जब नाना पाटेकर ने रजनीकांत को दी थी राजनीति से दूर रहने की सलाह, कहा था- 'वे बहुत सीधे हैं, राजनीति चालबाज़ों का खेल है'
नाना पाटेकर को एक बार लगा था कि रजनीकांत राजनीति के लिए "बहुत सीधे-सादे" हैं और उन्होंने अपने करीबी दोस्त को पब्लिक लाइफ़ में आने के खतरों के बारे में चेतावनी भी दी थी। सालों बाद, गुरुवार को 75 साल की उम्र में पाटेकर के निधन के बाद, सुपरस्टार की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के बारे में उनकी बेबाक बातें उनकी दोस्ती की एक दिलचस्प झलक दिखाती हैं।
रजनीकांत ने 2017 के आखिरी दिन राजनीति में आने का ऐलान किया, जिससे सालों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया। लेकिन पाटेकर, जो सुपरस्टार को व्यक्तिगत रूप से जानते थे और हाल ही में पा रंजीत की 'काला' में उनके साथ काम कर चुके थे, पूरी तरह से आश्वस्त नहीं थे कि राजनीति उनके दोस्त के लिए सही जगह है।
'मिड-डे' के साथ एक पुराने इंटरव्यू में पाटेकर ने कहा कि उन्हें खुशी है कि रजनीकांत ने यह साहसिक फैसला लिया है, लेकिन उन्हें चिंता थी कि उनकी सादगी और ईमानदारी राजनीति में उनके खिलाफ जा सकती है। उन्होंने मज़ाक में कहा, "बहुत सी ऐसी चीज़ें हैं जो राजनेता नहीं कर सकते। उन्हें किसी से सवाल पूछने का अधिकार नहीं होता। राजनीति में आने पर वे गाली देने का अधिकार भी खो देते हैं।"
पाटेकर ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से रजनीकांत को आगाह किया था कि राजनीति में आने का मतलब लोगों को उनसे सवाल पूछने का अधिकार देना भी होगा, जैसा वे पहले नहीं करते थे।
उन्होंने आगे कहा, "उन्हें अपने फैसले के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए। मैंने उनसे कहा, 'जो लोग आज आपको प्यार करते हैं और पूजते हैं, वे राजनीति में आने के बाद आपसे सवाल पूछ सकते हैं, क्योंकि आप उन्हें वह अधिकार दे रहे हैं।' अगर राजनीतिक वादे पूरे नहीं होते हैं, तो उससे होने वाला विरोध उनकी फिल्मों पर भी असर डाल सकता है।"
'वह बहुत सीधे-सादे हैं; इसलिए मुझे डर लगता है'
पाटेकर, जो खुद 'नाम फाउंडेशन' के ज़रिए समाज सेवा और एक्टिविज़्म से जुड़े थे, ने कहा कि उन्हें रजनीकांत के पीछे-पीछे राजनीति में आने में कोई दिलचस्पी नहीं है। उनका मानना था कि राजनीति के मैदान का स्वभाव ऐसे गुणों की मांग करता है जो न तो उनमें थे और न ही सुपरस्टार में। "मैंने उनसे कहा कि वे पॉलिटिशियन बनने लायक नहीं हैं। सिर्फ़ अच्छा और ईमानदार होना ही काफ़ी नहीं है। वे बहुत सीधे-सादे हैं; इसीलिए मुझे उनके लिए डर लगता है। पॉलिटिशियन को चालाक और कूटनीतिज्ञ होना पड़ता है, और हम [रजनी और पाटेकर] ऐसा नहीं कर सकते।"
पाटेकर को इस बात की भी चिंता थी कि राजनीति में आने के बाद किसी एक्टर की बहुत ज़्यादा लोकप्रियता उनके लिए मुश्किल का सबब बन सकती है। उनके मुताबिक, जनता का एक्टर के लिए प्यार उनके काम से जुड़ा होता है, जबकि पॉलिटिकल पार्टी के कामों से बिल्कुल अलग तरह की जवाबदेही तय हो सकती है।
"कलाकारों को पॉलिटिकल पार्टी नहीं बनानी चाहिए और न ही राजनीति में आना चाहिए, क्योंकि आम लोग उन्हें स्क्रीन पर उनके काम की वजह से पसंद करते हैं। अगर मैं राजनीति में आ जाऊँ और मेरी पार्टी के लोग कोई गलती करें, तो उसका दोष मुझ पर मढ़ा जाएगा। यह मुमकिन नहीं है कि टीम का हर सदस्य नेक हो। अगर कोई एक्टर राजनीति में आना चाहता है, तो उसे एक्टिंग छोड़ देनी चाहिए। आप दोनों चीज़ों को मिला नहीं सकते," उन्होंने समझाया।
पाटेकर और रजनीकांत ने पा रंजीत की 2018 की तमिल फ़िल्म 'काला' में साथ काम किया था, जिसमें पाटेकर ने विलेन 'हरि दादा' का रोल निभाया था।
Nana Patekar Biography | संघर्ष से स्टारडम तक नाना पाटेकर का सफ़र... जानें उनका परिवार, बेमिसाल करियर, अवॉर्ड्स और निजी ज़िंदगी
हिंदी और मराठी सिनेमा के शिखर पुरुष नाना पाटेकर (विश्वनाथ पाटेकर) का 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने इस दुखद खबर की पुष्टि की। एक अभिनेता, निर्देशक और लेखक के रूप में नाना का सफलता तक का सफर अपार संघर्षों, व्यक्तिगत त्रासदियों और सामाजिक प्रतिबद्धता से भरा रहा। उनके परिवार में उनकी पत्नी नीलकंती और बेटा मल्हार पाटेकर हैं।
