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Prabhasakshi NewsRoom: Riyadh पर लगातार हो रहे Missile Attacks को रोकने में विफल रहा Mecca Pact, अब Trump ने Houthis के खिलाफ जंग में उतरने के दिए संकेत!

सऊदी अरब की राजधानी रियाद में लगातार हो रहे मिसाइल हमलों ने पूरे मध्य पूर्व को एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां एक क्षेत्रीय संघर्ष के कई देशों के बीच व्यापक युद्ध में बदलने की आशंका बढ़ रही है। दस अक्टूबर को रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए भीषण हमले में तेरह लोगों की मौत हुई और तीन सौ से अधिक लोग घायल हुए। मृतकों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। इसके ठीक अगले दिन, ग्यारह अक्टूबर को, हवाई अड्डे पर फिर हमला हुआ, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और ग्यारह लोगों के घायल होने की खबर सामने आई। इस बीच, यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों और हवाई क्षेत्र को लेकर दोबारा चेतावनी जारी कर दी है।

देखा जाये तो सवाल अब केवल रियाद की सुरक्षा का नहीं है। सवाल यह है कि क्या हूती विद्रोही सऊदी अरब की सैन्य ताकत और उसकी आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों को लगातार चुनौती देने की स्थिति में पहुंच चुके हैं? क्या अमेरिका इस संघर्ष में सीधे उतर सकता है? और क्या सऊदी अरब, पाकिस्तान तथा तुर्किये के बीच हुआ मक्का संयुक्त रक्षा समझौता अब वास्तविक सैन्य कार्रवाई का आधार बनने जा रहा है?

इसे भी पढ़ें: Houthi Missile Attack on Riyadh | CCTV फुटेज में कैद रियाद एयरपोर्ट पर हूथी मिसाइल हमला, 13 की मौत और 300 से ज्यादा घायल

हम आपको बता दें कि रियाद में दस अक्टूबर को हुए हमले के दृश्य सामने आने के बाद दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। हवाई अड्डे के भीतर यात्री मौजूद थे और कुछ लोग धार्मिक यात्रा के लिए रवाना होने की तैयारी कर रहे थे, तभी मिसाइल हमले से अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती आधिकारिक आंकड़ों में बारह लोगों की मौत बताई गई थी, लेकिन बाद में एक भारतीय नागरिक की मृत्यु के बाद यह संख्या तेरह हो गई। तीन सौ से अधिक लोग घायल हुए। इसके बाद रविवार को हवाई अड्डे के चौथे यात्री टर्मिनल पर एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र गिरने से आग लग गई। इस दूसरे हमले में एक व्यक्ति की मौत और ग्यारह लोगों के घायल होने की सूचना दी गई।

यानी दो दिनों में रियाद के हवाई अड्डे पर हमलों से जुड़ी मृतकों की संख्या कम से कम चौदह तक पहुंच गई है। हालांकि, पूरे सप्ताह के दौरान हवाई अड्डे पर हुए हमलों में मरने वालों की संख्या अठारह बताई गई है। इन आंकड़ों को अलग-अलग घटनाओं के संदर्भ में समझना जरूरी है।

देखा जाये तो खतरा केवल रियाद तक सीमित नहीं रहा। सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र में स्थित दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी निशाना बनाए जाने की खबर आई। सऊदी अधिकारियों ने वहां नुकसान का आकलन और सुरक्षा जांच शुरू की है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के अनुसार, रियाद के आसपास एक क्रूज मिसाइल को रोक लिया गया, पूर्वी प्रांत में एक मानवरहित विमान को नष्ट किया गया और खमीस मुशैत की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को भी रोक लिया गया। इससे साफ है कि सऊदी अरब के लिए खतरा एक अकेले हमले से कहीं अधिक व्यापक हो चुका है।

हम आपको बता दें कि यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों और हवाई क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी दोहराई है। संगठन ने दावा किया कि उसने रियाद के अलावा दम्माम के हवाई अड्डे और सऊदी तेल कंपनी अरामको की दो सुविधाओं को भी निशाना बनाया है। हूती नेतृत्व ने यह भी चेताया कि यदि यमन में सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई जारी रही, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

