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Explainer: क्या होता है Rarest of Rare केस? इसी थ्योरी के आधार पर नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान-साहिल को मिलेगी सजा

What is Rarest of Rare Case: नीले ड्रम वाला हत्याकांड तो आपको याद ही होगा. आरोपी मुस्कान ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की निर्मम हत्या करके उसके टुकड़ों को नीले रंग के ड्रम में सीमेंट से जमा दिया था. यह केस पूरे देश में चर्चित रहा था. केस में मुस्कान और साहिल दोनों दोषी साबित हो चुके हैं. अब 14 अक्टूबर को कोर्ट केस में सजा का एलान करने वाला है. इस केस से एक बार फिर Rarest of Rare केस पर चर्चा शुरू हो गई है. कोर्ट ने इसे Rarest of Rare केस केस माना है. आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह होता क्या है?

 भारतीय कानून में 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' (दुर्लभतम से दुर्लभतम) वह सिद्धांत है, जिसके तहत किसी अपराधी को फांसी की सजा दी जा सकती है. कानून के मुताबिक, आमतौर पर अपराधी को उम्रकैद की सजा दी जाती है, जबकि मृत्युदंड बहुत खास और गंभीर मामलों में ही दिया जाता है. यह सजा तब दी जाती है, जब अपराध बेहद क्रूर और गंभीर हो और अदालत को लगे कि उम्रकैद जैसी दूसरी सजा देना पर्याप्त नहीं होगा.

'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' सिद्धांत से जुड़ी 4 अहम बातें

- शुरुआत कब हुई: सुप्रीम कोर्ट ने 1980 में बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले में इस सिद्धांत को स्पष्ट किया था. इसके तहत फांसी की सजा केवल बेहद गंभीर मामलों में ही दी जा सकती है.

- संविधान में क्या है प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है. हालांकि, कानून में तय प्रक्रिया का पालन करते हुए कुछ गंभीर मामलों में मृत्युदंड दिया जा सकता है.

- अदालत को बताना होता है खास कारण: दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 354(3) के तहत अदालत को मृत्युदंड देते समय इसके विशेष कारण बताने होते हैं. यानी यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उम्रकैद की सजा पर्याप्त क्यों नहीं है.

- किन बातों पर होता है विचार: सजा तय करते समय अदालत अपराध की गंभीरता और क्रूरता के साथ दोषी की उम्र, मानसिक स्थिति और उसके सुधरने की संभावना पर भी विचार करती है. यानी सिर्फ अपराध की गंभीरता ही नहीं, बल्कि दोषी की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाता है.

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क्या है नीला ड्रम हत्याकांड?

उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान खींचा था. इस मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को अदालत ने हत्या और सबूत मिटाने का दोषी ठहराया है. 30 सितंबर 2026 को आए फैसले के बाद अब दोनों की सजा पर अदालत का फैसला होना है. यह घटना 3 मार्च 2025 को मेरठ के ब्रह्मपुरी इलाके में हुई थी. सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे और लंदन से मेरठ लौटे थे.

आरोप था कि मुस्कान ने खाने में नींद की गोलियां मिलाकर सौरभ को बेहोश किया. इसके बाद साहिल के साथ मिलकर उनकी चाकू से हत्या कर दी गई. हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में डालकर सीमेंट से बंद कर दिया गया. इसी वजह से यह मामला 'नीला ड्रम हत्याकांड' के नाम से चर्चित हुआ. 

पुलिस ने 19 मार्च 2025 को मामले का खुलासा करते हुए मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया था. जांच और सुनवाई के बाद मेरठ की जिला अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी करार दिया. अब अदालत को दोनों की सजा तय करनी है. इस मामले में सजा का ऐलान 14 अक्टूबर को किए जाने की जानकारी दी गई है.

मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' क्यों?

मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को अदालत दोषी ठहरा चुकी है. अब दोनों की सजा पर फैसला होना है. इस मामले में अभियोजन पक्ष और सौरभ राजपूत के परिवार ने फांसी की मांग की है. इस केस को बेहद गंभीर मानने के पीछे कई वजहें हैं.