नाना पाटेकर की निजी ज़िंदगी
नाना पाटेकर ने 1978 में नीलकंती पाटेकर से शादी की थी। बाद में यह कपल अलग-अलग रहने लगा। उनका एक बेटा है, मल्हार पाटेकर, जिसने गुरुवार, 8 अक्टूबर को नाना के निधन की पुष्टि की। नाना की निजी ज़िंदगी में दुखद नुकसान भी हुए। उनके बड़े बेटे, दुर्वासा की बचपन में ही मौत हो गई थी। नाना ने अपने पिता को भी खो दिया था जब वह लगभग 28 साल के थे। उनके दो भाई हैं, अशोक और दिलीप पाटेकर। बाद के सालों में, नाना ने अपनी पारिवारिक ज़िंदगी के बारे में खुलकर बात की और अपनी ज़िंदगी में नीलकंती के योगदान को माना।
सिनेमा में नाना पाटेकर का सफ़र
नाना का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुद-जंजीरा में हुआ था। उनका बचपन आसान नहीं था। परिवार की आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था। शुरुआती सालों में उन्होंने मुंबई के चुनाभट्टी इलाके में फ़िल्मों के पोस्टर भी पेंट किए और कहा जाता है कि वे महीने में लगभग 35 रुपये कमाते थे। उनके फ़िल्मी करियर की शुरुआत 1978 में 'गमन' फ़िल्म से हुई। इसके बाद उन्होंने मराठी और हिंदी सिनेमा में कई अहम भूमिकाएँ निभाईं।
उनके करियर में एक बड़ा मोड़ 1989 में 'परिंदा' फ़िल्म से आया। इस फ़िल्म में उनकी एक्टिंग के लिए उन्हें नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड और फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड मिला। इसके बाद उन्होंने 'अंगार', 'तिरंगा', 'क्रांतिवीर', 'अग्नि साक्षी', 'खामोशी: द म्यूज़िकल', 'शक्ति', 'अपहरण' और 'राजनीति' जैसी फ़िल्मों में कई तरह के किरदार निभाए। 'क्रांतिवीर' (1994) में उनके काम की बहुत तारीफ़ हुई और उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड मिला। उन्हें 'अग्नि साक्षी' और 'परिंदा' के लिए भी नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
नाना उन चुनिंदा एक्टर्स में से एक थे जिन्हें बेस्ट एक्टर, बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर और बेस्ट विलेन - तीनों कैटेगरी में फ़िल्मफेयर अवॉर्ड मिले। बाद में उन्होंने 'वेलकम' फ़िल्म में उदय शेट्टी का किरदार निभाकर अपना कॉमिक अंदाज़ दिखाया। यह किरदार उनके सबसे यादगार कॉमिक रोल्स में से एक बन गया, और 'वेलकम' व 'वेलकम बैक' दोनों ही फ़िल्में बहुत पॉपुलर कमर्शियल फ़िल्में साबित हुईं।
मराठी सिनेमा से नाना पाटेकर का गहरा नाता
नाना पाटेकर का मराठी थिएटर और सिनेमा से गहरा जुड़ाव था। 'नटसम्राट' में गणपतराव बेलवलकर का उनका किरदार उनके करियर की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस में से एक बन गया।
'नटसम्राट' के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का फ़िल्मफेयर मराठी अवॉर्ड मिला। नाना ने 'प्रहार: द फ़ाइनल अटैक' के साथ डायरेक्शन में भी हाथ आज़माया और कैमरे के पीछे भी अपनी पहचान बनाई। एक्टिंग करियर के साथ-साथ वे लेखन और फ़िल्म निर्माण में भी सक्रिय रहे।
नाना पाटेकर और 'नाम फ़ाउंडेशन'
नाना पाटेकर किसानों की मदद करने के अपने कामों के लिए भी जाने जाते थे। एक्टर मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर उन्होंने 'नाम फ़ाउंडेशन' शुरू किया, जिसका मकसद महाराष्ट्र में सूखे से प्रभावित किसानों और उनके परिवारों की मदद करना था।
2015 के सूखे के दौरान, नाना ने महाराष्ट्र में प्रभावित किसान परिवारों को व्यक्तिगत रूप से आर्थिक मदद भी दी।
नाना पाटेकर के अवॉर्ड्स और सम्मान
अपने करियर के दौरान, नाना पाटेकर को उनकी एक्टिंग के लिए कई बड़े अवॉर्ड्स मिले, जिनमें तीन नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड, कई फ़िल्मफेयर अवॉर्ड और अन्य सम्मान शामिल हैं।
2013 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
नाना पाटेकर के आखिरी पल
ताज़ा जानकारी के मुताबिक, नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा में निधन हो गया। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने उनके निधन की पुष्टि की।
उनके पार्थिव शरीर को दोपहर बाद पुणे लाया जाएगा। पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के बारे में और जानकारी का इंतज़ार है।
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