दूसरी तरफ, सऊदी अरब ने यमन में हूतियों के विरुद्ध हवाई हमले तेज किए हैं और हूतियों से लड़ रही यमन की सरकार समर्थक सेनाओं को समर्थन दिया है। हूती नेतृत्व का दावा है कि सऊदी अरब ने चौबीस घंटे में यमन पर एक सौ चौबीस हवाई हमले किए। देखा जाये तो दोनों पक्षों की बढ़ती सैन्य कार्रवाई यह संकेत दे रही है कि संघर्ष अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है।

खास बात यह भी है कि हूतियों को केवल यमन के भीतर सक्रिय एक विद्रोही संगठन समझना अब पर्याप्त नहीं होगा। उनके पास मिसाइलों, मानवरहित विमानों और अन्य हथियारों का ऐसा भंडार है, जिसके सहारे वे अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों से दूर स्थित ठिकानों को भी निशाना बनाने का दावा करते रहे हैं। लाल सागर के आसपास उनकी रणनीतिक स्थिति और समुद्री मार्गों को बाधित करने की क्षमता भी उन्हें क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनाती है।

उधर, सऊदी अरब के पास आधुनिक लड़ाकू विमान और वायु रक्षा प्रणालियां हैं, लेकिन लगातार होने वाले हमले यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि क्या हर मिसाइल और मानवरहित विमान को रोक पाना संभव है। किसी हमले का लक्ष्य भेद देना और किसी देश की सैन्य ताकत को पूरी तरह पराजित कर देना दो अलग बातें हैं। हूतियों की ताकत का आकलन इसी अंतर को ध्यान में रखकर करना होगा। मौजूदा घटनाक्रम यह जरूर दिखाता है कि वे सऊदी अरब पर सुरक्षा और आर्थिक दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं।

यहाँ सवाल उठता है कि क्या अमेरिका भी सऊदी अरब के साथ युद्ध में उतरेगा? देखा जाये तो यह इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम सवाल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि अमेरिका हूतियों के विरुद्ध सऊदी अरब के हमलों में शामिल होने पर विचार कर रहा है। इसका अर्थ यह है कि अमेरिकी सैन्य भागीदारी की संभावना पर चर्चा हो रही है, लेकिन इसे सीधे युद्ध में उतरने का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

यदि अमेरिका सीधे हमलों में शामिल होता है, तो हूतियों के विरुद्ध सैन्य दबाव बढ़ सकता है। लेकिन इससे ईरान और अमेरिका के बीच पहले से जारी व्यापक संघर्ष के और फैलने का जोखिम भी पैदा होगा। हूतियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिकी भागीदारी की संभावना सामने आई है, पर उसके स्वरूप, समय और सीमा को लेकर कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ मिलकर हूतियों पर हमले शुरू करने का फैसला कर लिया है।

दूसरी ओर, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच सात अगस्त को मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसकी प्रमुख व्यवस्था यह है कि तीन देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला अन्य देशों के विरुद्ध हमला माना जाएगा। इसका उद्देश्य साझा सुरक्षा और सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना है।

इस समझौते का महत्व अब बढ़ गया है, क्योंकि सऊदी अरब पर लगातार हमले हो रहे हैं। पाकिस्तान और तुर्किये की सैन्य, खुफिया, तकनीकी अथवा अन्य रक्षा सहायता सऊदी अरब की स्थिति मजबूत कर सकती है। लेकिन समझौते का होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि दोनों देश हूतियों के विरुद्ध सीधे युद्ध में सैनिक भेज चुके हैं। तुर्किये की संभावित सैन्य तैनाती को लेकर संसदीय अनुमोदन जैसे सवाल भी सामने हैं और वास्तविक सैन्य भूमिका पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। वहीं पाकिस्तान भी गोलमोल बातें कर सऊदी अरब की धड़कन बढ़ा रहा है। इसलिए मक्का समझौते का असर फिलहाल सामरिक सहयोग और सामूहिक प्रतिरोध की दिशा में दिखाई देता है। अभी तत्काल संयुक्त सैन्य अभियान की घोषणा नहीं की गई है।

