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आईफोन 17 प्रो मैक्स का 'जुड़वा भाई' लगता है ये सस्ता वाला एंड्रॉयड फोन, टीज़र में सामने आए कई खास फीचर्स

इनफिनिक्स नोट 60 Pro जल्द लॉन्च होगा, और ये कई खास कलर में आएगा. लुक में ये एकदम आईफोन 17 प्रो मैक्स की तरह लग रहा है. इसमें Snapdragon 7s Gen 4 5G, 50MP Night Master Camera, 6500mAh बैटरी और सैटेलाइट कम्युनिकेशन होगा.

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रूस बोला- भारत पर हमसे तेल नहीं खरीदने का दबाव:अमेरिका एनर्जी सप्लाई पर कंट्रोल चाहता है, ताकि दुनिया के देश उनसे महंगी गैस खरीदें

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह भारत जैसे देशों पर दबाव बना रहा है ताकि वे रूस से सस्ता तेल न खरीदें। लावरोव ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई उसके कंट्रोल में रहे और देश मजबूर होकर महंगी अमेरिकी गैस खरीदें। उन्होंने यह बातें 9 फरवरी को डिप्लोमैटिक वर्कर्स डे के मौके पर कहीं। लावरोव ने कहा कि अमेरिका ने डॉलर को हथियार की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। रूस की विदेश में रखी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है और रूस के खिलाफ लगातार पाबंदियां लगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प सरकार यूक्रेन युद्ध खत्म करने की बात तो करती है, लेकिन जो प्रतिबंध पहले लगाए गए थे, वे अब भी जारी हैं। रूस के मुताबिक, यूक्रेन पर सहमति बनने के बाद भी अमेरिका नए प्रतिबंध लगाता रहा। भारत समेत BRICS देशों पर रूसी से दूरी बनाने का दबाव रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका भारत और दूसरे BRICS देशों पर दबाव डाल रहा है कि वे रूस से दूरी बनाएं। रूस की तेल कंपनियों लुकोइल और रोसनेफ्ट पर रोक लगाई गई है और रूस के व्यापार और निवेश को सीमित करने की कोशिश हो रही है। ये सब गलत और अनुचित तरीके हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया अब तेजी से बदल रही है। पहले अमेरिका पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और पैसों के सिस्टम पर हावी था और डॉलर के जरिए अपनी ताकत दिखाता था, लेकिन अब उसकी पकड़ कमजोर हो रही है। वहीं चीन, भारत और ब्राजील जैसे देश तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अफ्रीका के देश भी अब सिर्फ कच्चा माल बेचने के बजाय अपने यहां इंडस्ट्री लगाना चाहते हैं। भारत जो मुद्दे उठाता है वे आज की जरूरतें भारत की BRICS अध्यक्षता पर लावरोव ने कहा कि भारत जिन मुद्दों को आगे बढ़ा रहा है, वे आज की जरूरतों से जुड़े हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, खाने और ऊर्जा की सुरक्षा, तकनीक और AI जैसे विषय अहम हैं। उन्होंने बताया कि भारत फरवरी में AI पर एक बड़ी बैठक करने वाला है, जिसमें रूस भी शामिल होगा। रूस का कहना है कि AI को लेकर नियम ऐसे होने चाहिए, जिनमें हर देश की आजादी बनी रहे और कोई एक देश बाकी देशों पर हुक्म न चलाए। लावरोव बोले- पश्चिमी देश अपनी पकड़ नहीं छोड़ना चाहते लावरोव ने कहा कि पश्चिमी देश अपनी पुरानी पकड़ छोड़ना नहीं चाहते। ट्रम्प सरकार के आने के बाद यह और साफ हो गया है कि अमेरिका ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी दुनिया पर कंट्रोल चाहता है और अपने मुकाबले वालों को रोकने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि इन हालात का असर रूस के दूसरे देशों के साथ रिश्तों पर भी पड़ रहा है। रूस पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं। खुले समुद्र में रूसी जहाजों को रोका जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। कुछ देशों को रूसी तेल और गैस खरीदने पर टैरिफ भी देना पड़ रहा है। लावरोव ने कहा कि रूस के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि देश सुरक्षित रहे और आगे बढ़ता रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोप में कुछ नेता खुले तौर पर रूस के खिलाफ युद्ध की बात कर रहे हैं। रूस का कहना है कि उसकी सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि यूक्रेन की जमीन से उसे कोई खतरा न हो और क्रीमिया, डोनबास और नोवोरोसिया में रहने वाले रूसी और रूसी भाषा बोलने वाले लोगों की सुरक्षा उसकी जिम्मेदारी है। पश्चिमी देशों पर दूसरे देशों को उनका हक नहीं देने का आरोप BRICS को लेकर लावरोव ने कहा कि इंडोनेशिया के जुड़ने से यह समूह और मजबूत हुआ है। रूस IMF, वर्ल्ड बैंक और WTO को खत्म नहीं करना चाहता, लेकिन चाहता है कि तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं को इन संस्थानों में उनका सही हक मिले। पश्चिमी देश इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसी वजह से रूस और BRICS देश मिलकर नए रास्ते तलाश रहे हैं। इसमें अपनी-अपनी करेंसी में व्यापार करना, नए पेमेंट सिस्टम बनाना, निवेश के नए तरीके और अनाज के लिए अलग बाजार तैयार करना शामिल है। लावरोव ने साफ किया कि इसका मकसद किसी के खिलाफ जाना नहीं है, बल्कि खुद को एकतरफा दबाव से बचाना है। -------------- यह खबर भी पढ़ें… पुतिन से नजदीकी बढ़ाना चाहता था यौन अपराधी एपस्टीन:नए दस्तावेजों से खुलासा, रूस की मदद करने का ऑफर दिया था अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) के नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीब जाने की कोशिश कर रहा था। एपस्टीन ने कई मौकों पर पुतिन और उनके करीबी अधिकारियों तक पहुंच बनाने के प्रयास किए। पढ़ें पूरी खबर…

