36 साल की उम्र में ICC अंपायर के निधन से क्रिकेट जगत में शोक, जय शाह ने कहा- 'उनके योगदान को हमेशा किया जाएगा याद...'
Sarah Dambanevana Death: जिम्बाब्वे की पूर्व महिला क्रिकेटर और इंटरनेशनल अंपायर सारा डाम्बानेवाना के निधन से क्रिकेट जगत में शोक की लहर है. सारा डैमबानेवाना का 36 साल की उम्र में जाना वाकई क्रिकेट जगत के लिए बड़ा नुकसान है. महीनों तक अस्पताल में इलाज कराने के बाद उन्होंने 12 अक्टूबर को आखिरी सांस ली. जिम्बाब्वे क्रिकेट ने इस बात की जानकारी साझा की है. आपको बता दें, डाम्बानेवाना ने अंपायरिंग में आने से पहले एक तेज़ गेंदबाज़ के तौर पर जिम्बाब्वे का प्रतिनिधित्व किया था.
36 साल की उम्र में सारा डाम्बानेवाना का हुआ निधन
पूर्व महिला क्रिकेटर और इंटरनेशनल अंपायर सारा डाम्बानेवाना के 36 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. डाम्बानेवाना ने अंपायरिंग में आने से पहले एक तेज गेंदबाज के तौर पर जिम्बाब्वे का प्रतिनिधित्व किया था.
अंपायरिंग में उन्होंने देश की शुरुआती महिला मैच अधिकारियों में से एक के तौर पर अपनी पहचान बनाई. इंटरनेशनल क्रिकेटर से अंपायर बनने तक का उनका सफर खेल के प्रति उनके लंबे समय के समर्पण और क्रिकेट में महिलाओं के लिए नई राह बनाने के उनके संकल्प को दिखाता है।
ZC mourns pioneering umpire Sarah Dambanevana
— Zimbabwe Cricket (@ZimCricketv) October 12, 2026
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वह 2022 में ICC डेवलपमेंट अंपायर्स पैनल में शामिल होने वाली जिम्बाब्वे की पहली महिला अंपायर बनीं और उन्हें जनवरी 2023 में ICC U19 महिला T20 वर्ल्ड कप में पहली बार ICC की तरफ से काम करने का मौका मिला. डाम्बानेवाना ने 2 सितंबर 2023 को गैबोरोन, बोत्सवाना में केन्या और बोत्सवाना के बीच महिला T20I मैच से इंटरनेशनल अंपायरिंग में डेब्यू किया. अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर वह लगातार आगे बढ़ती गईं और उन्हें संयुक्त अरब अमीरात में होने वाले ICC महिला T20 वर्ल्ड कप 2024 में मैच अधिकारी के तौर पर चुना गया.
36 साल की उम्र में उन्होंने 72 सीनियर इंटरनेशनल मैचों में अंपायरिंग की थी, जिनमें 10 पुरुषों के T20I, 14 महिलाओं के ODI और 48 महिलाओं के T20I मैच शामिल थे. डाम्बानेवाना का आखिरी मैच 1 फरवरी 2026 को नेपाल में हुए ICC महिला T20 वर्ल्ड कप 2026 ग्लोबल क्वालिफायर के दौरान आयरलैंड और थाईलैंड के बीच खेला गया T20I मैच था.
ICC चेयरमैन श्री जय शाह ने कहा, “सारा डाम्बानेवाना के निधन से हमें गहरा दुख हुआ है. मैदान पर जिम्बाब्वे का प्रतिनिधित्व करने से लेकर एक इंटरनेशनल अंपायर के तौर पर इतिहास रचने तक का सारा का सफर प्रेरणादायक रहा है और उनकी उपलब्धियों ने क्रिकेट में अंपायरिंग या मैच ऑफिशियल के तौर पर करियर बनाने के लिए और महिलाओं का रास्ता आसान किया."
