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महिला पर जानलेवा हमले के बाद बाघिन T-27 पकड़ी गई, कान्हा से वन विहार भोपाल किया गया शिफ्ट
कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है। पिछले कुछ दिनों से बफर क्षेत्र के गांवों में डर का माहौल बना हुआ था। एक महिला की जान लेने के बाद जिस बाघिन की तलाश लगातार की जा रही थी, उसे आखिरकार वन विभाग ने सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया है। इस कार्रवाई के बाद आसपास के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है।
वन विभाग ने विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर 14 वर्षीय बाघिन T-27 को ट्रैंकुलाइज किया और स्वास्थ्य जांच के बाद उसे विशेष वाहन से वन विहार भोपाल भेज दिया। अधिकारियों का कहना है कि बाघिन उम्रदराज हो चुकी थी और उसके कैनाइन दांत काफी घिस गए थे। इसी वजह से वह जंगल के बजाय गांवों की ओर आसान शिकार की तलाश में आने लगी थी। अब इस कार्रवाई के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई है।
महिला की मौत के बाद शुरू हुआ बड़ा सर्च ऑपरेशन
पूरा मामला 2 अगस्त की देर रात का है। कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर जोन के खापा परिक्षेत्र स्थित पर्रापुर गांव के स्कूल टोला में 45 वर्षीय सुगनी बाई बैगा पर बाघ के हमले की घटना सामने आई थी। इस हमले में महिला की मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की। इसके बाद अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया। गांवों के आसपास गश्त बढ़ा दी गई और लोगों को जंगल की ओर अकेले नहीं जाने की सलाह दी गई।
कैमरा ट्रैप और हाथियों की मदद से हुई बाघिन की पहचान
महिला की मौत के बाद वन विभाग ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जंगल और गांव के आसपास कई स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए ताकि बाघ की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
इसके अलावा प्रशिक्षित हाथियों और विशेष वन्यजीव दल की मदद से लगातार जंगल की निगरानी की गई। कई घंटों की तलाश के बाद अधिकारियों ने करीब 14 साल की मादा बाघिन T-27 की पहचान की। जांच में यह भी सामने आया कि यह बाघिन पहले भी कई बार गांव के आसपास देखी जा चुकी थी। स्थिति को गंभीर मानते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति ली गई और रेस्क्यू ऑपरेशन की योजना तैयार की गई।
कैसे किया गया बाघिन T-27 का सफल रेस्क्यू
वन विभाग की विशेष टीम ने पूरी तैयारी के साथ अभियान शुरू किया। क्षेत्र संचालक रवींद्र मणि त्रिपाठी और उप संचालक (बफर) अमिता के.बी. के मार्गदर्शन में हाथियों की मदद से बाघिन की लोकेशन तय की गई।
इसके बाद विशेषज्ञों ने सुरक्षित दूरी से ट्रैंकुलाइज गन के जरिए बाघिन को बेहोश किया। पूरी प्रक्रिया बेहद सावधानी से पूरी की गई ताकि बाघिन को किसी तरह की चोट न पहुंचे और टीम के सदस्य भी सुरक्षित रहें।
बेहोश होने के बाद वन्यजीव चिकित्सकों ने मौके पर ही उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया।
स्वास्थ्य जांच में सामने आई अहम वजह
वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल ने बाघिन की जांच के दौरान पाया कि उसके कैनाइन दांत काफी घिस चुके थे। विशेषज्ञों के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ कई बाघों के दांत कमजोर हो जाते हैं।
जब बाघ अपने प्राकृतिक शिकार का पीछा करने में सक्षम नहीं रह पाता, तब वह आसान शिकार की तलाश करता है। इसी कारण कई बार ऐसे बाघ जंगल छोड़कर गांवों के आसपास पहुंच जाते हैं, जहां उन्हें इंसान या पालतू जानवर आसान लक्ष्य दिखाई देते हैं।
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