जब दिलीप कुमार ने कहा था, नाना पाटेकर के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा ‘क्रांतिवीर’ का नाम
‘सलाम बॉम्बे!’, ‘खामोशी’ और ‘वेलकम’ जैसी अनगिनत यादगार फिल्मों में अपने जीवंत और बहुमुखी अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 76 वर्ष की आयु में गोवा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय सिनेमा जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। नाना पाटेकर के सिनेमाई सफर का जिक्र जब भी होगा, 1994 में आई उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का नाम सबसे ऊपर लिया जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के सुपरहिट और प्रतिष्ठित होने से बहुत पहले ही हिंदी सिनेमा के ‘ट्रेजेडी किंग’ दिलीप कुमार ने भविष्यवाणी कर दी थी कि यह फिल्म नाना पाटेकर की पहचान बन जाएगी।
दिलीप कुमार की इस टिप्पणी का किस्सा ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार ने दो साल पहले फिल्म के 30 साल पूरे होने के मौके पर सुनाया था। कुमार ने यूट्यूब चैनल ‘बॉलीवुड ठिकाना’ को बताया था कि दिलीप कुमार ने सुनील दत्त के ‘अजंता आर्ट्स’ में ‘क्रांतिवीर’ की फिल्म का ट्रायल देखा था। इस दौरान दिलीप कुमार, सायरा बानो और उनके परिवार के कुछ सदस्य मौजूद थे। मेहुल कुमार के अनुसार, फिल्म खत्म होने के बाद दिलीप कुमार बाहर आए और एक संगमरमर की कुर्सी पर बैठे, जिसके पीछे नरगिस की तस्वीर थी।
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उन्होंने बताया, ‘‘दिलीप साहब ने मुझे बुलाया और कहा कि आपने ऐसी फिल्म बनाई है कि इसका खुमार लोगों पर बना रहेगा।’’ उनके अनुसार, नरगिस की तस्वीर की ओर इशारा करते हुए दिलीप कुमार ने बताया कि ‘मदर इंडिया’ का ट्रायल देखने के बाद इसी जगह उन्होंने नरगिस से कहा था कि इसके बाद वह चाहे जो भी करें, ‘मदर इंडिया’ का नाम हमेशा उनके साथ जुड़ा रहेगा। मेहुल कुमार ने कहा, ‘‘दिलीप साहब ने मुझसे कहा कि आप नाना को बता देना कि वह इसके बाद चाहे जो भी करें, ‘क्रांतिवीर’ का नाम हमेशा उनके साथ जुड़ा रहेगा।’’ उन्होंने बताया कि दिलीप कुमार ने फिल्म की काफी सराहना की थी। उन्होंने कहा, ‘‘मैं घर गया और नाना को फोन करके बताया कि दिलीप साहब ने फिल्म देखी है और कहा है कि नाना इसके बाद चाहे जो भी करें, ‘क्रांतिवीर’ का नाम जिंदगी भर उनके साथ रहेगा। और आज देखिए, ‘क्रांतिवीर’ और नाना आज भी एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।’’
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संयोग से नाना पाटेकर को मिला एकमात्र फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार ‘क्रांतिवीर’ के लिए था और यह पुरस्कार उन्हें दिलीप कुमार ने ही प्रदान किया था। बाद में एक साक्षात्कार में पाटेकर ने बताया था कि फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने के बाद दिलीप कुमार ने उन्हें अपने घर बुलाया था। नाना पाटेकर ने कहा था, ‘‘मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे ऐसे दिग्गजों से मिलने का मौका मिला। दिलीप कुमार ने एक बार मुझे अपने घर बुलाया था। बारिश हो रही थी और मैं पूरी तरह भीग गया था। उन्होंने मुझे देखा और सबसे पहले तौलिया लाकर खुद मुझे सुखाया। फिर अपना एक कुर्ता लाकर मुझे दिया।’’
पाटेकर ने कहा था कि इसके बाद उन्हें किसी और पुरस्कार की जरूरत नहीं है। 1994 में आई ‘क्रांतिवीर’ का निर्देशन और निर्माण मेहुल कुमार ने किया था। फिल्म में नाना पाटेकर, डिंपल कपाड़िया, अतुल अग्निहोत्री और ममता कुलकर्णी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। फरीदा जलाल, परेश रावल, टीनू आनंद और डैनी डेंग्जोंगपा ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। फिल्म ने चार फिल्मफेयर पुरस्कार और एक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता था।
