पंजाब में ड्रग एक्टिविस्ट की गोली मारकर हत्या, नशे के खिलाफ आवाज उठाते थे परमिंदर सिंह झोट्टा
पंजाब के मानसा में ड्रग्स के खिलाफ़ काम करने वाले एक्टिविस्ट परमिंदर सिंह झोटा की हत्या से राजनीतिक घमासान मच गया है। मंगलवार को विपक्षी नेताओं ने भगवंत मान सरकार पर तीखा हमला करते हुए कानून-व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया और ड्रग्स के खिलाफ़ राज्य के अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राजा वडिंग ने एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि झोटा की हत्या राज्य सरकार की कानून-व्यवस्था मशीनरी और ड्रग्स के खिलाफ़ उसके अभियान की विफलता को दर्शाती है। वडिंग ने कहा कि परमिंदर सिंह झोटा की दिन-दहाड़े हत्या भगवंत मान सरकार की विफल कानून-व्यवस्था और विफल 'युद्ध नशियां विरुद्ध' (ड्रग्स के खिलाफ़ युद्ध) का सीधा नतीजा है।" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ड्रग्स के खिलाफ़ झोटा की कोशिशों को राज्य सरकार से कोई समर्थन नहीं मिला। पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए वडिंग ने कहा, "मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवार और समर्थकों के साथ हैं।" वडिंग ने कहा कि जब 2023 में एक्टिविस्ट पर कथित तौर पर झूठा आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया गया था, तब वे झोटा के पिता और परिवार से संक्षेप में मिले थे। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने भी AAP सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस हत्या ने उसके ड्रग-विरोधी अभियान की विफलता को उजागर कर दिया है। खैरा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पंजाब के जाने-माने ड्रग-विरोधी एक्टिविस्ट परमिंदर सिंह झोटा की दिन-दहाड़े हत्या से पता चलता है कि आम आदमी पार्टी सरकार के तहत #DrugMafia कितना ताकतवर है!" उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ड्रग्स के खिलाफ़ सरकार का अभियान केवल प्रचार तक ही सीमित था और दावा किया कि पंजाब में नेता-पुलिस-ड्रग माफिया की मिलीभगत का बोलबाला है"। खैरा ने भी झोटा के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि ड्रग डीलरों को कैमरे पर रिकॉर्ड करते समय झोटा को गोली मारी गई।
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मजीठिया ने कहा कि मानसा में ड्रग्स की समस्या के खिलाफ़ लड़ रहे परविंदर झोटा को गोली मार दी गई और बाद में उनकी मौत हो गई। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने राज्य सरकार पर आपराधिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "एक ड्रग तस्कर द्वारा परविंदर सिंह झोटा की बेरहमी से हत्या की खबर सुनकर मुझे गहरा सदमा लगा है। दुख की इस घड़ी में मैं उनके शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा हूं। यह जघन्य हत्या इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि पंजाब में कानून-व्यवस्था खत्म हो चुकी है। मृतक लगातार ड्रग्स की समस्या के खिलाफ़ आवाज़ उठा रहे थे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया और न ही किसी ने उनका साथ दिया। युद्ध नशियां विरुद्ध (नशे के खिलाफ़ युद्ध) का बहुत प्रचार-प्रसार किया गया था, लेकिन यह केवल एक दिखावा साबित हुआ और पूरी तरह से विफल रहा। हाल की घटनाओं ने उजागर कर दिया है कि गुरु-द्रोही भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार पंजाब को लूटने और खुद को अमीर बनाने के लिए राज्य के संसाधनों को खत्म करने में पूरी तरह से लगी हुई है।
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राज्य में तेज़ी से बिगड़ती स्थिति पर उनका कोई ध्यान नहीं है, और इसी आपराधिक लापरवाही के कारण पंजाब के लोग हर दिन परेशान हो रहे हैं। यह 'जंगल राज' खत्म होना चाहिए।" बीजेपी नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने भी इस घटना को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की और पंजाब में कानून-व्यवस्था के ध्वस्त होने का आरोप लगाया। बिट्टू ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि पंजाब डर और अराजकता की चपेट में है। पुलिसकर्मियों की हत्या हो रही है, परविंदर झोटा जैसे नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है और गैंगस्टर बेखौफ घूम रहे हैं।
Intelligence Inputs से बढ़ी हलचल: Delhi Police ने 20 अक्टूबर तक मांगी 273 CAPF Companies की तैनाती
दिल्ली पुलिस ने राजधानी में अहम जगहों पर विरोध-प्रदर्शन तेज होने और कानून-व्यवस्था से जुड़ी संभावित चुनौतियों का हवाला देते हुए, सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (CAPFs) की 273 कंपनियों की तैनाती को 20 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की है। 12 अक्टूबर, 2026 को गृह मंत्रालय (MHA) को लिखे एक पत्र में, दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (ऑपरेशन्स) के ऑफिस ने अनुरोध किया कि पूरी राजधानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए तैनाती की अवधि को 12 अक्टूबर से आगे बढ़ाया जाए।
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पत्र के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि MHA ने 12 अक्टूबर तक दिल्ली पुलिस को कुल 301 CAPF कंपनियाँ उपलब्ध कराई थीं। इनमें से 221 कंपनियों को 6 अक्टूबर के MHA के एक आदेश के तहत मंज़ूरी दी गई थी, जबकि बाकी 80 कंपनियों को 8 अक्टूबर को मंज़ूरी मिली थी। यह अनुरोध ऐसे समय में आया है जब खुफिया जानकारी से पता चलता है कि 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और दूसरे संगठनों से जुड़े एक्टिविस्ट मार्च और विरोध प्रदर्शन और बढ़ा सकते हैं। बताया जा रहा है कि ये प्रदर्शन भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग से जुड़े हैं और इनमें जंतर-मंतर और भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय को निशाना बनाया जा सकता है।
दिल्ली पुलिस ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारी संसद भवन, इंडिया गेट और मंत्रियों के दफ्तरों व आवासों जैसी संवेदनशील जगहों के पास भी बड़ी संख्या में इकट्ठा होने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है। इस पत्र में भीम आर्मी और छात्र संगठनों जैसे दूसरे राजनीतिक समूहों और संगठनों के एक्टिविस्ट के शामिल होने की संभावना के साथ-साथ, ऐसे समूहों के प्रदर्शनों का भी ज़िक्र है जिन्हें दस्तावेज़ में 'असामाजिक तत्व' बताया गया है।
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इस सूचना में कहा गया है कि संभावित घटनाक्रमों से कानून-व्यवस्था की ऐसी अप्रत्याशित स्थितियां पैदा हो सकती हैं, जिनसे निपटने के लिए अतिरिक्त कर्मियों को तुरंत जुटाने और तैनात करने की ज़रूरत पड़ सकती है। इसमें CJP के प्रमुख सदस्यों के बयानों का ज़िक्र है, जिन्होंने कथित तौर पर संकेत दिया था कि सरकार को लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन के लिए तैयार रहना चाहिए।
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