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'ये उस बच्चे के लिए अच्छा नहीं है...' वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया में नहीं खिलाने पर दिग्गज का बयान, बताया बाहर करने का कारण

Vaibhav Sooryavanshi : वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया में खेलने का मौका नहीं मिल रहा है. 15 वर्षीय बाएं हाथ के बल्लेबाज को लगातार प्लेइंग-11 से बाहर रखा जा रहा है. भारत का ये विस्फोटक बल्लेबाज वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में लगातार बैंच पर बैठा हुआ है. वैभव सिर्फ फैंस को मैदान पर साथी खिलाड़ियों को पानी पिलाते ही नजर आ रहे हैं. उनके चौके-छक्कों को देखने के लिए उनके फैंस अब तरस गए हैं. वैभव ने टीम इंडिया के लिए पिछला मैच एशियन गेम्स 2026 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाफ खेला था. तब से अब तक उनको मौका नहीं मिला है.

दरअसल, भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली जा रही है. इस सीरीज के अब तक 3 मैच हो चुके हैं. टीम इंडिया सीरीज में 2-1 से आगे हैं. अब इस सीरीज का चौथा मैच रायपुर में 14 अक्टूबर यानी बुधवार को होने वाला है. भारत और वेस्टइंडीज के बीच ये मुकाबाल शाम 7 बजे से शुरू होगा. उससे पहले भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व फील्डिंग कोच आर. श्रीधर ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर बड़ा बयान दिया है. 


आर श्रीधर के अनुसार, 15 साल के बेहतरीन बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की बात करते हुए को बाहर करने का कारण उनकी फील्डिंग हो सकती है. श्रीधर को लगता है कि, उन्हें मैच के दौरान सब्स्टिट्यूट करना पड़ता है. ये चिंता की बात है. उन्होंने बताया है कि, वैभव को सब्स्टिट्यूट करने की वजह एक व्यवस्थित शेड्यूल के तहत एक भरोसेमंद फील्डर के तौर पर तैयार किया जाना चाहिए. उन्होंने और क्या कहा है, आइए इसके बारे में विस्तास से जानते हैं. 

वैभव सूर्यवंशी पर आर. श्रीधर का बड़ा बयान

उन्होंने कहा कि, 'वो 15 साल के हैं. वो अभी बच्चा हैं. इसलिए, मुझे लगता है कि वहां किसी को उसका प्रोग्राम सही ढंग से चलाना होगा. हालांकि, वो एक इंटरनेशनल एलीट माहौल में है, जहां एथलीट जानते हैं कि उन्हें क्या करना है और अपने वर्कलोड को कैसे मैनेज करना है. लेकिन 15 साल के बच्चे को कभी-कभी बताने की जरूरत होती है. वहां किसी को वैभव सूर्यवंशी के लिए एक शेड्यूल बनाना होगा, जिसमें वो प्रैक्टिस में काफी समय बिताए और मैच में फील्डिंग के लिए भी खुद को तैयार करे, क्योंकि 15 साल की उम्र में अगर आपको सब्स्टिट्यूट किया जा रहा है, तो यह अच्छा संकेत नहीं है'.

श्रीधर ने आगे कहा कि, '18 या 19 साल की उम्र तक, आप चाहेंगे कि वैभव एक बहुत अच्छे फील्डर के तौर पर निखरकर सामने आए. किसी को वैभव की जिम्मेदारी लेनी होगी और सुनिश्चित करना होगा कि वो रोज फील्डिंग की प्रैक्टिस करे. वो थोड़ी-बहुत स्पिन बॉलिंग भी कर सकता है, लेकिन उसे हम बाद के लिए रख सकते हैं. फिलहाल, मेरी तरफ से ये बिल्कुल साफ है कि उसे अपनी फील्डिंग पर बहुत मेहनत करनी होगी और किसी को उसे यह बात बतानी होगी'.

वैभव सूर्यवंशी का क्रिकेट करियर

वैभव सूर्यवंशी ने साल 2026 में टीम इंडिया के लिए अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था. वैभव जुलाई से अब तक कुल 8 टी20 मैच टीम इंडिया के लिए खेल पाए हैं. उन्होंने 8 मैचों की 8 पारियों में 2 हाफ सेंचुरी की मदद से 246 रन बनाए हैं. इस दौरान उनके बल्ले से 22 चौके और 18 छ्कके निकले हैं. उनका औसत 30.75 का है, जबकि उनका स्ट्राइक रेट 186.32 का है.

वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भारत का टी20 स्क्वाड

श्रेयस अय्यर (कप्तान), अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), तिलक वर्मा (उपकप्तान), शिवम दुबे, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, रवि बिश्नोई, नीतीश कुमार रेड्डी, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव, मयंक यादव.