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  Sports

Jadeja vs Axar: रवींद्र जडेजा को ग्रेड-ए में एंट्री तो ऑल फॉर्मेट अक्षर को क्यों ग्रेड-C में रखा गया? क्या है ग्रेडिंग का पैमाना?

Jadeja vs Axar: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के 2025-26 के एनुअल सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सामने आते ही दिलचस्प बहस शुरू हो गई- चर्चा इसी को लेकर हो रही कि आखिर रवींद्र जडेजा को टॉप ग्रेड-ए में क्यों रखा गया जबकि टी20 टीम के उपकप्तान अक्षर पटेल को ग्रेड-सी में जगह मिली? पहली नजर में दोनों ऑलराउंडर एक जैसे लगते हैं, लेकिन टीम कॉम्बिनेशन और उपयोगिता के आधार पर बोर्ड ने अंतर साफ दिखाया है।

सबसे पहले ग्रेड-ए की बात करें तो इसमें सिर्फ तीन खिलाड़ी शामिल हैं- रवींद्र जडेजा, शुभमन गिल और जसप्रीत बुमराह। वहीं बड़े नाम रोहित शर्मा और विराट कोहली को ग्रेड-बी में डाल दिया गया है। ग्रेड ए प्लस को खत्म कर दिया गया है। यह फैसला साफ करता है कि बीसीसीआई अब भारतीय क्रिकेट में स्टारडम नहीं, बल्कि टीम के लिए खिलाड़ी की भूमिका और उपयोगिता को ज्यादा अहमियत दे रहा।

