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भारत के कोने-कोने तक म्यूचुअल फंड्स को पहुंचाने के लिए एनएसई ने डाक विभाग के साथ किया एमओयू

नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। देश के कोने-कोने तक म्यूचुअल फंड्स को पहुंचाने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने मंगलवार को डाक विभाग के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया है।

इस एमओयू का उद्देश्य डाकघरों के विस्तृत नेटवर्क का उपयोग कर देश में म्यूचुअल फंड्स को पहुंचाना है।

आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस समझौते के तहत डाक विभाग के चुनिंदा कर्मचारियों को सर्टिफाइड म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर के रूप में शामिल किया जाएगा और उन्हें ट्रेनिंग दी जाएगी।

ये कर्मचारी अनिवार्य प्रमाणन और नियामक अनुपालन के अधीन, जिसमें एनआईएसएम प्रमाणन और ईयूआईएन पंजीकरण शामिल है, एनएसई के म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म के माध्यम से म्यूचुअल फंड उत्पाद और संबंधित निवेशक सेवाएं प्रदान करेंगे।

संचार मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि डाक विभाग, देश भर में फैले अपने 1.64 लाख से अधिक डाकघरों के विशाल नेटवर्क का उपयोग करते हुए, एनएसई के साथ मिलकर काम करेगा, जिसके पास म्यूचुअल फंड लेनदेन को संभालने के लिए एक मजबूत ऑनलाइन प्रणाली है।

इस सहयोग का उद्देश्य म्यूचुअल फंड उत्पादों की अंतिम-मील पहुंच को विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बढ़ाना है। एनएसई के मुख्य व्यापार विकास अधिकारी श्रीराम कृष्णन ने कहा कि इस साझेदारी का लक्ष्य एक पारदर्शी, अनुपालनशील और निवेशक-हितैषी वितरण प्रणाली स्थापित करना है जो देश के कोने-कोने में नागरिकों तक पहुंचे।

इस साझेदारी का उद्देश्य इंडिया पोस्ट के भरोसे, सुलभता और व्यापक पहुंच को एनएसई के बाजार अवसंरचना और तकनीकी विशेषज्ञता के साथ मिलाकर वित्तीय समावेशन को और अधिक मजबूत करना है। इस पहल से पूंजी बाजार से जुड़े वित्तीय उत्पादों के प्रति निवेशकों की जागरूकता, पारदर्शिता और भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

डाक विभाग की महाप्रबंधक (सीसीएस और आरबी) मनीषा बंसल बादल ने कहा, एनएसई के साथ यह साझेदारी इंडिया पोस्ट को अपने ग्राहकों को आधुनिक निवेश समाधान प्रदान करने में सक्षम बनाएगी, साथ ही निवेशक संरक्षण, पारदर्शिता और नियामक अनुपालन के उच्चतम मानकों को बनाए रखेगी।

यह सहयोग चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, जिसकी शुरुआत चुनिंदा स्थानों पर पायलट प्रोजेक्ट से होगी।

--आईएएनएस

एबीएस/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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डीपफेक और एआई कंटेंट पर सख्त नियम: 3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक सामग्री, सरकार ने आईटी नियमों में किया बड़ा संशोधन

केंद्र सरकार ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एआई से तैयार किए जाने वाले फर्जी और भ्रामक कंटेंट पर लगाम लगाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में बड़ा संशोधन किया है. नए संशोधन नियम 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे. इन बदलावों के तहत डीपफेक और एआई से तैयार सामग्री को लेकर सोशल मीडिया कंपनियों और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी काफी बढ़ा दी गई है. सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक अब ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन’ यानी कृत्रिम या एल्गोरिद्म के जरिए तैयार ऑडियो, वीडियो, फोटो या अन्य दृश्य सामग्री को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. ऐसे कंटेंट में वह सामग्री शामिल होगी जो वास्तविक दिखती हो और किसी व्यक्ति या घटना को इस तरह पेश करती हो कि उसे असली समझा जा सके. हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामान्य एडिटिंग, रंग सुधार, टेक्निकल सुधार, अनुवाद या दस्तावेज तैयार करने जैसे कार्यों को सिंथेटिक कंटेंट नहीं माना जाएगा, बशर्ते वे भ्रामक या नकली रिकॉर्ड तैयार न करें.

3 घंटे में कंटेंट हटाना होगा

नए नियमों के तहत यदि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध या भ्रामक एआई कंटेंट की जानकारी मिलती है तो उसे तीन घंटे के भीतर हटाना या उस तक पहुंच रोकना अनिवार्य होगा. पहले इसके लिए 36 घंटे का समय दिया जाता था. इसके अलावा कानून व्यवस्था से जुड़ी सूचना केवल डीआईजी या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी द्वारा ही दी जा सकेगी.

यूजर्स को हर तीन महीने में चेतावनी देना अनिवार्य

सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि वे हर तीन महीने में यूजर्स को नियमों और कानूनों की जानकारी दें. साथ ही यूजर्स को यह भी बताना होगा कि एआई से तैयार अवैध या आपत्तिजनक सामग्री साझा करने पर आईटी एक्ट, भारतीय न्याय संहिता 2023, पॉक्सो एक्ट, जनप्रतिनिधित्व कानून और महिलाओं के अशोभनीय चित्रण जैसे कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है.

एआई कंटेंट की पहचान और लेबलिंग अनिवार्य

नए नियमों के अनुसार सोशल मीडिया कंपनियों को एआई से तैयार सामग्री की पहचान के लिए तकनीकी उपकरण लगाने होंगे. ऐसे कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल करना होगा और उसमें स्थायी डिजिटल पहचान या मेटाडेटा जोड़ना होगा, जिसे हटाया नहीं जा सकेगा.

इसके अलावा प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि निम्न प्रकार के एआई कंटेंट को रोका जाए या हटाया जाए:

        •        बच्चों से जुड़े यौन शोषण या अश्लील सामग्री

        •        बिना सहमति के निजी या आपत्तिजनक चित्र और वीडियो

        •        फर्जी दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड

        •        हथियार, विस्फोटक या हिंसा से जुड़ी सामग्री

        •        किसी व्यक्ति या घटना की डीपफेक प्रस्तुति

सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही बढ़ी

महत्वपूर्ण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अब यूजर्स से यह घोषणा करवानी होगी कि वे जो सामग्री साझा कर रहे हैं वह एआई से तैयार है या नहीं. कंपनियों को तकनीकी माध्यम से इसकी पुष्टि भी करनी होगी. नियमों का पालन नहीं करने पर प्लेटफॉर्म की कानूनी सुरक्षा समाप्त मानी जा सकती है.

पुराने कानूनों में भी बदलाव

सरकार ने नए नियमों में भारतीय दंड संहिता की जगह भारतीय न्याय संहिता 2023 को शामिल किया है. यह संशोधन देश के नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप किया गया है. सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली फर्जी खबरों, डीपफेक और भ्रामक प्रचार पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत किया जा सकेगा.

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