"खेल में उनके योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा, और वह ऐसी विरासत छोड़ गई हैं जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी. ICC की ओर से, मैं इस मुश्किल समय में उनके परिवार, दोस्तों, साथियों और ज़िम्बाब्वे क्रिकेट समुदाय के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं.”
ICC इस गहरे दुख की घड़ी में डाम्बानेवाना के चाहने वालों और ज़िम्बाब्वे क्रिकेट के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है।
एआई को बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाने में भारत दुनिया का नेतृत्व करेगा: नंदन नीलेकणि
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। इन्फोसिस के सह-संस्थापक और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) के परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय कार्यबल के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने मंगलवार को कहा कि भारत बड़े पैमाने पर लोगों तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पहुंचाने और उसके उपयोग को व्यापक बनाने में दुनिया का नेतृत्व करेगा।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए नीलेकणि ने कहा कि आज हर कोई एआई को जीपीटी के रूप में देख रहा है, लेकिन वास्तव में कोई भी जीपीटी मॉडल्स को पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि एआई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां केवल एक ही कंपनी या कुछ चुनिंदा खिलाड़ी पूरा बाजार अपने कब्जे में कर लेंगे। उन्होंने कहा कि एआई इकोसिस्टम में बड़ी संख्या में कंपनियों और नवाचारों के लिए जगह होगी।
नीलेकणि ने कहा, इस तकनीक को बोतल में बंद नहीं किया जा सकता। अधिक चिप्स आएंगे, नई तकनीकें विकसित होंगी और यह विनर टेक्स ऑल वाला क्षेत्र नहीं है।
उन्होंने कहा कि भारत का बड़े पैमाने पर डिजिटल तकनीकों को विकसित और लागू करने का अनुभव एआई के क्षेत्र में भी उसकी मदद करेगा। देश ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर) और बड़े पैमाने पर तकनीकी समाधानों को लागू करने में जो क्षमता दिखाई है, वही एआई के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
नीलेकणि ने कहा कि इन्फोसिस जैसी कंपनियों के लिए मांग बढ़ रही है और आने वाले समय में उनके लिए और अधिक काम आएगा। उन्होंने कहा कि आईटी कंपनियों के भविष्य को लेकर निराशा फैलाना केवल डिजास्टर मार्केटिंग है।
इससे पहले कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, आज हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ज्यादा है। हमारा बैंकिंग सिस्टम कई देशों के मुकाबले ज़्यादा मज़बूत स्थिति में है। दोस्तों, यह मजबूती भारत की सॉवरेन रेटिंग में हुए सुधारों से झलकती है। आज भारत का आत्मविश्वास अभूतपूर्व स्तर पर है। हम स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ सुधार लागू कर रहे हैं।
ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत ने मानवता को सशक्त बनाने का रास्ता चुना है। उन्होंने याद दिलाया कि भारत ने कोविड काल में 100 से अधिक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई थी और अपनी विनिर्माण क्षमता का उपयोग अन्य देशों की सहायता के लिए किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ महीने पहले भारत ने एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी, जिसकी सराहना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन में केवल मानवता के लिए एआई के उपयोग पर ही नहीं, बल्कि यह भी चर्चा हुई कि एआई से पशुओं को किस प्रकार लाभ पहुंचाया जा सकता है।
पीएम मोदी ने कहा, आज नवाचार के अवसर पहले की तुलना में कहीं अधिक लोगों तक पहुंच रहे हैं। नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं और नए समाधान विकसित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद भारत ने मोबाइल डेटा को सस्ता और सुलभ बनाने पर ध्यान दिया। इसके परिणामस्वरूप आज छोटे शहरों का छात्र डिजिटल शिक्षा हासिल कर सकता है, गांव का दुकानदार नए ग्राहकों तक पहुंच सकता है और युवा ऑनलाइन पाठ्यक्रमों के जरिए नए कौशल सीख सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी ने केवल लोगों को जोड़ने का काम नहीं किया, बल्कि उन्हें नए अवसरों से भी जोड़ा है, और यही भारत के विकास मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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