सितंबर में इक्विटी फंड्स में आया 30 प्रतिशत से ज्यादा निवेश, इंडस्ट्री एयूएम बढ़कर 82.64 लाख करोड़ रुपए हुआ: एएमएफआई
मुंबई, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में सितंबर के दौरान इक्विटी योजनाओं में निवेश में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। एम्फी यानी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में इक्विटी फंड्स में 38,306.55 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया, जो अगस्त की तुलना में 30.61 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान म्यूचुअल फंड उद्योग की कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर 82.64 लाख करोड़ रुपए हो गई।
एएमएफआई के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम्स में 74,831.96 करोड़ रुपए का निवेश आया, जबकि 36,525.41 करोड़ रुपए की निकासी दर्ज की गई।
इक्विटी योजनाओं के तहत कुल नेट एयूएम 37.54 लाख करोड़ रुपए रही, जबकि महीने के दौरान औसत एयूएम 38,50,660.61 करोड़ रुपए दर्ज की गई।
श्रेणीवार आंकड़ों में स्मॉल कैप फंड्स सबसे आगे रहे, जिसमें 9,038.57 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया। स्मॉल कैप फंड्स में कुल 13,025.13 करोड़ रुपए का निवेश हुआ और 3,986.56 करोड़ रुपए की निकासी हुई। इस श्रेणी में निवेशकों के 3.03 करोड़ फोलियो दर्ज किए गए।
इसके अलावा मिड कैप फंड्स में 7,834.84 करोड़ रुपए, फ्लेक्सी कैप फंड्स में 6,701.80 करोड़ रुपए, लार्ज एंड मिड कैप फंड्स में 4,271.22 करोड़ रुपए और मल्टी कैप फंड्स में 3,859.55 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया।
थीमैटिक फंड्स में 1,800.07 करोड़ रुपए, सेक्टोरल फंड्स में 1,840.02 करोड़ रुपए, फोकस्ड फंड्स में 1,390.84 करोड़ रुपए, वैल्यू फंड्स में 1,290.89 करोड़ रुपए और लार्ज कैप फंड्स में 859.47 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया।
हालांकि, कॉन्ट्रा फंड्स से 97.88 करोड़ रुपए और ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड्स से 662.14 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी दर्ज की गई।
पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग की बात करें तो सितंबर में कुल मिलाकर 1,33,375.57 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी रही। इसका मुख्य कारण डेट फंड्स से 1,83,155.76 करोड़ रुपए का भारी आउटफ्लो रहा।
इस बीच, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। सितंबर में ईटीएफ श्रेणी में 15,501.40 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया। इसमें इक्विटी ईटीएफ सबसे आगे रहे, जहां 9,959.96 करोड़ रुपए का निवेश हुआ। इसके बाद गोल्ड ईटीएफ में 4,450.61 करोड़ रुपए और सिल्वर ईटीएफ में 1,974.32 करोड़ रुपए का निवेश दर्ज किया गया।
गौरतलब है कि अगस्त में इक्विटी फंड्स में 29,328.62 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश आया था, जो जुलाई की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक था। उस समय उद्योग का कुल एयूएम 87.08 लाख करोड़ रुपए था।
--आईएएनएस
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दुनिया में बदल रहे व्यापार और निवेश के समीकरण, भारत के सामने खुलेंगे नए आर्थिक अवसर
वैश्विक स्तर पर पूंजी प्रवाह में बदलाव, भू-राजनीतिक आधार पर बंटते व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत विकास की बाधाओं को पीछे छोड़ते हुए बहुध्रुवीय दुनिया में एक प्रमुख आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है. सोमवार को जारी ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में पूंजी प्रवाह, व्यापारिक रिश्तों और उद्योगों की संरचना तेजी से बदल रही है. एआई क्रांति शुरू हो चुकी है, मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का विस्तार नए निर्यात अवसर पैदा कर रहा है और शहरीकरण की गति लगातार बढ़ रही है. ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के मुख्य अर्थशास्त्री टॉम ऑर्लिक ने कहा कि इन सभी बदलावों के बीच भारत विकास में मौजूद कई बाधाओं को कम करते हुए वैश्विक व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत का विस्तार होता मुक्त व्यापार नेटवर्क 2035 तक देश की जीडीपी में 140 अरब डॉलर से 170 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान दे सकता है. विनिर्माण लागत कम करने और कृषि क्षेत्र से श्रमिकों को अधिक उत्पादक क्षेत्रों में स्थानांतरित करने जैसे घरेलू सुधार इन लाभों को और बढ़ा सकते हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक पूंजी प्रवाह अब पहले की तुलना में अधिक केंद्रित और राजनीतिक होता जा रहा है. प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच पूंजी निवेश मित्र देशों की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत कम है, जबकि निवेश का बड़ा हिस्सा एआई और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है. भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र की मजबूत मांग और विभिन्न देशों द्वारा दिए जा रहे निवेश प्रोत्साहनों के बीच वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने की अपनी गति बनाए रखे.
रिपोर्ट के मुताबिक, एआई भारत की आर्थिक वृद्धि दर में हर साल 0.9 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी कर सकता है. इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है. हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बुनियादी ढांचे की सीमाएं एआई से मिलने वाले लाभ को कुछ हद तक सीमित कर सकती हैं. विशेष रूप से भारत का आईटी सेवा क्षेत्र अवसरों और चुनौतियों दोनों का सामना करेगा. एआई जहां कंपनियों को उच्च मूल्य वाली सेवाओं की ओर ले जा सकता है, वहीं स्वचालन कम लागत वाले श्रम आधारित मॉडल को चुनौती भी दे सकता है. रिपोर्ट में भारत के शहरीकरण को भी एक बड़ी ताकत बताया गया है. इसके अनुसार, करीब 82 करोड़ भारतीय शहरी वातावरण में रहते हैं. यदि नगर प्रशासन, बुनियादी ढांचे और भूमि उपयोग योजना को और मजबूत किया जाता है, तो यह शहरी आबादी उत्पादकता वृद्धि का एक बड़ा स्रोत बन सकती है.
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