पहले से हत्या की योजना बनाने का आरोप: आरोप है कि मुस्कान ने अपने पति सौरभ राजपूत को खाने में नशीला पदार्थ दिया. इसके बाद साहिल के साथ मिलकर उनकी हत्या कर दी गई.

शव के टुकड़े करके छिपाने का आरोप: हत्या के बाद सौरभ के शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले प्लास्टिक के ड्रम में डालकर सीमेंट और रेत से बंद कर दिया गया. शव को इस तरह छिपाने की घटना ने मामले को देशभर में चर्चा में ला दिया.

रिश्ते से जुड़े विश्वास का पहलू: सौरभ की पत्नी पर ही हत्या में शामिल होने का आरोप था. इस वजह से भी मामले ने लोगों का ध्यान खींचा और इसे लेकर व्यापक चर्चा हुई.

फांसी की मांग और कानूनी सवाल: मेरठ की जिला अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को दोषी करार दिया. 14 अक्टूबर को उनकी सजा सुनाए जाने की तारीख तय की गई है. अभियोजन पक्ष और सौरभ के परिजन मृत्युदंड की मांग कर रहे हैं.
हालांकि, किसी अपराध का बेहद क्रूर होना अपने आप उसे 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' साबित नहीं करता. फांसी देने के लिए अदालत को कानूनी मानकों के आधार पर यह तय करना होता है कि क्या उम्रकैद की सजा पर्याप्त होगी या नहीं.

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अभियोजन पक्ष का तर्क

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सौरभ राजपूत की हत्या अचानक गुस्से में उठाया गया कदम नहीं, बल्कि पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा थी. आरोप है कि शव को छिपाने के लिए ड्रम, सीमेंट और रेत जैसी चीजों का इंतजाम पहले ही कर लिया गया था. इस पहलू को मामले में अहम माना गया, क्योंकि अपराध के बाद सबूत मिटाने की तैयारी भी जांच के दायरे में आई. कानून के तहत अपराध की योजना बनाकर हत्या करना मामले की गंभीरता को दर्शा सकता है. हालांकि, दोषियों को कितनी सजा मिलेगी, इसका फैसला अदालत अपराध के तथ्यों, सबूतों और अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद करती है.

फांसी या उम्रकैद? अब सजा पर अदालत का फैसला अहम

सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोनों दोषियों की सजा तय करना अब सबसे अहम कानूनी पहलू है. अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला के लिए मृत्युदंड की मांग की है. सौरभ के परिवार ने भी दोषियों को फांसी देने की मांग की है. वहीं, अदालत को यह तय करना है कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए दोषियों को फांसी दी जाए या उम्रकैद की सजा सुनाई जाए. इस फैसले में अपराध की गंभीरता, उसकी परिस्थितियों और अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा. कानून के मुताबिक, फांसी की सजा केवल 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' यानी दुर्लभतम से दुर्लभतम मामलों में दी जाती है. इसलिए केवल अपराध का जघन्य होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अदालत को यह भी देखना होता है कि उम्रकैद की सजा पर्याप्त क्यों नहीं होगी. अंतिम फैसला अदालत के आकलन और कानूनी मानकों के आधार पर होगा.

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं दोषी

जिला अदालत के फैसले के बाद भी सौरभ राजपूत हत्याकांड में कानूनी लड़ाई आगे बढ़ सकती है. मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सुनाई जाने वाली सजा के खिलाफ कानून के तहत उच्च अदालत में अपील करने का विकल्प मिलेगा. वे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट और फिर जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं.

दूसरी ओर, सौरभ राजपूत की मां ने भी न्याय के लिए आगे कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है. उनका कहना है कि अगर निचली अदालत दोषियों को फांसी की सजा नहीं सुनाती है, तो वह अपनी मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगी. ऐसे में सजा का फैसला आने के बाद भी इस मामले में आगे कानूनी कार्यवाही की संभावना बनी रह सकती है.

