश की कोयले से चलने वाली बिजली उत्पादन क्षमता में 97 गीगावाट की बढ़ोतरी होगी, जिससे कुल स्थापित कोयला आधारित ऊर्जा क्षमता लगभग 307 गीगावाट हो जाएगी।
हालांकि, बिजली की खपत में उम्मीद से ज्यादा तेजी से हो रही बढ़ोतरी भविष्य की जरूरतों को काफी बढ़ा सकती है।
प्रसाद ने कहा, मांग बढ़ रही है और जैसे-जैसे मांग बढ़ती है, हमें उस मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति के स्थिर स्रोतों की जरूरत है।
प्रसाद के अनुसार, कोयले से चलने वाली अतिरिक्त क्षमता की जरूरतें पहले के अनुमानों से ज्यादा हो सकती हैं और मौजूदा विस्तार योजनाओं के अलावा 105 गीगावाट से 150 गीगावाट तक पहुंच सकती हैं।
उनका यह बयान उस चुनौती को दिखाता है जिसका सामना भारत कर रहा है, क्योंकि देश तेजी से बढ़ती बिजली की खपत और साफ ऊर्जा की ओर बढ़ने के अपने लंबे समय के लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
प्रसाद ने कहा कि इस साल बिजली की मांग में काफी तेजी आई है और रोजाना की पीक डिमांड पिछले साल के मुकाबले 45 गीगावाट से 50 गीगावाट ज्यादा रही है।
इसके अलावा, मानसून के मौसम में कम बारिश की वजह से पनबिजली उत्पादन भी कम हुआ है, जिससे सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए थर्मल पावर प्लांट पर निर्भरता बढ़ गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में बिजली की कमी बढ़कर 560 मिलियन किलोवाट-घंटे हो गई, जो अगस्त 2023 के बाद सबसे ज्यादा स्तर था और यह तब हुआ जब कोयले से चलने वाले पावर प्लांट से बिजली का उत्पादन ज्यादा था।
--आईएएनएस
एबीएस
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