एक सवाल यह भी है कि क्या दुनिया एक नए महायुद्ध की ओर बढ़ रही है? देखा जाये तो रियाद और दम्माम पर हमलों, यमन में तेज होती जवाबी कार्रवाई, अमेरिकी भागीदारी की संभावना और मक्का रक्षा समझौते के सक्रिय होने की चर्चा ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है। रियाद का हवाई अड्डा बंद रहा और राजधानी के विद्यालयों में कुछ दिनों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था की गई। विमानन सुरक्षा को लेकर विदेशी अधिकारियों ने भी सावधानी बरतने की सलाह दी। इन घटनाओं का असर नागरिकों की आवाजाही, हवाई यातायात और क्षेत्रीय कारोबार पर पड़ रहा है। अभी वास्तविक खतरा यह है कि यदि सऊदी अरब की जवाबी कार्रवाई तेज होती है, अमेरिका सीधे युद्ध में उतरता है और ईरान भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाता है, तो संघर्ष कई देशों तक फैल सकता है।

बहरहाल, फिलहाल मध्य पूर्व एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। रियाद पर लगातार हमले सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती हैं, जबकि मक्का समझौता क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका का अंतिम फैसला, पाकिस्तान और तुर्किये की वास्तविक सैन्य भूमिका, तथा हूतियों और सऊदी अरब के बीच हमलों का अगला दौर सबसे महत्वपूर्ण संकेत होंगे।  युद्ध का दायरा कितना बढ़ेगा, इसका फैसला केवल मिसाइलों से नहीं, बल्कि इन देशों के अगले राजनीतिक और सैन्य कदमों से होगा।

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Sunny Deol का नया और खूंखार लुक आया सामने! क्राइम थ्रिलर फिल्म Suryaa: Ant Se Aarambh Tak इस दिन होगी रिलीज

बॉलीवुड के 'एक्शन किंग' सनी देओल (Sunny Deol) अपनी आने वाली बहुप्रतीक्षित क्राइम थ्रिलर फिल्म 'सूर्या: अंत से आरंभ तक' (Surya: Ant Se Arambh Tak) के साथ एक बार फिर बड़े पर्दे पर तहलका मचाने के लिए तैयार हैं। मेकर्स ने फिल्म का पहला लुक और एक दमदार मोशन पोस्टर जारी कर दिया है, जिसमें सनी देओल का बेहद रफ, इंटेंस और खतरनाक अंदाज नजर आ रहा है। यह फिल्म आगामी 20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह फिल्म 20 नवंबर को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।

पोस्टर की टैगलाइन, "अपने अतीत और वर्तमान के बीच फँसे हुए, वे सच का पता लगाते हैं," एक ऐसी कहानी की ओर इशारा करती है जो दबे हुए राज़ और अनसुलझे सवालों पर आधारित है। देओल का रफ लुक फिल्म के गंभीर माहौल को और बढ़ाता है, जो एक्टर के लिए एक और ज़बरदस्त रोल साबित होगा।

'सूर्या: अंत से आरंभ तक' (जिसका मतलब है 'अंत से शुरुआत तक') का निर्देशन मलयालम फिल्ममेकर एम. पद्मकुमार ने किया है, जो उनकी बॉलीवुड डेब्यू फिल्म है। यह फिल्म 2018 की समीक्षकों द्वारा सराही गई मलयालम थ्रिलर 'जोसेफ' का हिंदी अडैप्टेशन है, जिसे शाही कबीर ने लिखा था।

खबरों के अनुसार, देओल एक रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर का रोल निभा रहे हैं जो एक ऐसी जांच में फंस जाते हैं, जिसके कारण उन्हें अपराध और अपने अतीत के राज़ों के जाल का सामना करना पड़ता है। फिल्म न्याय, नैतिक संघर्ष और अनसुलझे सच के नतीजों जैसे विषयों को दिखाती है।

फिल्म की स्टार कास्ट में रवि किशन, प्रज्ञा जायसवाल, जिस्शु सेनगुप्ता, टीनू आनंद, मनीष वाधवा और तनुश्री चक्रवर्ती के साथ-साथ रोहित तिवारी और अनूप त्रिवेदी भी शामिल हैं।

