पटना के Gandhi Maidan में AISA और RYA का प्रदर्शन, CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) ने मंगलवार को पटना के गांधी मैदान में प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग की। यह विरोध प्रदर्शन विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न' (SIR) प्रक्रिया की आलोचना और इस प्रक्रिया में जवाबदेही की मांग के बाद हुआ है। सोमवार को राहुल गांधी की अगुवाई में INDIA गठबंधन के नेताओं और समर्थकों ने बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। बाद में, विपक्ष के 11 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट के SIR (विशेष सारांश संशोधन) से जुड़े फैसलों को चुनौती दी।
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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और INDIA गठबंधन के नौ अन्य नेताओं द्वारा दायर रिट याचिका में 14 कमियां पाईं। इन नेताओं ने भारत के चुनाव आयोग द्वारा चल रही SIR प्रक्रिया के कुछ पहलुओं को चुनौती दी थी। इसके अलावा, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने दिल्ली में अपनी टीम के कुछ सदस्यों को हिरासत में लिए जाने के बाद सरकार की आलोचना की।
उन्होंने उन लोगों को देशद्रोही कहा जो जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने को कानून का उल्लंघन मानते हैं। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को CJP कार्यकर्ताओं आशुतोष रंका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे को हिरासत में ले लिया। बताया गया कि उन्होंने जंतर-मंतर में घुसने के लिए पुलिस की घेराबंदी तोड़ने की कोशिश की थी, जबकि जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई (मान्यता खत्म) कर दिया गया था।
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यह ग्रुप सुबह-सुबह ही उस जगह पर इकट्ठा हो गया था। खबरों के मुताबिक, प्रदर्शन शुरू होने के कुछ ही देर बाद सुरक्षाकर्मी वहाँ पहुँचे और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर वहाँ से हटा दिया। इससे पहले शनिवार को, AISA और वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी माँग की।
Rahul Gandhi Defamation Case: सुल्तानपुर की MP-MLA Court 26 अक्टूबर को सुनाएगी फैसला
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर जिले की सांसद/विधायक अदालत ने मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में फैसला सुनाने के लिए 26 अक्टूबर की तिथि तय की। इस दिन राहुल गांधी को अदालत में आना पड़ेगा। वादी भाजपा नेता विजय मिश्रा के अधिवक्ता संतोष कुमार पांडेय ने बताया कि आज अदालत ने फैसले की तिथि 26 अक्टूबर तय की क्योंकि दोनों पक्षों की तरफ से बहस हो चुकी है। पांडेय ने बताया कि प्रतिवादी (राहुल गांधी) पक्ष द्वारा लिखित बहस दाखिल की जा चुकी है, जिसमें अनुच्छेद 17 और 18 (मुख्यतः 18) में उन्होंने घटना और भाषण को स्वीकार किया है।
बचाव पक्ष ने धारा 499 (अपमानलेख/मानहानि) के अपवाद उपबंध नौ का सहारा लेते हुए कहा है कि यह बयान सद्भावना की दृष्टि से दिया गया था और उनका मकसद किसी की मानहानि करना नहीं था। पांडेय ने अदालत में कहा कि घटना स्वीकार किए जाने के बाद अब साबित करने का भार आरोपी पक्ष पर है। उन्होंने आरोप लगाया था कि बयान दूषित मानसिकता के साथ दिया गया था। उन्होंने अदालत से आरोपी को दोषी ठहराने की मांग की। राहुल गांधी पर 2018 में भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मौजूदा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ बेंगलुरू चुनाव के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
राहुल गांधी के खिलाफ चार अगस्त 2018 को जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष एवं भाजपा नेता विजय मिश्र ने मानहानि का परिवाद अदालत में दायर किया था। अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को विचारण के लिए तलब किया था। इसके बाद राहुल गांधी ने अदालत में हाजिर होकर जमानत कराई थी। इसके बाद परिवादी विजय मिश्र ने राहुल गांधी की आवाज के नमूने का मिलान कराने के लिए अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।
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