भारत और ब्रिटेन ने सामाजिक सुरक्षा योगदान समझौते पर लगाई मुहर
नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड के ब्रिटेन के बीच सामाजिक सुरक्षा योगदान को लेकर एक समझौते पर मुहर लगी है। विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के बीच टैलेंट की मोबिलिटी को समर्थन करेगा।
विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, विदेश सचिव विक्रम मिस्री और भारत गणराज्य में ब्रिटिश हाई कमिश्नर लिंडी कैमरून सीबी ओबीई ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत गणराज्य की सरकार और यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड उत्तरी आयरलैंड की सरकार के बीच सामाजिक सुरक्षा सहयोग से जुड़े सोशल सिक्योरिटी समझौते पर हस्ताक्षर किए।
विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, अस्थायी विदेश असाइनमेंट पर कर्मचारियों के डबल सोशल सिक्योरिटी कंट्रीब्यूशन को खत्म करके यह एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच टैलेंट की मोबिलिटी को सपोर्ट करेगा और कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाएगा।
इससे पहले, जनवरी 2026 में विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि भारत और ब्रिटेन ने नई दिल्ली में डबल कंट्रीब्यूशन पर भारत-ब्रिटेन सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के लिए बातचीत की।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने आपसी फायदे वाला समझौता किया है जो दोहरे सोशल सिक्योरिटी पेमेंट को खत्म करता है और दोनों देशों के एम्प्लॉयर्स और क्रॉस-बॉर्डर टैलेंट्स को फायदा पहुंचाता है।
दोनों पक्षों के बीच यह बैठक 21 और 22 जनवरी के बीच हुई थी, जिसमें विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव पीएस गंगाधर और ब्रिटेन नेशनल इंश्योरेंस पॉलिसी के डिप्टी डायरेक्टर एडमंड हेयर शामिल हुए थे।
इस द्विपक्षीय बातचीत में दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग के एक जरूरी पहलू पर बात हुई, जिसमें क्रॉस-बॉर्डर व्यवसायिक और एम्प्लॉयर्स पर बोझ डालने वाली दोहरी सामाजिक सुरक्षा भागीदारी को खत्म करने पर केंद्रित किया गया।
भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय बातचीत में लगातार तरक्की हो रही है, जो आर्थिक संबंधों को मजबूत करने वाले व्यवहारिक तरीकों पर केंद्रित है। आजकल के अंतरराष्ट्रीय संबंधों में, खासकर उन देशों में जहां बॉर्डर पार काम करने वाली बड़ी प्रोफेशनल और बिजनेस कम्युनिटी हैं, सोशल सिक्योरिटी में तालमेल एक जरूरी एरिया बनकर उभरा है।
इन बातचीत का सफल होना भारत-अमेरिका के आर्थिक सहयोग और बॉर्डर पार मोबिलिटी और रोजगार सुरक्षा को प्रभावित करने वाले मामलों में इंस्टीट्यूशनल कोऑर्डिनेशन में एक ठोस तरक्की दिखाता है। सोशल सिक्योरिटी समझौते माइग्रेंट वर्कर्स और एक्सपैट्रिएट प्रोफेशनल्स पर कम्प्लायंस का बोझ कम करने के लिए बुनियादी तरीकों के तौर पर काम करते हैं।
डबल कंट्रीब्यूशन की चुनौतियों को हल करके यह समझौता दोनों देशों के बीच स्किल्ड लोगों के आने-जाने को आसान बनाता है, जिससे दोनों देशों के बीच वर्कफोर्स इंटीग्रेशन और इकोनॉमिक एंगेजमेंट को समर्थन मिलता है। यह एग्रीमेंट कई सेक्टर्स में दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए एक जैसा कमिटमेंट दिखाता है, खासकर क्रॉस-बॉर्डर बिजनेस और नौकरी में लगे व्यवसायिकों को फायदा होगा।
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केके/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
भारत के साथ काम करने को तैयार है चीन: चीनी राजदूत जू फीहोंग
नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। गलवान विवाद के बाद से भारत और चीन के बीच हाल के कुछ समय में तनाव कम हुए हैं। दोनों देशों के बीच सेवाएं धीरे-धीरे शुरू हो रही हैं, जो गलवान विवाद की वजह से पूरी तरह से बंद हो गई थीं। इस बीच भारत में चीनी राजदूत जू फीहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी।
चीनी राजदूत जू फीहोंग ने कहा, 9 फरवरी को चीन के ब्रिक्स शेरपा और उपविदेश मंत्री मा झाओक्सू ने नई दिल्ली में पहली ब्रिक्स शेरपा मीटिंग में हिस्सा लिया। मा झाओक्सू ने बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ब्रिक्स सहयोग के हाई-क्वालिटी डेवलपमेंट का जरूरी कॉन्सेप्ट और शांति, इनोवेशन, ग्रीन विकास, न्याय और लोगों के बीच करीबी लेन-देन के लिए प्रतिबद्ध ब्रिक्स बनाने के पांच सहयोग वाले लेआउट सामने रखे हैं। इनसे ब्रिक्स मैकेनिज्म के भविष्य के डेवलपमेंट का रास्ता तय हुआ है।
उन्होंने आगे कहा, चीन इस साल ब्रिक्स के चेयरमैन भारत और ब्रिक्स सदस्यों के साथ-साथ साझेदार देशों के साथ मिलकर ब्रिक्स सहयोग का सही रास्ता अपनाने, व्यवहारिक सहयोग को गहरा करने, काम करने के तरीके को बेहतर बनाने, बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने, इंटरनेशनल फेयरनेस और जस्टिस को बनाए रखने और ब्रिक्स सहयोग में और ज्यादा विकास लाने के लिए तैयार है।
चीनी राजदूत ने कहा कि मीटिंग में पार्टियों ने ब्रिक्स सहयोग की प्राथमिकता और साल के बड़े इवेंट्स के आयोजन पर अपने विचार साझा किए हैं और 18वें ब्रिक्स समिट की तैयारी शुरू कर दी है।
7 से 9 फरवरी तक चीनी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संवर्धन परिषद (सीसीपीआईटी) के नेतृत्व में चीनी व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में 2026 एपेक व्यापार सलाहकार परिषद की पहली बैठक की मेजबानी की। यह एपेक के चीन वर्ष का पहला प्रमुख व्यावसायिक कार्यक्रम था।
इस दौरान, इंडोनेशिया के आर्थिक मामलों के समन्वय मंत्री एयरलंगा हार्टार्टी ने एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में व्यापार समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा की और एपेक के चीन वर्ष की पूर्ण सफलता की कामना की। उन्होंने आशा जताई कि विभिन्न पक्षों के साथ मिलकर दक्षिणी चीन के क्वांगतोंग प्रांत के शनचन शहर में आयोजित 2026 एपेक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, हाथ मिलाकर क्षेत्रीय साझा समृद्धि में मजबूत प्रेरित शक्ति का संचार करेंगे।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
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