ताप बिजलीघरों में Coal Stock घटने की गति थमी, 1.8 करोड़ टन से ऊपर बना भंडार
सरकार ने सोमवार को कहा कि देश के ताप बिजलीघरों में कोयले का भंडार घटने की रफ्तार इस महीने काफी धीमी हुई है। 29 सितंबर से कोयले का भंडार 1.8 करोड़ टन से ऊपर बना हुआ है। कोयला भंडार 29 सितंबर को 1.8932 करोड़ टन था, जो 10 अक्टूबर को घटकर 1.8205 करोड़ टन रह गया।
यह महत्वपूर्ण बात है, क्योंकि सितंबर में बिजलीघरों में कोयले का भंडार घटकर निचले स्तर पर आ गया था। कोयला मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘भंडार में स्थिरता से पता चलता है कि बिजलीघरों में कोयले की आपूर्ति उनकी दैनिक खपत के अनुरूप बनी हुई है। कम भंडार वाले बिजलीघरों में आपूर्ति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
साथ ही, जरूरत के आधार पर कम भंडार वाले बिजलीघरों को कोयले का पुनर्वितरण किया जा रहा है, ताकि पर्याप्त आपूर्ति तथा निर्बाध बिजली उत्पादन सुनिश्चित हो सके।’’ मंत्रालय ने कहा कि अधिक मालगाड़ियों में कोयला लादे जाने के कारण चालू महीने में घरेलू बिजलीघरों में कोयले का भंडार घटने की रफ्तार काफी धीमी हुई है। बयान के अनुसार, ‘‘सितंबर में पूरे महीने कोयले का भंडार करीब 72.8 लाख टन घटा था। इस दौरान औसतन प्रतिदिन करीब 2.4 लाख टन की कमी आई।’’ मंत्रालय ने बताया कि अक्टूबर के पहले 10 दिन में कोयले का भंडार कुल मिलाकर केवल करीब 5.6 लाख टन घटा।
इस दौरान प्रतिदिन औसतन करीब 60,000 टन की कमी आई। बयान के अनुसार, मालगाड़ियों में कोयला लादने की संख्या बढ़ने से स्थिति में सुधार हुआ है। इस वर्ष एक से 10 अक्टूबर के दौरान बिजली क्षेत्र के लिए प्रतिदिन औसतन 469 रैक (मालगाड़ियों के डिब्बे) में कोयला लादा गया, जबकि सितंबर 2026 में यह औसत 426 रैक था।
इस तरह इसमें करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अक्टूबर में प्रतिदिन औसतन 447 से 482 रैक के बीच कोयला लादा गया। इसके परिणामस्वरूप, अक्टूबर में बिजली क्षेत्र को प्रतिदिन औसतन 24.9 लाख टन कोयले की वास्तविक आपूर्ति हुई, जबकि सितंबर में यह 22.1 लाख टन प्रतिदिन थी।
मंत्रालय ने कहा कि चालू महीने में 10 अक्टूबर तक कोयले की वास्तविक आपूर्ति 23.7 लाख टन प्रतिदिन की निर्धारित योजना से अधिक रही। 10 में से नौ दिन आपूर्ति निर्धारित लक्ष्य से ऊपर रही। कोयला मंत्रालय पर्याप्त कोयला भंडार बनाए रखने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल), सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल), रेल मंत्रालय और बिजली कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि कोयले की निकासी तथा आपूर्ति लगातार बनी रहे।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘कोयले की उचित आवाजाही सुनिश्चित करने में भारतीय रेलवे के लगातार सहयोग और पेशेवर प्रतिबद्धता को कोयला मंत्रालय उचित रूप से स्वीकार करता है और उसकी सराहना करता है।’’ घरेलू कोयला उत्पादन में कोल इंडिया की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक है।
CBI की FIR बरकरार, CM मान के OSD की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आदेश दिया कि सीनियर अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के सिलसिले में पंजाब सरकार से जुड़े लोगों के खिलाफ CBI कोई सख्त कार्रवाई न करे। यह आदेश राज्य सरकार की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें हाई कोर्ट के उस निर्देश को चुनौती दी गई थी जिसमें एजेंसी से आरोपों की जांच करने और दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था। जस्टिस एमएम सुंदरेश और पीबी वराले की बेंच ने केंद्र, CBI, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य को नोटिस जारी किया। अपने आदेश को स्पष्ट करते हुए बेंच ने कहा हम FIR पर रोक नहीं लगा रहे हैं। हम कह रहे हैं कि कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। पंजाब सरकार की ओर से सीनियर वकील विकास सिंह और सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए। पिछले सोमवार को, पंजाब सरकार ने वकील निखिल सराफ़ की याचिका पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का रुख़ किया। इन आरोपों में ट्रांसफर के लिए पैसे का लेन-देन और फ़ायदेमंद नीतियां बनवाने के लिए पैसे का इस्तेमाल शामिल है।
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याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से आम आदमी पार्टी सरकार को सूचना भेजे जाने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह तर्क दिया गया कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच ज़रूरी है क्योंकि इनसे राज्य सरकार के कामकाज पर गंभीर सवाल उठते हैं। हाई कोर्ट ने पंजाब पुलिस और राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि वे इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज़ CBI को सौंप दें। कई आधारों पर उस आदेश को चुनौती देते हुए, पंजाब सरकार ने कहा कि फ़ैसले में कुछ गलतियाँ थीं; जैसे कि 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' की धारा 66(2) के तहत शेयर की गई जानकारी को ऐसा निर्देश मान लेना जिससे केस दर्ज करना अनिवार्य हो जाता है। सरकार का कहना था कि यह सुप्रीम कोर्ट के 2022 के विजय मदनलाल चौधरी केस वाले फ़ैसले के ख़िलाफ़ था।
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