ये भी पढ़ें : 'बेंच पर बैठकर कौन सा खिलाड़ी तैयार होता है...', वैभव सूर्यवंशी के कोच ने खुलेआम दिया बड़ा बयान, बोले- 'मैनेजमेंट तानाशाही कर रहा है...'

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Explainer: राहुल गांधी की SIR याचिका में 14 खामियां! 220 रुपये की फीस से लेकर अधूरे कागजों तक..., कोर्ट को क्या-क्या खटका?

Rahul Gandhi SIR petition: राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया. शाम को उनकी लीगल टीम ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ याचिका दाखिल कर दी. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में 11 नेता याचिकाकर्ता हैं. याचिका में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को प्रतिवादी बनाया गया है.

बीते सोमवार देर शाम खबर आई कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 खामियां निकाली हैं. इनमें कोर्ट फीस की 220 रुपये की कमी भी शामिल है. रिपोर्टों के मुताबिक इसी वजह से याचिका फिलहाल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी. आइए समझते हैं क्या है ये पूरा मामला. 

पहले समझिए, SIR है क्या? 

SIR मतदाता सूची की घर-घर जाकर होने वाली गहन जांच. इसमें मृत, दूसरी जगह बस चुके और दोहरे नाम छांटे जाते हैं. साथ ही नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है. आयोग के मुताबिक पहला आदेश 24 जून 2025 को बिहार के लिए आया था. फिर 27 अक्टूबर 2025 को 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का कार्यक्रम घोषित हुआ. 14 मई 2026 को 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अगला शेड्यूल आया. अब दिल्ली में दावे-आपत्तियों की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर है.

क्या सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस पर फैसला दे चुका है?

जानकारी के अनुसार 27 मई 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने बिहार SIR को वैध ठहराया था. पीठ ने कहा था कि आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 21(3) के तहत ऐसी विशेष समीक्षा का अधिकार है. लेकिन वह फैसला बिहार की प्रक्रिया पर था. बता दें नई याचिका क्रियान्वयन, नाम कटने के तरीके और आयोग के भीतर फैसले लिए जाने के ढंग पर सवाल उठाती है. ऐसे में कानून के जानकारों का मानना है कि पुराने फैसले को हर नए सवाल का जवाब नहीं माना जा सकता है.

याचिका में विपक्ष की क्या मांग है?

विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है. रिपोर्टों के अनुसार याचिका में कुल 10 राहतें मांगी गई हैं, प्रमुख मांगें ये हैं...

- SIR पर अंतरिम रोक और इससे जुड़े फैसलों की कानूनी जांच

- सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति, जो नाम कटने की प्रक्रिया और चुनावी डेटाबेस में हुए बदलावों का ऑडिट करे

- हटाए गए सभी नाम बूथवार सार्वजनिक हों और हर नाम कटने का कारण भी बताया जाए

- फॉर्म-6 में हुए बदलाव और आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म की भरोसेमंदी पर सवालों की पड़ताल

विपक्ष की याचिका पर रजिस्ट्री ने क्या आपत्तियां लगाईं हैं.

- कोर्ट फीस 220 रुपये कम जमा हुई

- कुछ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे पर हस्ताक्षर या अधिकृत दस्तावेज नहीं थे. 

- मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की साफ और पढ़ने लायक प्रति नहीं लगी थी

- कुछ जरूरी दस्तावेज या पन्ने गायब बताए गए

अभी कोर्ट ने रजिस्ट्री को प्रक्रिया पूरी कराने को कहा है

बता दें ये सब दाखिले की प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी आपत्तियां हैं. इनका मतलब यह नहीं कि अदालत ने विपक्ष की दलीलें परखकर कुछ तय कर दिया. आम तौर पर ऐसी कमियां दूर करने के बाद याचिका फिर से लगाई जाती है. बताया जा रहा है कि अभी कोर्ट ने रजिस्ट्री को प्रक्रिया पूरी कराने को कहा है, संभव है कि आज कमियां पूरी कर ली जाएं, जिसके बाद याचिका पर सुनवाई संभव है. 

इस पूरे मामले में चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े कई बातों पर  असहमति जताई थी. 26 सितंबर को आयोग ने बयान जारी कर कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल और बाकी राज्यों में SIR के सारे फैसले सर्वसम्मति से हुए थे. 

FAQ

Q. क्या कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी?
A. रिपोर्टों में खारिज होने का जिक्र नहीं है. रजिस्ट्री ने सिर्फ प्रक्रियागत खामियां बताई हैं.

Q. क्या SIR पर रोक लग गई? 
A. नहीं। रोक सिर्फ मांगी गई है. रोक तभी मानी जाएगी, जब अदालत का आदेश आए.

Q. वोटर लिस्ट में अपना नाम कैसे जांचें?
A. चुनाव आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल (voters.eci.gov.in) या अपने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर नाम खोजें. नाम जुड़वाने, हटवाने की आपत्ति या सुधार के लिए आयोग के तय फॉर्म इस्तेमाल करें.

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