 

 

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'सिर्फ ये पैमाना होना चाहिए...', BCCI अध्यक्ष ने विराट-रोहित के वर्ल्ड कप 2027 में खेलने पर दिया बयान, बताया कैसे पेश करेंगे दावेदारी

Mithun Manhas On Virat Kohli Rohit Sharma: अगले साल अक्टूबर में शुरू होने वाले ICC वर्ल्ड कप 2027 में विराट कोहली और रोहित शर्मा के खेलने पर जो सस्पेंस था, वो अब लगभग खत्म हो चुका है. वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल ही में खत्म हुई वनडे सीरीज में दोनों सीनियर खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया और एक-एक शतक भी लगाया. इसके बाद से ही उनके फ्यूचर को लेकर उठ रहे सवाल थम गए हैं. वहीं, अब BCCI अध्यक्ष मिथुन मन्हास का मानना ​​है कि उम्र उनके खेलने में रुकावट नहीं बनेगी.

रोहित-विराट को लेकर क्या बोले BCCI अध्यक्ष?

रोहित शर्मा और विराट कोहली टी-20 और टेस्ट फॉर्मेट से संन्यास ले चुके हैं और सिर्फ वनडे फॉर्मेट में भारतीय जर्सी में नजर आते हैं. दोनों ही खिलाड़ी कई बार ये बात साफ कर चुके हैं कि उनका लक्ष्य अगले साल होने वाला वनडे वर्ल्ड कप है. उसमें वह खिताबी जीत दर्ज करना चाहते हैं. क्रिकेट के गलियारों में चर्चा है कि साल 2027 में जब वनडे वर्ल्ड कप खेला जाएगा, तब विराट कोहली 39 और रोहित शर्मा 40 साल के हो जाएंगे. मगर, अब बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने साफ कर दिया है कि उम्र का रो-को के टूर्नामेंट में खेलने पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

मिथुन मन्हास ने कहा, "जहां तक बीसीसीआई की बात है, हम इस मामले में बोलने के पोजिशन में नहीं है. इसका फैसला सेलेक्टर्स और कोच के हाथों में हैं. मगर मैं अपनी राय दूं तो, सेलेक्शन के लिए प्रदर्शन पैमाना होना चाहिए."

मन्हास ने आगे कहा, "अगर कोई खिलाड़ी फिट है और वो देश के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहा और मैच जीता रहा है, तो हमें सिर्फ उस पर ही फोकस करना चाहिए. विराट, हार्दिक और रोहित के टीम में रहने से गिल की काफी मदद होगी. बुमराह जैसे खिलाड़ी, जो गेंदबाजी कप्तान, वहीं कोई फील्डिंग कप्तान की भूमिका संभाल सकता है, जिससे वर्कलोड लोगों में बंट जाएगा."

पिछली सीरीज में कैसा रहा प्रदर्शन?

विराट कोहली और रोहित शर्मा पिछली बार वेस्टइंडीज के साथ खेली गई 3 मैचों की घरेलू वनडे सीरीज में खेलते नजर आए थे. जहां, रोहित ने 3 मैचों की 3 पारियों में 75 के औसत से 239 रन बनाए, जिसमें एक शतक शामिल रहा. तो वहीं, विराट कोहली ने 3 मैचों की 3 पारियों में 84 के औसत से 168 रन बनाए, जिसमें उन्होंने भी एक शतक लगाया. दोनों ही खिलाड़ियों ने बल्ले से साबित कर दिया कि वह कमाल के फॉर्म में हैं और वनडे वर्ल्ड कप 2027 खेलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.

अब अगली बार रोहित शर्मा और विराट कोहली की जोड़ी न्यूजीलैंड दौरे पर खेली जाने वाली वनडे सीरीज में एक्शन में नजर आने वाली है. दोनों टीमों के बीच 4 नवंबर से 5 मैचों की वनडे सीरीज खेली जाने वाली है, जिसमें एक बार फिर सभी की नजरें रो-को पर टिकी होंगी, जहां वह अच्छा प्रदर्शन करके एक बार फिर वनडे वर्ल्ड कप 2027 की अपनी दावेदारी ठोकेगी.