एम. पद्मकुमार द्वारा निर्देशित और कमल मुकुट द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म को MM मूवीज़ बैनर के तहत दीपक मुकुट, हेमंत मुकुट और लोकेश मुकुट ने प्रोड्यूस किया है। ज़ी म्यूज़िक कंपनी इसके म्यूज़िक से जुड़ी है।

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  Sports

3rd T20 में Abhishek Sharma के 69 रन, भारत ने West Indies को 14 रन से हराया

 भारत के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने यहां तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में भारत की 14 रन से जीत के बाद कहा कि वेस्टइंडीज ने उनके लिए रणनीति बनाई थी लेकिन उन्होंने उसका तोड़ ढूंढ लिया है और इसलिए वह बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहे। अभिषेक ने 30 गेंद पर 69 रन बनाए। उनकी इस शानदार पारी, ईशान किशन (37) के साथ दूसरे विकेट के लिए 108 रन की साझेदारी और अर्शदीप सिंह (44 रन देकर तीन विकेट) की शानदार गेंदबाजी की मदद से भारत ने पांच मैचों की श्रृंखला में 2-1 की बढ़त हासिल कर ली। अभिषेक ने कहा कि वेस्टइंडीज ने ऑफ स्पिनर रोस्टन चेज से गेंदबाजी की शुरुआत करवाकर और ऑफ साइड में अधिक क्षेत्ररक्षक लगाकर उन्हें रन बनाने के अधिक विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया। 

उन्होंने मैच के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं यह नहीं कहूंगा कि उन्होंने जानबूझकर ऐसा किया लेकिन मुझे लगता है कि उन्होंने मेरे लिए रणनीति तैयार की थी। ऑफ स्पिनर मेरे सामने था और यह उसके और मेरे बीच की जंग थी। उसने इस श्रृंखला में अच्छी गेंदबाजी की है और इसलिए मैंने पहले ओवर में उसे सम्मान दिया। यह रणनीति मेरे लिए भी कारगर साबित हुई।’’ अभिषेक ने कहा, ‘‘मैं पावरप्ले में कुछ रन बनाना चाहता था। 

अगर उन्होंने मेरे लिए रणनीति तैयार की थी तो मैं उससे बेहतर प्रदर्शन करना चाहता था।’’ वेस्टइंडीज ने भारत को 223 रन पर आउट कर दिया था लेकिन इसके जवाब में उसकी टीम सात विकेट पर 209 रन नहीं बनी पाई। अभिषेक ने कहा, ‘‘वेस्टइंडीज एक ऐसी टीम है जिसके खिलाफ आप कभी यह नहीं कह सकते कि मैच अब हमारे पक्ष में है। यह बात हमारे दिमाग में थी। हमने पिछले मैच में देखा था कि उसने किस तरह से परिस्थितियों का फायदा उठाया था। 

हम जानते थे कि अगर उसका कोई बल्लेबाज टिक जाता है तो वह अपनी टीम को लक्ष्य तक पहुंचा सकता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब हमारे विकेट गिर रहे थे तब भी हमारे मन में यही बात थी। हम यही सोच रहे थे कि हम इसके बाद निर्मम रवैया अपनाएंगे और उन्हें वापसी का कोई मौका नहीं देंगे।’’ गेंदबाजों के खिलाफ तैयारी के महत्व को दोहराते हुए अभिषेक ने कहा कि उनकी भूमिका पावरप्ले का अधिक से अधिक फायदा उठाना है।

 उन्होंने कहा, ‘‘तैयारी बहुत महत्व रखती है। अगर मुझे पावरप्ले का फायदा उठाना है तो इसके लिए तैयारी काफी मायने रखती है। मैं विपक्षी टीम और गेंदबाजों को ध्यान में रखकर तैयारी करता हूं। मैं इस बात पर विशेष ध्यान देता हूं कि कौन सा गेंदबाज मेरे खिलाफ क्या रणनीति बनाएगा और मुझे उसके खिलाफ अपनी रणनीति को कैसे अंजाम देना है।

Mon, 12 Oct 2026 14:26:00 +0530

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