वांग यी ने 2026 प्रथम एपेक वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के उद्घाटन समारोह में भाग लिया
बीजिंग, 10 फरवरी (आईएएनएस)। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को चीन के क्वांगतोंग प्रांत के क्वांगचो शहर में आयोजित 2026 प्रथम एपेक वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक के उद्घाटन समारोह में भाग लिया और संबोधित किया।
वांग यी ने कहा कि 12 वर्षों के अंतराल के बाद इस वर्ष चीन तीसरी बार एपेक की मेजबानी करेगा। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने जोर दिया कि हमें आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और लोगों के कल्याण में सुधार करने के एपेक के मूल इरादे को कायम रखना चाहिए, खुले विकास के माध्यम से अवसरों को साझा करने और पारस्परिक लाभ प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए, समावेशी आर्थिक वैश्वीकरण को आगे बढ़ाना चाहिए और एक एशिया-प्रशांत समुदाय का निर्माण करना चाहिए। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, हमें एक समृद्ध, स्थिर, खुला, समावेशी और सामंजस्यपूर्ण एशिया-प्रशांत का निर्माण करना होगा।
वांग यी ने कहा कि चीन ने इस वर्ष की बैठक के लिए एशिया-प्रशांत समुदाय का निर्माण और साझा समृद्धि को बढ़ाना को विषय के रूप में चुना है और खुलेपन, नवाचार और सहयोग के तीन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में वार्षिक एजेंडा को आगे बढ़ाएगा। हमें एशिया-प्रशांत सहयोग के मूल इरादे की पुष्टि करनी चाहिए, एपेक के भविष्य के विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और नेताओं की बैठक में स्पष्ट दिशानिर्देशों और समृद्ध सामग्री के साथ एक दस्तावेज जारी करना चाहिए।
हमें एशिया-प्रशांत मुक्त व्यापार क्षेत्र के निर्माण के मार्ग को सक्रिय रूप से विस्तारित करना चाहिए, नवाचार के माध्यम से डिजिटल, कुशल और हरित परिवर्तन को बढ़ाते हुए विकास का विस्तार करना चाहिए, एपेक सदस्यों की विविधता का सम्मान करते हुए, विकास से संबंधित शासन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को गहरा करना चाहिए।
वांग यी ने कहा कि एपेक का चीन वर्ष चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत के साथ मेल खाता है। चीन चीनी शैली के आधुनिकीकरण की नई उपलब्धियों के साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र और विश्व के विकास के लिए नए अवसर प्रदान करेगा।
1 से 10 फरवरी तक, क्वांगचो में पहली एपेक वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक और संबंधित बैठकें आयोजित की गईं। विभिन्न पक्षों ने एपेक के चीन वर्ष विषय और तीन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर गहन चर्चा की, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक शुरुआत की और नवंबर में होने वाली अनौपचारिक नेताओं की बैठक के लिए परिणाम एकत्रित किए।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत-यूएस ट्रेड डील से अमेरिकी प्लास्टिक बाजार में बढ़ेगी देश की हिस्सेदारी : इंडस्ट्री
गाजियाबाद, 10 फरवरी (आईएएनएस)। भारत-यूएस ट्रेड डील घरेलू प्लास्टिक निर्यातकों के लिए व्यापार का बड़ा अवसर लेकर आई है और इससे अमेरिकी प्लास्टिक बाजार में भारत को अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह जानकारी इंडस्ट्री एक्सपर्ट की ओर से मंगलवार को दी गई।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए आरएमजी पॉलिमर इंडिया लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) अरविंद गोयनका ने कहा,भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील होने से घरेलू प्लास्टिक निर्यातकों के लिए अमेरिका का बड़ा बाजार खुलेगा।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका का सालाना प्लास्टिक का आयात करीब 75 अरब डॉलर का है। मौजूदा समय में भारत से अमेरिका को प्लास्टिक का निर्यात केवल 2.2 अरब डॉलर का है। ऐसे में यह समझौता भारतीय कंपनियों के लिए निर्यात बढ़ाने का सुनहरा मौका है। हमारा अमेरिका को प्लास्टिक का निर्यात अगले कुछ सालों में दोगुना हो सकता है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका पीवीसी (पॉलीविनाइल क्लोराइड) का भी बहुत बड़ा खरीदार है। अगर अमेरिका भारत से अधिक मात्रा में प्लास्टिक और पीवीसी उत्पाद खरीदेगा, तो वही सामान आगे अन्य देशों में भी एक्सपोर्ट किया जाएगा। इससे भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी।
अरविंद गोयनका के मुताबिक, यह समझौता न सिर्फ प्लास्टिक इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद साबित होगा, बल्कि भारत को एक मजबूत और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था 30 ट्रिलियन डॉलर की है और वहां की जनसंख्या करीब 34 करोड़ है, ऐसे में वहां आय अधिक होने के कारण उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग अधिक है। जब अमेरिका से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग आएगी, तो भारत में भी ऐसे ही प्रोडक्ट्स का उत्पादन होगा, तो ऐसे उत्पाद भारत में भी बेचे जाएंगे और इस फायदा आम जनता को भी होगा।
गोयनका के मुताबिक, भारत और अमेरिकी ट्रेड से देश का अन्य देशों को भी निर्यात बढ़ेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब भी किसी प्रोडक्ट का अमेरिका को निर्यात होता है तो उसकी स्वीकार्यता अपने आप खाड़ी, यूरोप और रूस जैसे देशों में बढ़ जाती है। ऐसे में जब अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ेगा, तो इसका फायदा भारत को अन्य देशों के साथ व्यापार में भी होगा।
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