वनडे वर्ल्ड कप 2027 में टीम इंडिया का शेड्यूल

मैच

तारीख

मुकाबला

वेन्यू

पहला मैच

7 अक्टूबर 2027

भारत vs ऑस्ट्रेलिया

केपटाउन

दूसरा मैच

10 अक्टूबर 2027

भारत vs पाकिस्तान

जोहान्सबर्ग

तीसरा मैच

14 अक्टूबर 2027

भारत vs अफगानिस्तान

त्श्वाने

चौथा मैच

17 अक्टूबर 2027

भारत vs क्वालीफायर A

ब्लूमफोंटेन

पांचवां मैच

24 अक्टूबर 2027

भारत vs जिम्बाब्वे

विक्टोरिया फॉल्स

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  Sports

Shai Hope बने T20I में 3 शतक लगाने वाले पहले West Indies बल्लेबाज, हैदराबाद में रचा इतिहास

भारत और वेस्टइंडीज के बीच हैदराबाद में खेले गए चौथे टी20 मुकाबले में कैरेबियाई कप्तान शाई होप ने अपनी शानदार बल्लेबाजी से नया रिकॉर्ड बना दिया। उन्होंने 50 गेंदों पर नाबाद 102 रन की पारी खेली और वेस्टइंडीज को 20 ओवर में 3 विकेट पर 247 रन के बड़े स्कोर तक पहुंचा दिया। इस पारी के साथ होप टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 3 शतक लगाने वाले वेस्टइंडीज के पहले बल्लेबाज बन गए हैं।

शाई होप के लिए यह सीरीज खास रही है। उन्होंने मौजूदा सीरीज में दूसरी बार शतक लगाया है। दिलचस्प बात यह है कि उनके तीनों टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक नाबाद 102 रन के रहे हैं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने क्रिस गेल और एविन लुईस को पीछे छोड़ दिया है। गेल और लुईस के नाम इस प्रारूप में 2-2 शतक हैं, जबकि जॉनसन चार्ल्स और रोवमैन पॉवेल 1-1 शतक लगा चुके हैं।

बता दें कि होप ने अपनी पारी की आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2,000 रन भी पूरे कर लिए। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले वेस्टइंडीज के चौथे बल्लेबाज बन गए हैं। उनसे पहले रोवमैन पॉवेल, निकोलस पूरन और ब्रैंडन किंग इस आंकड़े तक पहुंच चुके हैं।

वेस्टइंडीज की पारी में होप के अलावा दूसरे बल्लेबाजों ने भी तेज रन बनाए। ज्वेल एंड्रयू ने 16 गेंदों पर 21 रन बनाकर टीम को अच्छी शुरुआत दिलाई, लेकिन अक्षर पटेल ने उन्हें पगबाधा आउट कर दिया। इसके बाद शिमरोन हेटमायर ने भारतीय गेंदबाजों पर हमला बोल दिया। उन्होंने केवल 12 गेंदों पर 33 रन बनाए, जिसमें 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। प्रिंस यादव ने उनका कैच खुद पकड़कर इस पारी का अंत किया।

रोवमैन पॉवेल ने 17 गेंदों पर 24 रन बनाए, जबकि शेरफेन रदरफोर्ड ने 26 गेंदों पर नाबाद 49 रन की पारी खेली। इन पारियों की मदद से वेस्टइंडीज ने आखिरी ओवरों में भी तेजी से रन बनाए और भारत के सामने 248 रन का लक्ष्य रखा।

गौरतलब है कि वेस्टइंडीज ने पावरप्ले के 6 ओवर में 1 विकेट पर 79 रन बनाए। यह टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारत के खिलाफ संयुक्त रूप से सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर है। टीम ने केवल 7.4 ओवर में 100 रन पूरे कर लिए, जो भारत के खिलाफ सबसे तेज टीम शतक के रिकॉर्ड की बराबरी है।

भारतीय गेंदबाज कैरेबियाई बल्लेबाजों की रफ्तार पर लगाम लगाने में नाकाम रहे। मयंक यादव और अर्शदीप सिंह ने अपने-अपने 4 ओवर में 52-52 रन दिए। प्रिंस यादव ने 36 रन देकर 1 विकेट लिया, जबकि अक्षर पटेल को भी 1 सफलता मिली।

अब भारतीय टीम के सामने 248 रन का कठिन लक्ष्य है। इतने बड़े स्कोर का पीछा करने के लिए भारतीय बल्लेबाजों को शुरुआत से ही तेज रन बनाने होंगे और विकेट बचाकर खेलने की चुनौती का सामना करना होगा।

Wed, 14 Oct 2026 22:32:00 +0530

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