मां चंद्रघंटा को प्रिय है दूध की मिठाई, Navratri के तीसरे दिन ऐसे तैयार करें Malai Peda Bhog
शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। इस देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए उनका पसंदीदा भोग जरुर बनाएं। मां चंद्रघंटा को दूध से बनीं हुई मिठाई सबसे प्रिय है। धार्मिक ग्रथों के अनुसार, मां चंद्रघंटा साहस, शक्ति, शांति और निर्भयता की देवी माना जाता है। उनके मस्तक पर सुशोभित अर्धचंद्र मन की शांति, अध्यात्म और चेतना पर नियंत्रण का प्रतीक है।
मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बनी चीजें काफी प्रिय है। इसलिए आप उनके भोग के लिए मलाई पेड़ा बना सकते हैं। आइए आपको इसकी रेसिपी बताते हैं।
मलाई पेड़ा रेसिपी
सामग्री
4-5 कप फुल क्रीम दूध
2 छोटे चम्मच गर्म दूध
1 बड़ा चम्मच अरारोट पाउडर
3/4 कप मिल्क पाउडर
200 ग्राम कद्दूकस पनीर
3-4 इलायची या 1/4 चम्मच इलायची पाउडर
1 बड़ा चम्मच घी
1/2 कप चीनी
1 बड़ा चम्मच कटा हुआ पिस्ता
1 बड़ा चम्मच कटा हुआ बादाम
कुछ केसर
मलाई पेड़ा की विधि
- सबसे पहले आप गहरे नॉन-स्टिकी पैन में 4-5 कप फुल क्रीम दूध को 4-5 मिनट तक तेज आंच पर उबालें।
- इसके बाद मध्यम आंच पर 15 मिनट तक दूध के आधा हो जाने तक उबालें। फिर चम्मच से बीच-बीच में चलाते हुए किनारों को खुरचना शुरु करें।
- अब एक कटोरी में 2 छोटे चम्मच गर्म दूध में कुछ केसर मिलाकर अलग रख दें।
- 15 मिनट बाद दूध में केसर वाला गर्म दूध और 1/2 कप चीनी मिलाएं। इसे भी 5 मिनट तक उबालना है और इस दौरान खुरचने के प्रोसेस को भी जारी रखें।
- इसके बाद उबलते हुए दूद में कद्दूकस पनीर के साथ अरारोट पाउडर घोल भी डालें।
- इस मिश्रण को तब तक उबालें, जब तक वह गाढ़ा होकर पैन का किनारा न छोड़ने लगे।
- अब यह मिश्रण में मावा या खोया जैसा दिखने लगे तो गैस बंद कर दें और फिर इसमें 1/4 चम्मच इलायची पाउडर डालें।
- इसको एक तरफ ठंडा होने के लिए रख दें।
- अगले स्टेप में दूध के गाढ़े मिश्रण से छोटी-छोटी लाई बनाकर उसे चपटा कर लें और ऊपर से पिस्ता-बादाम मिला लें।
- देवी चंद्रघंटा के लिए मलाई पेड़ा भोग तैयार है।
America Oil Tanker Attack | रुक जाओ...कार्गो शिप ने नाकाबंदी तोड़ी, US ने कहा- फायर
ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने एक कमर्शियल कार्गो जहाज़ को बेकार कर दिया। जहाज़ के क्रू ने "बार-बार दी गई चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया और ईरान के ख़िलाफ़ चल रही नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़ने की कोशिश की। CENTCOM ने एक बयान में कहा कि शनिवार को अमेरिकी सेना के एक फाइटर जेट ने पनामा के झंडे वाले M/V ओशन मोलिका (जिसे एरिका सन के नाम से भी जाना जाता है) के पिछले हिस्से पर सटीक निशाना साधने वाले हथियार से हमला किया। इससे क्रू को कोई नुकसान पहुंचाए बिना जहाज़ का प्रोपल्शन सिस्टम पूरी तरह बेकार हो गया"। यह जहाज़ एक ईरानी बंदरगाह से निकलने के बाद इलाके के समुद्री रास्ते से गुज़रने की कोशिश कर रहा था। CENTCOM ने कहा कि उसकी सेनाओं ने 14 जुलाई को ईरानी बंदरगाहों में आने या वहां से निकलने वाले सभी जहाजों की नाकेबंदी फिर से शुरू कर दी है। "सख्ती से लागू किए गए इन तीन महीनों" के दौरान, उन्होंने चार कमर्शियल जहाजों को बेकार कर दिया और 135 जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।
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CENTCOM ने बताया कि इसी दौरान अमेरिकी सेनाओं ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अरबों डॉलर के शैडो नेटवर्क से जुड़े 10 टैंकरों को भी नष्ट कर दिया। अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने इस सैन्य हमले पर सवाल उठाते हुए एक्स पर लिखा कि यह सब किसलिए है? कमर्शियल जहाजों पर हमला करने के लिए टैक्स देने वाले अरबों डॉलर क्यों खर्च कर रहे हैं? डेमोक्रेटिक नेता ने आगे कहा ऐसा लगता है कि इसका मकसद ईरानियों को इस बात के लिए मनाना है कि वे हमें उन्हें अरबों डॉलर देने दें, ताकि युद्ध से पहले जैसी स्थिति थी, सब कुछ वैसा ही हो जाए। कितनी बड़ी तबाही है यह। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) एजेंसी ने रविवार को इस घटना की पुष्टि की। एजेंसी ने कहा कि उसे "ओमान की खाड़ी में एक टैंकर और सैन्य बलों से जुड़ी घटना की रिपोर्ट" मिली है और अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं। इस बीच, IRGC ने कहा कि उसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में एक जहाज़ पर हमला किया क्योंकि वह "गैर-कानूनी रास्ते" से जाने की कोशिश कर रहा था; तेहरान इस अहम समुद्री रास्ते पर अपनी नाकेबंदी लागू करना चाहता है।
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ईरान के सरकारी मीडिया में छपे एक बयान में IRGC ने दावा किया कि ईरानी सेनाओं ने "जलडमरूमध्य के प्रशासन पर नियंत्रण कर लिया है। बयान में कहा गया इस मिशन को अंजाम देते हुए, कुछ घंटे पहले, NatWit कंपनी के एक विशाल LPG कैरियर 'NV Sunshine' पर हमला किया गया, जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य के दक्षिण में गैर-कानूनी रास्ते से गुज़रने की कोशिश कर रहा था।
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