पंजाब सरकार पर हाई कोर्ट का चाबुक: विज्ञापनों पर लगी रोक, 15 दिनों में कर्मचारियों का DA चुकाने की सख्त हिदायत!
पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (PSPCL) द्वारा सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र सरकार के पैटर्न पर दिए जाने वाले महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की बकाया किस्तों का भुगतान न करने का मामला हाई कोर्ट पहुंचा था। एकल पीठ द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार ने डिविजन बेंच में अपील दायर की थी।
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की डिविजन बेंच ने राज्य सरकार और PSPCL की सभी अपीलों को खारिज करते हुए एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा और तय समय सीमा में भुगतान करने के कड़े निर्देश दिए।
विज्ञापनों के खर्च पर रोक, 15 दिनों में बकाया चुकाने का आदेश
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जब तक कर्मचारियों और पेंशनरों के सभी बकायों का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक सरकार बड़े पैमाने पर चलने वाले विज्ञापन अभियानों के खर्च पर रोक लगाए। अदालत ने कहा कि विज्ञापन जैसे खर्च कर्मचारियों के वैध बकायों का भुगतान टालने का आधार नहीं बन सकते।
अदालत ने समय सीमा में संशोधन करते हुए आदेश दिया कि समस्त बकाया राशि एक पखवाड़े (15 दिनों) के भीतर जारी की जाए। यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होता है, तो बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।
संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला, चयनात्मक व्यवहार को बताया मनमाना
हाई कोर्ट ने फैसले के दौरान संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए कहा कि जब एक ही सरकारी खजाने से अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को केंद्र की दरों पर पूरा DA दिया जा रहा है, तब अन्य राज्य कर्मचारियों का बकाया रोकना अनुचित और भेदभावपूर्ण है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 18 जून 2021 के निर्णय के आधार पर सरकार ने केंद्र सरकार के DA/DR पैटर्न को अपनाया था, इसलिए एक बार अपनाए गए मानक का लाभ कर्मचारियों से वापस नहीं छीना जा सकता।
'वित्तीय बोझ का तर्क कानूनन स्वीकार्य नहीं', मुख्य सचिव से मांगी अनुपालन रिपोर्ट
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के वित्तीय संकट वाले तर्क को खारिज करते हुए कहा कि न्यायिक समीक्षा के तहत दिए गए यह निर्देश वित्तीय नीति में अनुचित हस्तक्षेप नहीं हैं और राज्य द्वारा 'वित्तीय बोझ' का तर्क कानूनन स्वीकार्य नहीं है। इसके साथ ही PSPCL की अलग कानूनी पहचान होने की आड़ में DA रोकने की दलील को भी खारिज कर दिया गया।
डिविजन बेंच ने पंजाब सरकार के मुख्य सचिव को आदेश का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने और अगस्त 2026 के अंत तक शपथ पत्र के माध्यम से अनुपालन रिपोर्ट हाई कोर्ट रजिस्ट्री में दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मथानी का पर्वत: जानिए समुद्र मंथन में मंदराचल पर्वत और कछुए (कुर्म अवतार) की कथा
Mandarachal mountain Samudra Manthan story: पिछले अध्यायों में हमने समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्नों, कल्पवृक्ष और कामधेनु गाय के बारे में जाना। लेकिन इस विशाल क्षीरसागर को मथना आसान नहीं था। देवताओं और असुरों ने मिलकर मंथन के लिए क्षीरसागर के बीचों-बीच मंदराचल पर्वत को मथानी बनाया और नागराज वासुकी को उसके चारों ओर रस्सी की तरह लपेट लिया।
जैसे ही मंथन शुरू हुआ, एक बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गई। मंदराचल पर्वत के पास कोई आधार या नीचे सहारा नहीं था, जिसके कारण वह भारी वजन के चलते क्षीरसागर के दलदली और गहरे तल में तेजी से डूबने लगा। यह देखकर देवता और असुर दोनों घबरा गए और उनका यह महा-अभियान संकट में पड़ गया।
भगवान विष्णु का दिव्य 'कुर्म अवतार' (कछुआ)
अपनी इस समस्या के समाधान के लिए सभी देवता और असुर दौड़कर भगवान विष्णु के पास पहुंचे और उनसे सहायता की प्रार्थना की। सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु ने देवताओं की पुकार सुनी और तुरंत एक विशालकाय कछुए (कच्छप) का रूप धारण किया। भगवान का यह दूसरा अवतार 'कुर्म अवतार' के नाम से जाना जाता है।
विशालकाय कुर्म रूप धारण करके भगवान विष्णु क्षीरसागर के तली में गए और अपनी अत्यंत मजबूत और विशाल पीठ पर मंदराचल पर्वत को संभाल लिया। पर्वत का आधार मिल जाने के बाद वह स्थिर हो गया और डूबे बिना तेजी से घूमने लगा।
मंथन की सफलता और उसका संदेश
कछुए की पीठ पर टिके मंदराचल पर्वत और नागराज वासुकी की सहायता से देवताओं और असुरों ने मिलकर फिर से पूरी शक्ति के साथ समुद्र मंथन शुरू किया। इसी आधार और सहयोग के परिणामस्वरूप सागर से हलाहल विष से लेकर अमृत कलश और माता लक्ष्मी तक सभी चौदह दिव्य रत्न प्रकट हो पाए।
यह कथा हमें यह सिखाती है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधा क्यों न आए, यदि सही मार्गदर्शन, सही आधार और सामूहिक प्रयास मिल जाए, तो हर असंभव कार्य को संभव बनाया जा सकता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा पुराणों और सनातन धर्म की मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक भारतीय संस्कृति और पौराणिक इतिहास की जानकारी पहुंचाना है।
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