Explainer: राहुल गांधी की SIR याचिका में 14 खामियां! 220 रुपये की फीस से लेकर अधूरे कागजों तक..., कोर्ट को क्या-क्या खटका?
Rahul Gandhi SIR petition: राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक के नेताओं ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया. शाम को उनकी लीगल टीम ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ याचिका दाखिल कर दी. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका में 11 नेता याचिकाकर्ता हैं. याचिका में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू को प्रतिवादी बनाया गया है.
बीते सोमवार देर शाम खबर आई कि सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 खामियां निकाली हैं. इनमें कोर्ट फीस की 220 रुपये की कमी भी शामिल है. रिपोर्टों के मुताबिक इसी वजह से याचिका फिलहाल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी. आइए समझते हैं क्या है ये पूरा मामला.
Rahul Gandhi, Mallikarjun Kharge move SC over SIR; seek independent audit of voter rolls, suspension of exercise
— ANI Digital (@ani_digital) October 12, 2026
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पहले समझिए, SIR है क्या?
SIR मतदाता सूची की घर-घर जाकर होने वाली गहन जांच. इसमें मृत, दूसरी जगह बस चुके और दोहरे नाम छांटे जाते हैं. साथ ही नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है. आयोग के मुताबिक पहला आदेश 24 जून 2025 को बिहार के लिए आया था. फिर 27 अक्टूबर 2025 को 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का कार्यक्रम घोषित हुआ. 14 मई 2026 को 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अगला शेड्यूल आया. अब दिल्ली में दावे-आपत्तियों की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर है.
क्या सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस पर फैसला दे चुका है?
जानकारी के अनुसार 27 मई 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने बिहार SIR को वैध ठहराया था. पीठ ने कहा था कि आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 21(3) के तहत ऐसी विशेष समीक्षा का अधिकार है. लेकिन वह फैसला बिहार की प्रक्रिया पर था. बता दें नई याचिका क्रियान्वयन, नाम कटने के तरीके और आयोग के भीतर फैसले लिए जाने के ढंग पर सवाल उठाती है. ऐसे में कानून के जानकारों का मानना है कि पुराने फैसले को हर नए सवाल का जवाब नहीं माना जा सकता है.
याचिका में विपक्ष की क्या मांग है?
विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है. रिपोर्टों के अनुसार याचिका में कुल 10 राहतें मांगी गई हैं, प्रमुख मांगें ये हैं...
- SIR पर अंतरिम रोक और इससे जुड़े फैसलों की कानूनी जांच
- सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति, जो नाम कटने की प्रक्रिया और चुनावी डेटाबेस में हुए बदलावों का ऑडिट करे
- हटाए गए सभी नाम बूथवार सार्वजनिक हों और हर नाम कटने का कारण भी बताया जाए
- फॉर्म-6 में हुए बदलाव और आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म की भरोसेमंदी पर सवालों की पड़ताल
विपक्ष की याचिका पर रजिस्ट्री ने क्या आपत्तियां लगाईं हैं.
- कोर्ट फीस 220 रुपये कम जमा हुई
- कुछ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे पर हस्ताक्षर या अधिकृत दस्तावेज नहीं थे.
- मल्लिकार्जुन खरगे के पहचान पत्र की साफ और पढ़ने लायक प्रति नहीं लगी थी
- कुछ जरूरी दस्तावेज या पन्ने गायब बताए गए
अभी कोर्ट ने रजिस्ट्री को प्रक्रिया पूरी कराने को कहा है
बता दें ये सब दाखिले की प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी आपत्तियां हैं. इनका मतलब यह नहीं कि अदालत ने विपक्ष की दलीलें परखकर कुछ तय कर दिया. आम तौर पर ऐसी कमियां दूर करने के बाद याचिका फिर से लगाई जाती है. बताया जा रहा है कि अभी कोर्ट ने रजिस्ट्री को प्रक्रिया पूरी कराने को कहा है, संभव है कि आज कमियां पूरी कर ली जाएं, जिसके बाद याचिका पर सुनवाई संभव है.
Rahul Gandhi, opposition leaders file plea in Supreme Court against ECI over SIR irregularities
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इस पूरे मामले में चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े कई बातों पर असहमति जताई थी. 26 सितंबर को आयोग ने बयान जारी कर कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल और बाकी राज्यों में SIR के सारे फैसले सर्वसम्मति से हुए थे.
Rahul, Priyanka lead INDIA bloc march to Supreme Court, to petition against SIR & CEC
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FAQ
Q. क्या कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी?
A. रिपोर्टों में खारिज होने का जिक्र नहीं है. रजिस्ट्री ने सिर्फ प्रक्रियागत खामियां बताई हैं.
Q. क्या SIR पर रोक लग गई?
A. नहीं। रोक सिर्फ मांगी गई है. रोक तभी मानी जाएगी, जब अदालत का आदेश आए.
Q. वोटर लिस्ट में अपना नाम कैसे जांचें?
A. चुनाव आयोग के वोटर सर्विस पोर्टल (voters.eci.gov.in) या अपने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर नाम खोजें. नाम जुड़वाने, हटवाने की आपत्ति या सुधार के लिए आयोग के तय फॉर्म इस्तेमाल करें.
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