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नाना पाटेकर को उस वर्ष ‘क्रांतिवीर’ में उनके अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार दोनों मिले थे। पाटेकर ने फिल्म में एक स्वतंत्रता सेनानी के अड़ियल बेटे की भूमिका निभाई थी, जो बाद में गरीबों के कल्याण के लिए संघर्ष करने वाला व्यक्ति बन जाता है। फिल्म में पाटेकर का चर्चित संवाद ‘‘ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून, बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा, बता’’ आज भी मुख्यधारा की हिंदी फिल्मों में सांप्रदायिक सौहार्द पर बने प्रभावशाली दृश्यों में गिना जाता है।
जब नाना पाटेकर ने रजनीकांत को दी थी राजनीति से दूर रहने की सलाह, कहा था- 'वे बहुत सीधे हैं, राजनीति चालबाज़ों का खेल है'
नाना पाटेकर को एक बार लगा था कि रजनीकांत राजनीति के लिए "बहुत सीधे-सादे" हैं और उन्होंने अपने करीबी दोस्त को पब्लिक लाइफ़ में आने के खतरों के बारे में चेतावनी भी दी थी। सालों बाद, गुरुवार को 75 साल की उम्र में पाटेकर के निधन के बाद, सुपरस्टार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बारे में उनकी बेबाक बातें उनकी दोस्ती की एक दिलचस्प झलक दिखाती हैं।
रजनीकांत ने 2017 के आखिरी दिन राजनीति में आने का ऐलान किया, जिससे सालों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया। लेकिन पाटेकर, जो सुपरस्टार को व्यक्तिगत रूप से जानते थे और हाल ही में पा रंजीत की 'काला' में उनके साथ काम कर चुके थे, पूरी तरह से आश्वस्त नहीं थे कि राजनीति उनके दोस्त के लिए सही जगह है।
'मिड-डे' के साथ एक पुराने इंटरव्यू में पाटेकर ने कहा कि उन्हें खुशी है कि रजनीकांत ने यह साहसिक फैसला लिया है, लेकिन उन्हें चिंता थी कि उनकी सादगी और ईमानदारी राजनीति में उनके खिलाफ जा सकती है। उन्होंने मज़ाक में कहा, "बहुत सी ऐसी चीज़ें हैं जो राजनेता नहीं कर सकते। उन्हें किसी से सवाल पूछने का अधिकार नहीं होता। राजनीति में आने पर वे गाली देने का अधिकार भी खो देते हैं।"
पाटेकर ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से रजनीकांत को आगाह किया था कि राजनीति में आने का मतलब लोगों को उनसे सवाल पूछने का अधिकार देना भी होगा, जैसा वे पहले नहीं करते थे।
उन्होंने आगे कहा, "उन्हें अपने फैसले के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। मैंने उनसे कहा, 'जो लोग आज आपको प्यार करते हैं और पूजते हैं, वे राजनीति में आने के बाद आपसे सवाल पूछ सकते हैं, क्योंकि आप उन्हें वह अधिकार दे रहे हैं।' अगर राजनीतिक वादे पूरे नहीं होते हैं, तो उससे होने वाला विरोध उनकी फिल्मों पर भी असर डाल सकता है।"
'वह बहुत सीधे-सादे हैं; इसलिए मुझे डर लगता है'
पाटेकर, जो खुद 'नाम फाउंडेशन' के ज़रिए समाज सेवा और एक्टिविज़्म से जुड़े थे, ने कहा कि उन्हें रजनीकांत के पीछे-पीछे राजनीति में आने में कोई दिलचस्पी नहीं है। उनका मानना था कि राजनीति के मैदान का स्वभाव ऐसे गुणों की मांग करता है जो न तो उनमें थे और न ही सुपरस्टार में। "मैंने उनसे कहा कि वे पॉलिटिशियन बनने लायक नहीं हैं। सिर्फ़ अच्छा और ईमानदार होना ही काफ़ी नहीं है। वे बहुत सीधे-सादे हैं; इसीलिए मुझे उनके लिए डर लगता है। पॉलिटिशियन को चालाक और कूटनीतिज्ञ होना पड़ता है, और हम [रजनी और पाटेकर] ऐसा नहीं कर सकते।"
पाटेकर को इस बात की भी चिंता थी कि राजनीति में आने के बाद किसी एक्टर की बहुत ज़्यादा लोकप्रियता उनके लिए मुश्किल का सबब बन सकती है। उनके मुताबिक, जनता का एक्टर के लिए प्यार उनके काम से जुड़ा होता है, जबकि पॉलिटिकल पार्टी के कामों से बिल्कुल अलग तरह की जवाबदेही तय हो सकती है।
"कलाकारों को पॉलिटिकल पार्टी नहीं बनानी चाहिए और न ही राजनीति में आना चाहिए, क्योंकि आम लोग उन्हें स्क्रीन पर उनके काम की वजह से पसंद करते हैं। अगर मैं राजनीति में आ जाऊँ और मेरी पार्टी के लोग कोई गलती करें, तो उसका दोष मुझ पर मढ़ा जाएगा। यह मुमकिन नहीं है कि टीम का हर सदस्य नेक हो। अगर कोई एक्टर राजनीति में आना चाहता है, तो उसे एक्टिंग छोड़ देनी चाहिए। आप दोनों चीज़ों को मिला नहीं सकते," उन्होंने समझाया।
पाटेकर और रजनीकांत ने पा रंजीत की 2018 की तमिल फ़िल्म 'काला' में साथ काम किया था, जिसमें पाटेकर ने विलेन 'हरि दादा' का रोल निभाया था।
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