मथानी का पर्वत: जानिए समुद्र मंथन में मंदराचल पर्वत और कछुए (कुर्म अवतार) की कथा
Mandarachal mountain Samudra Manthan story: पिछले अध्यायों में हमने समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्नों, कल्पवृक्ष और कामधेनु गाय के बारे में जाना। लेकिन इस विशाल क्षीरसागर को मथना आसान नहीं था। देवताओं और असुरों ने मिलकर मंथन के लिए क्षीरसागर के बीचों-बीच मंदराचल पर्वत को मथानी बनाया और नागराज वासुकी को उसके चारों ओर रस्सी की तरह लपेट लिया।
जैसे ही मंथन शुरू हुआ, एक बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गई। मंदराचल पर्वत के पास कोई आधार या नीचे सहारा नहीं था, जिसके कारण वह भारी वजन के चलते क्षीरसागर के दलदली और गहरे तल में तेजी से डूबने लगा। यह देखकर देवता और असुर दोनों घबरा गए और उनका यह महा-अभियान संकट में पड़ गया।
भगवान विष्णु का दिव्य 'कुर्म अवतार' (कछुआ)
अपनी इस समस्या के समाधान के लिए सभी देवता और असुर दौड़कर भगवान विष्णु के पास पहुंचे और उनसे सहायता की प्रार्थना की। सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु ने देवताओं की पुकार सुनी और तुरंत एक विशालकाय कछुए (कच्छप) का रूप धारण किया। भगवान का यह दूसरा अवतार 'कुर्म अवतार' के नाम से जाना जाता है।
विशालकाय कुर्म रूप धारण करके भगवान विष्णु क्षीरसागर के तली में गए और अपनी अत्यंत मजबूत और विशाल पीठ पर मंदराचल पर्वत को संभाल लिया। पर्वत का आधार मिल जाने के बाद वह स्थिर हो गया और डूबे बिना तेजी से घूमने लगा।
मंथन की सफलता और उसका संदेश
कछुए की पीठ पर टिके मंदराचल पर्वत और नागराज वासुकी की सहायता से देवताओं और असुरों ने मिलकर फिर से पूरी शक्ति के साथ समुद्र मंथन शुरू किया। इसी आधार और सहयोग के परिणामस्वरूप सागर से हलाहल विष से लेकर अमृत कलश और माता लक्ष्मी तक सभी चौदह दिव्य रत्न प्रकट हो पाए।
यह कथा हमें यह सिखाती है कि जीवन में कितनी भी बड़ी बाधा क्यों न आए, यदि सही मार्गदर्शन, सही आधार और सामूहिक प्रयास मिल जाए, तो हर असंभव कार्य को संभव बनाया जा सकता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा पुराणों और सनातन धर्म की मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक भारतीय संस्कृति और पौराणिक इतिहास की जानकारी पहुंचाना है।
FSSAI Action on Dabur: '100% प्योर' और '100% नेचुरल' दावों पर FSSAI सख्त, डाबर के कई फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री पर लगी रोक
नई दिल्ली। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने डाबर इंडिया लिमिटेड के खिलाफ बड़ी नियामकीय कार्रवाई करते हुए उन कई फूड प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है, जिन पर '100% प्योर', '100% नेचुरल', '100% ऑर्गेनिक' जैसे दावे किए गए थे। FSSAI का कहना है कि ऐसे दावे अस्पष्ट (Ambiguous), सत्यापित नहीं किए जा सकने वाले (Unverifiable) और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले हैं।
रेगुलेटर के मुताबिक कंपनी को पहले भी नोटिस जारी कर इन दावों को हटाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन संतोषजनक सुधार नहीं किए जाने के बाद अब यह सख्त कार्रवाई की गई है।
किन-किन प्रोडक्ट्स पर लगी रोक?
FSSAI के आदेश के अनुसार निम्नलिखित उत्पादों पर की जा रही '100%' लेबलिंग पर आपत्ति जताई गई है-
- शहद (Honey)
- एप्पल साइडर विनेगर
- वर्जिन कोकोनट ऑयल
- तिल का तेल
- गाय का घी
- नारियल पानी
- नारियल का दूध (Coconut Milk)
इन उत्पादों पर '100% Natural', '100% Pure', '100% Purity Guaranteed', '100% Organic' और '100% Tender Coconut Water' जैसे दावे किए जा रहे थे।
FSSAI ने क्या कहा?
FSSAI का कहना है कि Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 के तहत इस प्रकार के '100%' दावे स्वीकार्य नहीं हैं, क्योंकि इन्हें वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सिद्ध करना संभव नहीं होता और इससे उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। रेगुलेटर ने स्पष्ट किया कि खाद्य उत्पादों के प्रचार में ऐसे दावे केवल तभी किए जा सकते हैं जब वे नियमों के अनुरूप हों और उनके समर्थन में पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध हों।
'जैविक भारत' लोगो पर भी उठाए सवाल
FSSAI ने जांच में पाया कि- Dabur Himalayan Organic Apple Cider Vinegar Dabur Organic Honey पर वैध FSSAI Organic Endorsement के बिना 'जैविक भारत (Jaivik Bharat)' लोगो का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह भी नियामकीय मानकों का उल्लंघन माना गया है।
कोकोनट मिल्क पर भी आपत्ति
रेगुलेटर ने Dabur Homemade Coconut Milk पर किए गए "100% Purity" दावे को भी नियमों के खिलाफ बताया। FSSAI के अनुसार यह एक Compound Food (मिश्रित खाद्य पदार्थ) की श्रेणी में आता है, जिसके लिए इस तरह का पूर्ण दावा करने की अनुमति नहीं है।
पहले भी दिया गया था नोटिस
FSSAI ने बताया कि उसने पहले डाबर को नोटिस भेजकर सभी '100%' दावे हटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन कंपनी की ओर से संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से अब संबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया है।
15 दिन में मांगी Action Taken Report
रेगुलेटर ने डाबर को निर्देश दिया है कि नोटिस में सूचीबद्ध सभी उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकी जाए।ऐसे अन्य सभी खाद्य उत्पाद भी हटाए जाएं जिन पर भ्रामक '100%' दावे किए गए हैं।15 दिनों के भीतर Action Taken Report (ATR) FSSAI को सौंपी जाए।
डाबर ने क्या कहा?
डाबर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि उसे FSSAI का नोटिस प्राप्त हो गया है और कंपनी अपनी वेबसाइट पर मौजूद संबंधित कंटेंट की समीक्षा कर रही है।
कंपनी ने कहा,
"हमें FSSAI का नोटिस मिला है और हम नोटिस में बताए गए कंटेंट की जांच कर रहे हैं।"
हाल के महीनों में FSSAI की बढ़ी सख्ती
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब FSSAI खाद्य उत्पादों के भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और लेबलिंग के खिलाफ लगातार सख्ती बरत रहा है। रेगुलेटर सोशल मीडिया के जरिए भी कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक कर रहा है। हाल के महीनों में FSSAI ने कई एनर्जी ड्रिंक और शराब बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ भी नियामकीय कार्रवाई की है।
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