जडेजा को क्यों ग्रेड-ए में रखा गया?
जडेजा का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट उनका मल्टी-फॉर्मेट प्लेयर या असर है। उन्होंने 2024 टी20 वर्ल्ड कप के बाद टी20 इंटरनेशनल से दूरी बना ली है, लेकिन टेस्ट और वनडे में वह अभी भी टीम इंडिया की रणनीति का अहम हिस्सा हैं। यही दो फॉर्मेट भारत के लिए लंबे समय तक टीम बिल्डिंग की नींव माने जाते हैं। इसलिए एक फॉर्मेट छोड़ने के बावजूद उनकी अहमियत कम नहीं हुई है।

इसके अलावा जडेजा की सबसे बड़ी ताकत उनका थ्री-डायमेंशनल खेल है। वह मिडिल ओवर में गेंद से कंट्रोल देते हैं, जरूरत पड़ने पर निचले क्रम में बल्लेबाजी करते हैं और फील्डिंग में मैच का रुख पलटने की काबिलियत भी रखते हैं। ऐसे खिलाड़ी टीम संतुलन बनाए रखते हैं, जिससे कप्तान और कोच के लिए प्लेइंग इलेवन तय करना आसान हो जाता है।

जडेजा का हालिया प्रदर्शन भी उनके पक्ष में गया। 2025 के आखिर में गुवाहाटी टेस्ट में जब भारतीय बल्लेबाजी लड़खड़ा गई थी, तब जडेजा ने अकेले मोर्चा संभाला। गेंद और बल्ले दोनों से असर डालकर उन्होंने दिखाया कि दबाव में टीम को संभालने की क्षमता अभी भी उनके पास है।

रोहित-विराट क्यों ग्रेड-बी में हैं?
अब सवाल उठता है कि रोहित शर्मा और विराट कोहली ग्रेड-बी में हैं जबकि जडेजा ग्रेड-ए में। दरअसल बीसीसीआई ने ए+ कैटेगरी खत्म कर टॉप टियर को छोटा और ज्यादा भार सहने वाला बनाया है। यानी ऐसे खिलाड़ी जो टीम बैलेंस तय करते हैं और जिनकी जगह भरना मुश्किल है, उन्हें तरजीह दी गई है। 

अक्षर पटेल को क्यों ग्रेड-सी में रखा गया?
अक्षर पटेल की बात करें तो वह भी ऑलराउंडर हैं लेकिन उन्हें हर फॉर्मेट में ऑटोमैटिक स्टार्ट (प्लेइंग-11 में पहली पसंद का खिलाड़ी) नहीं माना गया। हाल के रिकॉर्ड देखें तो उनका आखिरी वनडे अक्टूबर 2025 और आखिरी टेस्ट नवंबर 2025 में था। इससे संकेत मिलता है कि वह टीम में रोटेशन या जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल हो रहे हैं, जबकि जडेजा ज्यादातर प्लेइंग इलेवन का स्थायी हिस्सा रहे।

बीसीसीआई ने कोई फॉर्मल ग्रेडिंग फॉर्मूला नहीं दिया है, इसलिए सबसे साफ मतलब लिस्ट में ही स्क्वाड बनाने के सिग्नल से ही पता चलता है। 2025-26 में, ग्रेड C में ऐसे खिलाड़ी हैं जो या तो रेगुलर प्लेइंग-11 का हिस्सा नहीं रहते हैं या फॉर्मेट-स्पेसिफिक/रोटेशन ऑप्शन हैं जबकि टॉप टियर में ऑटोमैटिक स्टार्टर्स होते हैं जो सभी फॉर्मेट में टीम बैलेंस बनाते हैं।

कुल मिलाकर बीसीसीआई का यह फैसला खिलाड़ियों की लोकप्रियता से ज्यादा टीम की जरूरत और संतुलन पर आधारित है। जडेजा अभी भी टीम इंडिया के लिए ऑल-वेदर सॉल्यूशन हैं, इसलिए उन्हें ग्रेड-ए में बरकरार रखा गया है जबकि अक्षर पटेल तीनों फॉर्मेट में खेलने के बावजूद ग्रेड-सी में रखे गए।

Tue, 10 Feb 2026 17:11:17 +0530

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