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बसंत ऋतु में क्या खाएं, क्या छोड़ें? आयुर्वेद से जानिए रात के भोजन के गोल्डन रूल्स

नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। बसंत ऋतु का आगमन प्रकृति में नई ऊर्जा और रंग लेकर आता है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह समय स्वास्थ्य के लिए थोड़ा संवेदनशील भी होता है। दिन में बढ़ती गर्मी और रातों में हल्की ठंडक शरीर में कफ दोष को सक्रिय कर देती है। अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि बसंत की रातों में उन्हें पेट भारी होना, अपच या नींद में बाधा महसूस होती है।

आयुर्वेद के मुताबिक, सर्दियों के दौरान शरीर में जमा हुआ कफ सूरज की बढ़ती गर्मी से पिघलने लगता है। यदि रात में भारी, ठंडा या गरिष्ठ भोजन किया जाए, तो यह कफ और बढ़ जाता है और जुकाम, खांसी, पेट की समस्या और मेटाबॉलिज्म सुस्त होने जैसी परेशानियां पैदा होती हैं। इसलिए बसंत में हल्का और सुपाच्य भोजन करना बेहद जरूरी है।

रात के भोजन के लिए मूंग दाल की खिचड़ी सबसे अच्छा विकल्प है। यह हल्की और सुपाच्य होती है और पेट पर दबाव नहीं डालती। इसमें थोड़ी सोंठ पाउडर डालने से इसका गुण और बढ़ जाता है। भुनी हुई मौसमी सब्जियां जैसे लौकी, तोरई और परवल भी फाइबर से भरपूर होती हैं और कब्ज जैसी समस्या से बचाती हैं। बाजरे की रोटी शरीर की नमी और कफ को सोखने में मदद करती है, इसलिए इसे सीमित मात्रा में रात के भोजन में शामिल करना फायदेमंद है।

इसके अलावा अदरक और शहद का गुनगुना पानी पीना बसंत की रातों में श्वसन तंत्र को साफ रखने और कफ को पिघलाने का परंपरागत तरीका है। मेथी का साग या पराठा भी इस समय विशेष लाभकारी है, क्योंकि यह बढ़े हुए कफ को कम करता है और डायबिटीज या जोड़ों के दर्द वाले लोगों के लिए मददगार है। यदि आप दूध पीते हैं, तो बसंत में हल्दी वाला गुनगुना दूध ही लें, यह एलर्जी और सूजन से बचाता है।

जौ का सूप, सहजन की फली, पपीता और सोंठ-अजवाइन का तड़का भी रात के भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। ये हल्के, सुपाच्य और कफ नाशक गुणों से भरपूर होते हैं।

बसंत में खाने के कुछ गोल्डन रूल्स भी हैं। खाना जल्दी खाएं, रात 8 बजे तक खाना पूरा कर लें, ठंडे पानी से बचें और दही का सेवन न करें।

--आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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एनपीजी के जरिए अब तक 16.10 लाख करोड़ रुपए के 352 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन हुआ : केंद्र

नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) सिस्टम के माध्यम से अब तक कुल 16.10 लाख करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली 352 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन किया जा चुका है।

लोकसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इन 352 प्रोजेक्ट्स में से 201 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है और इनमें से 167 प्रोजेक्ट्स कार्यान्वयन के अधीन हैं।

प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (पीएमजीएस-एनएमपी) के अंतर्गत गठित नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन करता है ताकि योजना चरण में ही एकीकृत योजना, बहुआयामी कार्यप्रणाली, अंतर-आयामी कार्यप्रणाली, प्रयासों का समन्वय, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, परियोजना स्थल और उसके आसपास व्यापक विकास, डेटा-आधारित निर्णय लेने को सुनिश्चित किया जा सके।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने राज्यों को इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए 50 वर्षों के ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 5,000 करोड़ रुपए वितरित करने का प्रावधान किया है।

प्रसाद के अनुसार, केंद्रीय क्षेत्र के चल रहे प्रोजेक्ट्स, जिनमें प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के अंतर्गत नियोजित और मूल्यांकित इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जिनकी लागत 150 करोड़ रुपए या उससे अधिक है, के कार्यान्वयन की निगरानी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा की जाती है।

इसके अतिरिक्त, प्रोजेक्ट्स की चरणबद्ध निगरानी करने, मुद्दों के त्वरित समाधान और 500 करोड़ रुपए या उससे अधिक की अनुमानित लागत वाली बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के क्रियान्वयन में तेजी लाने के उद्देश्य से परियोजना निगरानी समूह (पीएमजी) का गठन किया गया है।

पीएमजी ने एक अद्वितीय पंचस्तरीय समाधान प्रणाली लागू की है, जो यह सुनिश्चित करती है कि मुद्दों का समाधान उचित स्तर पर हो। सामान्य मुद्दों के लिए संबंधित मंत्रालय से शुरुआत होती है और जटिल मुद्दों के लिए प्रगति (सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन) मंच तक बात पहुंचती है।

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, यह दृष्टिकोण समीक्षा तंत्र को सुव्यवस्थित करता है, दोहराव को रोकता है और उच्च अधिकारियों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाता है।

उन्होंने आगे कहा कि परियोजनाओं में आने वाली बाधाओं को दूर करने और समय पर उनका समापन सुनिश्चित करने के लिए, पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान को पीएमजी के साथ एकीकृत किया गया है, जिससे परियोजनाओं के कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं और नियामक बाधाओं का समाधान तेजी से हुआ है।

--आईएएनएस

एबीएस/

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PAK vs USA: बाबर आजम ने खेली T20 वर्ल्ड कप में अपनी सबसे तेज पारी, 32 गेंदों पर ठोके इतने रन

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