UP में 68 हजार ग्राम प्रहरियों का मानदेय बढ़कर हुआ 3,500 रुपये, CM Yogi ने दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को 68 हजार ग्राम प्रहरियों का मानदेय 2,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये प्रतिमाह करने को मंगलवार को मंजूरी दी दे दी। इसके अलावा उनके परिवारों के लिए सालाना पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा भी शुरू हो गई। यहां जारी एक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्राम प्रहरियों (गांव के चौकीदारों) के मानदेय में एक हजार रुपये की बढ़ोतरी की मंजूरी दी है।
आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 में ग्राम प्रहरियों को महज 1,500 रुपये मानदेय मिलता था, जिसे वर्ष 2019 में बढ़ाकर 2,500 रुपये किया गया था। उन्होंने कहा कि अब ग्राम प्रहरियों की जिम्मेदारियों के साथ सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं। बरेली की रिजर्व पुलिस लाइन में ग्राम प्रहरी सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में पर्व-त्योहार आते ही उपद्रव शुरू हो जाते थे।
कुछ अराजक तत्वों की हरकतों का खामियाजा 25 करोड़ प्रदेशवासियों को भुगतना पड़ता था।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘डबल इंजन’ सरकार ने प्रदेश के प्रति देश और दुनिया की धारणा बदल दी है। आदित्यनाथ ने कहा कि शहरों में सीसीटीवी कैमरे जिस तरह अपराधियों पर नजर रखते हैं, उसी तरह गांवों में ग्राम प्रहरियों को भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों ने अपील की कि वे संदिग्ध गतिविधियों, अपराध और जमीन पर कब्जा करने वालों की सूचना तत्काल पुलिस तक पहुंचाएं।
उन्होंने कहा कि थानाध्यक्ष या संबंधित क्षेत्र के उपनिरीक्षक सप्ताह में कम से कम एक दिन ग्राम प्रहरियों के साथ बैठक करें, जिससे सूचना तंत्र मजबूत होगा और छोटी घटनाओं को बड़ा विवाद बनने से रोका जा सकेगा। आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में अब दंगे और उपद्रव नहीं होते और कानून-व्यवस्था बेहतर होने से निवेश, व्यापार व रोजगार बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि पहले नवरात्र और अन्य पर्वों पर उपद्रव की आशंका रहती थी, लेकिन अब नवरात्र के पहले दिन से ही गांव-गांव में दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विंध्यवासिनी धाम में पिछले दिन में सवा दो लाख से ढाई लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए और मंगलवार सुबह छह बजे तक डेढ़ लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। उन्होंने कहा कि देवीपाटन धाम में भी डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे और सीतापुर के ललिता देवी मंदिर व सहारनपुर की शाकंभरी पीठ में भी श्रद्धालुओं की भीड़ है। आदित्यनाथ ने कहा कि यह भयमुक्त वातावरण का परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों से वन्यजीवों के खतरे, अफवाहों और भू-माफिया की गतिविधियों की सूचना भी प्रशासन को देने को कहा। उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले 11 ग्राम प्रहरियों को सम्मानित किया।
पटना के Gandhi Maidan में AISA और RYA का प्रदर्शन, CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) ने मंगलवार को पटना के गांधी मैदान में प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की। यह विरोध प्रदर्शन विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया की आलोचना और इस प्रक्रिया में जवाबदेही की मांग के बाद हुआ है। सोमवार को राहुल गांधी की अगुवाई में INDIA गठबंधन के नेताओं और समर्थकों ने बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। बाद में, विपक्ष के 11 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट के SIR (विशेष सारांश संशोधन) से जुड़े फैसलों को चुनौती दी।
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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं द्वारा दायर रिट याचिका में 14 कमियां पाईं। इन नेताओं ने भारत के चुनाव आयोग द्वारा चल रही SIR प्रक्रिया के कुछ पहलुओं को चुनौती दी थी। इसके अलावा, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने दिल्ली में अपनी टीम के कुछ सदस्यों को हिरासत में लिए जाने के बाद सरकार की आलोचना की।
उन्होंने उन लोगों को देशद्रोही कहा जो जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने को कानून का उल्लंघन मानते हैं। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को CJP कार्यकर्ताओं आशुतोष रंका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को हिरासत में ले लिया। बताया गया कि उन्होंने जंतर-मंतर में घुसने के लिए पुलिस की घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की थी, जबकि जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई (मान्यता खत्म) कर दिया गया था।
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यह ग्रुप सुबह-सुबह ही उस जगह पर इकट्ठा हो गया था। खबरों के मुताबिक, प्रदर्शन शुरू होने के कुछ ही देर बाद सुरक्षाकर्मी वहाँ पहुँचे और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर वहाँ से हटा दिया। इससे पहले शनिवार को, AISA और वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी माँग की।
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