Mangala Gauri 2026: आज सावन के पहले मंगलवार पर रखें मंगला गौरी व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और महत्व
Mangala Gauri 2026: सावन मास का प्रत्येक मंगलवार माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। आज के दिन मंगला गौरी व्रत रखा जाता है, जिसे कई स्थानों पर मोराकत व्रत के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के प्रभाव से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। वर्ष 2026 में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त, आज मंगलवार को रखा जाएगा।
मंगला गौरी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:48 बजे से 5:32 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:10 बजे से 6:16 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:19 बजे से 1:10 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:54 बजे से 3:46 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 7:13 बजे से 7:35 बजे तक
मंगला गौरी व्रत पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ और शुभ रंग (लाल, पीला, हरा या गुलाबी) के वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को साफ करके माता गौरी की प्रतिमा या चित्र को लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें।
- व्रत का संकल्प लें और माता गौरी से सुख, सौभाग्य, संतान एवं परिवार की मंगलकामना करें।
- आचमन और मार्जन के बाद माता को रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
- आटे का दीपक बनाकर उसमें 16 बत्तियां जलाएं।
- माता को 16 लड्डू, 16 फल, 16 पान, 16 लौंग, 16 इलायची तथा सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
- श्रद्धा के साथ मंगला गौरी यंत्र स्थापित कर पंचोपचार विधि से पूजन करें।
- पूजन के बाद मंगला गौरी व्रत कथा का श्रवण करें और अंत में माता की आरती करें।
- पूजा पूर्ण होने पर सामर्थ्य के अनुसार दान-दक्षिणा दें और प्रसाद वितरित करें।
मंगला गौरी व्रत का महत्व
धार्मिक परंपरा के अनुसार, नवविवाहिता महिलाओं के लिए इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि प्रथम सावन में यह व्रत मायके में तथा अगले वर्षों में ससुराल में किया जाता है। नियमित रूप से पांच वर्षों तक यह व्रत करने के बाद अंतिम वर्ष उद्यापन की परंपरा भी प्रचलित है।
ऐसी मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत से अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और परिवार की समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन लोगों के विवाह में विलंब हो रहा हो या कुंडली में मंगल से जुड़े दोष माने जाते हों, वे भी इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करते हैं। श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा मन को सकारात्मकता प्रदान करती है तथा परिवार में सुख-शांति और मंगल की भावना को मजबूत करती है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सिर्फ धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। हरिभूमि.कॉम इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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