तीन दिवसीय भारत दौरे पर आएंगे फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, एआई इम्पेक्ट समिट में होंगे शामिल
नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिवसीय दौरे पर भारत आएंगे। विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत में रहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति मैक्रों भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान मैक्रों भारत-एआई इम्पेक्ट समिट 2026 में शामिल होंगे।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस दौरे के दौरान दोनों नेता हॉरिजोन 2047 रोडमैप में बताए गए कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इसके अलावा, नेता आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिसमें इंडो-पैसिफिक में सहयोग भी शामिल है।
दोनों नेता भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन करने के लिए मुंबई में उपस्थित होंगे। इस इवेंट को दोनों देशों में पूरे साल 2026 तक मनाया जाएगा। राष्ट्रपति मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पेक्ट समिट में हिस्सा लेंगे।
यह दौरा प्रधानमंत्री मोदी के फ्रांस दौरे के बाद हो रहा है और यह भारत-फ्रांस रणनीतिक शांति के आपसी भरोसे और गहराई के साथ-साथ इसे और गहरा करने के लिए दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी तक भारत-एआई इम्पेक्ट समिट का आयोजन होगा। इस समिट में दुनियाभर के देशों से प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह ग्लोबल साउथ में होने वाला पहला एआई समिट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समिट का आगाज करेंगे।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) भारत के विकास सफर, गवर्नेस को मजबूत करने और पब्लिक सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने में एक अहम भूमिका निभाता है। यह बड़े पैमाने पर सबको साथ लेकर चलने वाले विकास को समर्थन करता है और 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण से मेल खाता है। भारत की भाषा और सांस्कृतिक विविधता इसे अलग-अलग लोगों की जरूरतों के हिसाब से कई भाषाएं और कई मॉडल वाले एआई सिस्टम को आगे बढ़ाने की खास जगह देती है।
इसमें दुनिया भर के नेता, नीति बनाने वाले, इंडस्ट्री और एक्सपर्ट शामिल होंगे, ताकि गवर्नेस, नवाचार और स्थिर विकास के लिए एआई की बदलाव लाने वाली क्षमता को दिखाया जा सके और उस पर चर्चा की जा सके।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत और ब्रिटेन ने सामाजिक सुरक्षा योगदान समझौते पर लगाई मुहर
नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के ब्रिटेन के बीच सामाजिक सुरक्षा योगदान को लेकर एक समझौते पर मुहर लगी है। विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच टैलेंट की मोबिलिटी को समर्थन करेगा।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भारत गणराज्य में ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरून सीबी ओबीई ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत गणराज्य की सरकार और यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड उत्तरी आयरलैंड की सरकार के बीच सामाजिक सुरक्षा सहयोग से जुड़े सोशल सिक्योरिटी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, अस्थायी विदेश असाइनमेंट पर कर्मचारियों के डबल सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन को खत्म करके यह एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच टैलेंट की मोबिलिटी को सपोर्ट करेगा और कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाएगा।
इससे पहले, जनवरी 2026 में विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि भारत और ब्रिटेन ने नई दिल्ली में डबल कंट्रीब्यूशन पर भारत-ब्रिटेन सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के लिए बातचीत की।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने आपसी फायदे वाला समझौता किया है जो दोहरे सोशल सिक्योरिटी पेमेंट को खत्म करता है और दोनों देशों के एम्प्लॉयर्स और क्रॉस-बॉर्डर टैलेंट्स को फायदा पहुंचाता है।
दोनों पक्षों के बीच यह बैठक 21 और 22 जनवरी के बीच हुई थी, जिसमें विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव पीएस गंगाधर और ब्रिटेन नेशनल इंश्योरेंस पॉलिसी के डिप्टी डायरेक्टर एडमंड हेयर शामिल हुए थे।
इस द्विपक्षीय बातचीत में दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग के एक जरूरी पहलू पर बात हुई, जिसमें क्रॉस-बॉर्डर व्यवसायिक और एम्प्लॉयर्स पर बोझ डालने वाली दोहरी सामाजिक सुरक्षा भागीदारी को खत्म करने पर केंद्रित किया गया।
भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय बातचीत में लगातार तरक्की हो रही है, जो आर्थिक संबंधों को मजबूत करने वाले व्यवहारिक तरीकों पर केंद्रित है। आजकल के अंतरराष्ट्रीय संबंधों में, खासकर उन देशों में जहां बॉर्डर पार काम करने वाली बड़ी प्रोफेशनल और बिजनेस कम्युनिटी हैं, सोशल सिक्योरिटी में तालमेल एक जरूरी एरिया बनकर उभरा है।
इन बातचीत का सफल होना भारत-अमेरिका के आर्थिक सहयोग और बॉर्डर पार मोबिलिटी और रोजगार सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मामलों में इंस्टीट्यूशनल कोऑर्डिनेशन में एक ठोस तरक्की दिखाता है। सोशल सिक्योरिटी समझौते माइग्रेंट वर्कर्स और एक्सपैट्रिएट प्रोफेशनल्स पर कम्प्लायंस का बोझ कम करने के लिए बुनियादी तरीकों के तौर पर काम करते हैं।
डबल कंट्रीब्यूशन की चुनौतियों को हल करके यह समझौता दोनों देशों के बीच स्किल्ड लोगों के आने-जाने को आसान बनाता है, जिससे दोनों देशों के बीच वर्कफोर्स इंटीग्रेशन और इकोनॉमिक एंगेजमेंट को समर्थन मिलता है। यह एग्रीमेंट कई सेक्टर्स में दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए एक जैसा कमिटमेंट दिखाता है, खासकर क्रॉस-बॉर्डर बिजनेस और नौकरी में लगे व्यवसायिकों को फायदा होगा।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
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