नेपाल में गंडक नदी में बाढ़ से बिहार में अलर्ट:लखनऊ में सड़कों पर चल रहीं नावें, हरियाणा के 6 जिलों में बारिश
लखनऊ 13 दिनों से बाढ़ की चपेट में है। 3 लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित है। सबसे भयावह स्थिति फैजुल्लागंज में है। यहां 40-50 हजार से ज्यादा घर आधे से अधिक गोमती नदी के पानी में डूबे हैं। सड़कों पर नाव चल रही हैं। घरों के बाहर खड़ी कारें और बाइकें पानी में डूबी हैं। नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। इसके चलते बिहार में भारत-नेपाल सीमा के आसपास और गंडक नदी के किनारे स्थित इलाकों के प्रशासन को अलर्ट रहने को कहा गया है। हरियाणा में रविवार को मौसम बदल गया। सुबह फतेहाबाद और कैथल में बारिश हुई, जबकि दोपहर बाद अंबाला, करनाल और पंचकूला में तेज बारिश हुई। अंबाला, करनाल, यमुनानगर और कैथल की मंडियों में रखा धान बारिश से भीग गया। हिमाचल में ऊंची चोटियों पर बर्फबारी से शुरू हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को मैदानी क्षेत्रों में बारिश हो सकती है। इसके बाद 13 और 14 अक्टूबर को वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव होने से प्रदेश के कई हिस्सों में वर्षा होने के आसार हैं। उत्तराखंड के रुड़की में रविवार को भी मौसम बदला और दोपहर में झमाझम बारिश हुई। बर्फबारी के कारण चारधाम समेत ऊंचाई वाले तीर्थस्थलों पर ठंड बढ़ गई है। रविवार सुबह गंगोत्री और आदि कैलाश में न्यूनतम तापमान -8°C दर्ज किया गया सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति देशभर से मौसम की तस्वीरें…
फिजिकल हेल्थ- कार्डिएक अरेस्ट से नाना पाटेकर की मृत्यु:इतना ही खतरनाक ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम’, जानें इसके लक्षण, बचाव व सावधानियां
हाल ही में अभिनेता नाना पाटेकर की कार्डिएक अरेस्ट से मौत हो गई। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हार्ट अचानक ब्लड पंप करना बंद कर देता है। इससे ब्रेन और शरीर के दूसरे हिस्सों तक ब्लड और ऑक्सीजन पहुंचना रुक जाता है। ‘वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन’ (WHF) के मुताबिक, भारत में हर साल हार्ट डिजीज की वजह से करीब 28 लाख लोगों की मौत होती है। लेकिन हार्ट से जुड़ी हर समस्या हार्ट अटैक या कार्डिएक अरेस्ट नहीं होती। कुछ स्थितियां ऐसी भी हैं, जिनके बारे में लोग कम जानते हैं। इनमें से एक ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम’ है। नाम सुनकर लगता है कि यह सिंड्रोम दिल टूटने से जुड़ा होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल तेज भावनात्मक सदमे (सीवियर इमोशनल शॉक) या फिजिकल स्ट्रेस के बाद हार्ट मसल्स अचानक कमजोर पड़ जाती हैं। इसके लक्षण हार्ट अटैक जैसे हो सकते हैं। ऐसे में इस बारे में जानना जरूरी है। इसलिए आज ‘फिजिकल हेल्थ’ में ‘ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम’ की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. समीर कुब्बा, डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम क्या है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम का हार्ट पर क्या प्रभाव पड़ता है? जवाब- इसमें हार्ट का लेफ्ट वेंट्रिकल ठीक से ब्लड पंप नहीं कर पाता। इससे इसकी पंपिंग क्षमता घट सकती है। गंभीर मामलों में इसके कारण हार्ट फेलियर, अनियमित धड़कन या ब्लड क्लॉट बनने जैसे कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं। सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम क्यों होता है? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- सवाल- क्या रोजमर्रा की जिंदगी का तनाव भी ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम का कारण बन सकता है? जवाब- आमतौर पर यह स्थिति अचानक होने वाले तेज भावनात्मक या शारीरिक तनाव के बाद देखी जाती है। नौकरी का दबाव, आर्थिक परेशानी या पारिवारिक विवाद जैसी स्थितियां तनाव बढ़ा सकती हैं। हालांकि, डेली तनाव में रहने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को यह सिंड्रोम होगा। इसके पीछे की सटीक प्रक्रिया और रिस्क फैक्टर्स पर अभी रिसर्च जारी है। सवाल- क्या खुशखबरी मिलने से भी ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम हो सकता है? जवाब- हां, बहुत ज्यादा खुशी या उत्साह से जुड़ी घटनाएं भी ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को ट्रिगर कर सकती हैं। इसे ‘हैप्पी हार्ट सिंड्रोम’ कहते हैं। सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम के शुरुआती लक्षण क्या हैं? जवाब- ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के शुरुआती लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए- सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम और हार्ट अटैक में क्या अंतर है? जवाब- ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम और हार्ट अटैक में मुख्य अंतर इनके कारणों का है। ग्राफिक में दोनों के बीच का अंतर देखिए- सवाल- ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं? जवाब- ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका रिस्क ज्यादा होता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- सीने में दर्द हो तो क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए? जवाब- इसे गैस या तनाव समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में कुछ बातों का ध्यान रखें, ग्राफिक में देखिए- सवाल- डॉक्टर ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम की पहचान कैसे करते हैं? जवाब- इसके लिए डॉक्टर मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच के बाद कुछ टेस्ट कराते हैं, ताकि हार्ट मसल्स की कार्यक्षमता और उसकी ब्लड पंप करने की क्षमता का पता लगाया जा सके। ब्लड टेस्ट हार्ट मसल्स को नुकसान पहुंचने पर ब्लड में रिलीज होने वाले खास एंजाइम और प्रोटीन, जैसे ट्रोपोनिन की जांच की जाती है। ECG हार्ट बीट और उसकी इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में होने वाले बदलावों का पता लगाया जाता है। इकोकार्डियोग्राफी अल्ट्रासाउंड की मदद से हार्ट की पंपिंग क्षमता और उसकी मसल्स की एक्टिविटी देखी जाती है। कोरोनरी एंजियोग्राफी हार्ट की आर्टरीज में रुकावट का पता लगाया जाता है। इससे हार्ट अटैक और ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के बीच अंतर समझने में मदद मिलती है। चेस्ट एक्स-रे या कार्डियक MRI जरूरत पड़ने पर हार्ट की बनावट और दूसरी संभावित समस्याओं की जांच की जाती है। इन टेस्ट के आधार पर डॉक्टर बीमारी की पहचान करते हैं। चूंकि इसके लक्षण हार्ट अटैक जैसे हो सकते हैं, इसलिए पहले हार्ट अटैक की आशंका की जांच करना जरूरी होता है। सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम का इलाज क्या है? जवाब- इसके इलाज में मुख्य रूप से दवाओं और हार्ट की कार्यक्षमता को मॉनिटर किया जाता है। इलाज मरीज की स्थिति और हार्ट की पंपिंग क्षमता के आधार पर तय होता है। सवाल- क्या ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम जानलेवा हो सकता है? जवाब- हां, ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम कुछ मामलों में जानलेवा हो सकता है। इसमें हार्ट की पंपिंग क्षमता अचानक कम होने से हार्ट फेलियर, अनियमित धड़कन या खून के थक्के बनने जैसे गंभीर कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में कार्डियोजेनिक शॉक भी हो सकता है। सवाल- क्या एक बार ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम होने के बाद यह दोबारा हो सकता है? जवाब- हां, लेकिन इसका रिस्क कम होता है। इमोशनल स्ट्रेस, फिजिकल स्ट्रेस या कोई दूसरी गंभीर घटना इसे ट्रिगर कर सकती है। इसलिए ठीक होने के बाद भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेगुलर जांच कराना, दवाएं लेना और स्ट्रेस मैनेज करना जरूरी है। सवाल- ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम का जोखिम कैसे कम कर सकते हैं? जवाब- हेल्दी लाइफस्टाइल से इसका रिस्क कम किया जा सकता है। इसके लिए- ……………………… ग्राफिक्स- विपुल शर्मा ……………………… ये खबर भी पढ़ें… फिजिकल हेल्थ- पेट दर्द को सिर्फ गैस न समझें:ये ‘पैंक्रियाटाइटिस’ हो सकता है, डॉक्टर से जानें इसका कारण, लक्षण, बचाव व सावधानियां पेट दर्द, मतली और उल्टी को लोग अक्सर गैस या अपच समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार इसके पीछे ‘पैंक्रियाटाइटिस’ जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। यह पैंक्रियाज (अग्न्याशय) में होने वाली सूजन है। पैंक्रियाज भोजन को पचाने और ब्लड शुगर कंट्रोल रखने में अहम भूमिका निभाता है। पूरी खबर पढ़ें…
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