क्या आपका बच्चा भी इन ऑनलाइन गेम्स का है शिकार? कहीं ये गेम्स उसकी जिंदगी से तो नहीं खेल रहे?
आज के समय में मोबाइल और ऑनलाइन गेम बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बनते जा रहे हैं, लेकिन यह आदत कब खतरनाक लत बन जाए, इसका अंदाजा कई बार माता-पिता को भी नहीं होता. यूपी के गाजियाबाद में सामने आया तीन बहनों का सुसाइड केस पूरे देश को झकझोर देने वाला है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि ये बच्चियां कुछ ऑनलाइन गेम्स की लत में इतनी डूब चुकी थीं कि मोबाइल छिनने के बाद वे गहरे डिप्रेशन में चली गईं.जांच के दौरान सामने आए चार ऑनलाइन गेम्स के नाम हैं -पॉपी प्ले टाइम, द बेबी इन येलो, एविल नन और आइसक्रीम.ये गेम 10–12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं बनाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद कई बच्चे इन्हें घंटों खेलते हैं.मनोचिकित्सकों का कहना है कि छोटे बच्चों का दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं होता. वे सही-गलत का फर्क जल्दी नहीं समझ पाते. ज्यादा स्क्रीन टाइम और डरावना कंटेंट बच्चों को वास्तविक दुनिया से काट देता है. कई बार बच्चे वर्चुअल दुनिया को ही असली दुनिया मानने लगते हैं.साइबर एक्सपर्ट्स की सलाह है कि माता-पिता बच्चों के मोबाइल में पैरेंटल कंट्रोल जरूर ऑन करें. आज कई ऐसे फीचर्स और ऐप्स मौजूद हैं, जिनसे यह पता चल सकता है कि बच्चा कौन सा ऐप या गेम कितनी देर इस्तेमाल कर रहा है.इसके साथ-साथ बच्चों को खेल-कूद, बातचीत और फैमिली टाइम की ओर ज्यादा ले जाना जरूरी है.
कैसे लाया जाता है लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, थोड़ी अलग इसकी प्रक्रिया
No Confidence Motion Against Lok Sabha Speaker: संविधान का अनुच्छेद 94 लोकसभा स्पीकर को हटाने की व्यवस्था देता है लेकिन इसकी कार्यवाही थोड़ी अलग है. जानते हैं ये पूरी प्रक्रिया क्या है और इसके जरिए कैसे लोकसभा स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लोकसभा में लाया जा सकता है
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