हर्जोग का ऑस्ट्रेलिया दौरा: बोंडी बीच पर दी श्रद्धांजलि, विरोध कर रहे लोगों को रोकने के लिए पुलिस ने किया बल प्रयोग
सिडनी, 9 फरवरी (आईएएनएस)। पिछले साल दिसंबर में हुए आतंकी हमले के बाद सोमवार को आस्ट्रेलिया पहुंचे इजरायली राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने बोंडी बीच पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं देश भर में इस यात्रा का विरोध करने भी कई लोग प्रमुख स्थलों पर जुटे। सिडनी में तो भीड़ को भगाने के लिए पेपर स्प्रे तक का पुलिस ने इस्तेमाल किया।
हर्जोग इस हफ्ते ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के निमंत्रण पर ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रहे हैं। यह निमंत्रण सिडनी के बोंडी बीच पर हनुक्का कार्यक्रम में 14 दिसंबर को हुई गोलीबारी के बाद दिया गया था, जिसमें 15 लोग मारे गए थे।
इजरायली राष्ट्रपति को सिडनी के इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में 7000 से ज्यादा लोगों से स्टैंडिंग ओवेशन मिला।
पूर्व सीनेटर नोवा पेरिस ने देश को सम्मान दिया और कहा कि इजरायल दुनिया भर के यहूदी लोगों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह खड़ा है।
एनएसडब्ल्यू के प्रीमियर क्रिस भी इस मौके पर वहां मौजूद थे। लोगों ने इनका नाम पुकारे जाने पर खुशी जाहिर की।
इस कार्यक्रम में मौजूद पूर्व राजनेताओं में पूर्व प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और पूर्व विपक्षी नेता पीटर डटन भी शामिल थे।
सिडनी कन्वेंशन सेंटर में विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए हर्जोग ने कहा, यह कम्युनिटी इजरायल से अपने जुड़ाव और अपने एक्टिव जायोनिज्म (यहूदीवाद) के लिए प्रेरणादायक है।
आप अपनी यहूदी पहचान को गर्व से दिखाते हैं, और मुझे इस शानदार कम्युनिटी, ऑस्ट्रेलिया और इजरायलियों के लिए आपके योगदान को पहचानने का मौका मिला है। मैं यहां दो ताकतवर लोकतंत्रों के अहम रिश्तों को फिर से मजबूत करने भी आया हूं। मुझे पता है कि साथ मिलकर काम करके हम सहयोग बढ़ाने, समझ बढ़ाने और अपने रिश्तों को बेहतर बनाने का रास्ता खोज लेंगे। अपनी यात्रा के दौरान, मेरा इरादा आपके नेशनल लीडरशिप के साथ इस पर चर्चा करने का है।
जहां हर्जोग कन्वेंशन सेंटर के अंदर मंच से अपनी बात रख रहे थे, वहीं बाहर और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न शहरों में हजारों की संख्या में लोग हिंसक झड़प में उलझे थे।
द सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार सिडनी टाउन हॉल के बाहर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हल्के बल का इस्तेमाल भी किया। पेपर स्प्रे छिड़क विरोध कर रहे लोगों को भगाने की कोशिश की। झड़प के बाद कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया।
इससे पहले, सिडनी पहुंचने पर हर्जोग ने बोंडी आतंकी हमले की जगह पर श्रद्धांजलि दी और सिडनी के यहूदी समुदाय के सदस्यों से मुलाकात की, जिसमें आतंकी हमले के पीड़ित भी शामिल थे।
--आईएएनएस
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क्या खामेनेई को सता रहा है अमेरिकी हमले का खतरा? तोड़ डाली 37 साल पुरानी परंपरा
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बयानों के बीच ईरान से एक असाधारण और संकेतों से भरी खबर सामने आई है. ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खमेनेई ने 37 वर्षों में पहली बार एक अहम सैन्य परंपरा से दूरी बना ली है. 1989 में सत्ता संभालने के बाद यह पहला मौका है, जब वे वायुसेना कमांडरों के साथ होने वाली वार्षिक बैठक में शामिल नहीं हुए. इस फैसले ने न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति में हलचल मचा दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
8 फरवरी: ईरान के इतिहास का प्रतीकात्मक दिन
ईरान में 8 फरवरी का दिन सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि इस्लामी क्रांति का प्रतीक माना जाता है. 1979 में इसी दिन ईरानी वायुसेना के अधिकारियों ने शाह के शासन को छोड़कर क्रांति के नेता रुहोल्ला खुमैनी के प्रति वफादारी की शपथ ली थी. इसे पहलवी शासन के पतन की निर्णायक घटना माना जाता है.
आयतुल्लाह खमेनेई ने 1989 से हर साल इस अवसर पर वायुसेना कमांडरों को संबोधित किया है. यहां तक कि कोविड-19 महामारी के दौरान भी उन्होंने इस परंपरा को नहीं तोड़ा था। ऐसे में इस साल उनकी गैरमौजूदगी को सामान्य नहीं माना जा रहा.
बैठक से दूरी के पीछे क्या वजह?
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार खमेनेई की जगह सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल अब्दुलरहीम मौसावी ने वायुसेना अधिकारियों से मुलाकात की. जानकारों का मानना है कि खमेनेई का सार्वजनिक मंच से हटना उनकी सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा हो सकता है.
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ाई है. अरब सागर में विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन तैनात है, जबकि जॉर्डन और लाल सागर में एफ-15 लड़ाकू विमान, मिसाइल विध्वंसक पोत और ड्रोन सक्रिय हैं. इसके अलावा अमेरिकी निगरानी विमान और अत्याधुनिक ड्रोन ईरान के आसपास लगातार उड़ान भर रहे हैं.
बातचीत बनाम टकराव का गतिरोध
तनाव की जड़ अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के एजेंडे को लेकर भी है. ईरान सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा चाहता है, जबकि ट्रंप प्रशासन ईरान के मिसाइल शस्त्रागार और क्षेत्रीय प्रभाव को भी बातचीत में शामिल करने पर जोर दे रहा है. यही असहमति सैन्य टकराव की आशंका को और गहरा कर रही है.
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर इस बार युद्ध शुरू हुआ, तो उसका दायरा केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा. यह बयान जून 2025 में हुए 12 दिवसीय ईरान-इजरायल संघर्ष के बाद और अधिक गंभीर माना जा रहा है.
किसी बड़े टकराव का संकेत?
खमेनेई की अनुपस्थिति को लेकर दो प्रमुख आकलन सामने आ रहे हैं. एक नजरिया यह है कि संभावित अमेरिकी हवाई हमले या खुफिया गतिविधियों के डर से उन्हें किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया हो. दूसरा यह कि वे पर्दे के पीछे रहकर बेहद संवेदनशील सैन्य और रणनीतिक फैसलों में जुटे हुए हैं.
फिलहाल, खाड़ी में अमेरिकी गतिविधियों की तीव्रता और ईरानी नेतृत्व की चुप्पी इस बात का संकेत दे रही है कि आने वाले दिन मध्य पूर्व के लिए बेहद निर्णायक हो सकते हैं.
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