वर्ल्ड अपडेट्स:ईरान में नोबेल विजेता नरगिस मोहम्मदी को 7 साल की जेल, देश के खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप
ईरान की रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी को सात साल से ज्यादा की जेल की सजा सुनाई है। उनके वकील के मुताबिक उन्हें 'राज्य के खिलाफ साजिश' और 'प्रोपेगेंडा' के मामलों में दोषी ठहराया गया। सजा के साथ दो साल का आंतरिक निर्वासन और यात्रा प्रतिबंध भी लगाया गया है। मोहम्मदी फरवरी से भूख हड़ताल पर हैं। वे 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों की मुखर समर्थक रही हैं। इससे पहले वे 13 साल सजा काट रही थीं और स्वास्थ्य कारणों से अस्थायी रिहाई पर थीं। मानवाधिकार संगठनों ने सजा की निंदा की है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान अमेरिका से परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत कर रहा है। नरगिस मोहम्मदी को साल 2023 में नोबेल पीस प्राइज के लिए चुना गया था। यह पुरस्कार पाने वाली वो ईरान की दूसरी महिला हैं। उनको ईरान में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अत्याचार और राजनीतिक कैदियों के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए यह पुरस्कार दिया गया था। उन्होंने ईरान में मृत्यु दंड के खिलाफ भी आवाज उठाई थी। नोबेल समिति के प्रमुख ने उन्हें ‘स्वतंत्रता सेनानी’ कहा था। जब उन्हें यह प्राइज मिला तब वो तेहरान की एविन जेल के अंदर थी। उनके बच्चों ने यह प्राइज लिया था जो कि पेरिस में रहते है। नरगिस ने अपनी किताब 'व्हाइट टॉर्चर: इंटरव्यूज़ विद ईरानी वुमन प्रिज़नर्स' में अपने और 12 कैदियों के जेल के अनुभव को लिखा हैं। नरगिस मोहम्मदी पिछले 30 सालों से ईरान में मानव अधिकारों की लड़ाई लड़ रही हैं। इस दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। वो अभी तक 13 बार गिरफ्तार हो चुकी हैं। पहली बार उन्हें 2011 में हिरासत में लिया था। इसके बाद 2015 में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ दुष्प्रचार करने के आरोप में गिरफ्तार कर जंजन की सेंट्रल जेल में रखा गया था। इसके बाद 2020 में नरगिस को सजा कम होने पर रिहा कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ीं खबरें… पुतिन से नजदीकी बढ़ाना चाहता था यौन अपराधी एपस्टीन:नए दस्तावेजों से खुलासा, रूस की मदद करने का ऑफर दिया था अमेरिका जस्टिस डिपार्टमेंट (DOJ) के नए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीब जाने की कोशिश कर रहा था। एपस्टीन ने कई मौकों पर पुतिन और उनके करीबी अधिकारियों तक पहुंच बनाने के प्रयास किए। एपस्टीन 2018 में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के जरिए पुतिन तक अपनी बात पहुंचाना चाहता था। उसने इसके लिए नॉर्वे के पूर्व पीएम थॉर्बजॉर्न यागलैंड से संपर्क किया था। जून 2018 के एक ईमेल में एपस्टीन ने नॉर्वे के पूर्व पीएम थोर्ब्योर्न यागलैंड से कहा था कि वह पुतिन को यह सुझाव दें कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव उससे बातचीत करें। दस्तावेजों के मुताबिक, एपस्टीन खुद को एक ऐसे प्रभावशाली व्यक्ति के तौर पर पेश कर रहा था, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति और निवेश जैसे मुद्दों पर रूस की मदद कर सकता है। पढ़ें पूरी खबर… जापान चुनाव में PM तकाइची की बड़ी जीत:उनकी पार्टी LDP ने 465 में से 316 सीटें जीतीं; PM पीएम मोदी ने बधाई दी जापान में रविवार को हुए आम चुनाव में प्रधानमंत्री साने ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। BBC के मुताबिक, LDP के गठबंधन को 465 में से 352 सीटें मिली हैं। LDP अकेले 316 सीटें जीती हैं, जो बहुमत के लिए जरूरी 233 सीटों से काफी ज्यादा हैं। यह पार्टी की अब तक की सबसे बड़ी जीतों में से एक मानी जा रही है। इससे पहले 1986 में पार्टी ने 300 सीटें जीती थीं। चुनाव जीतने के बाद ताकाइची ने कहा कि वह जापान को मजबूत और समृद्ध बनाने पर काम करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो विपक्ष के साथ मिलकर काम करेंगी। इस जीत के बाद ऊपरी सदन में विपक्ष के नियंत्रण के बावजूद PM ताकाइची को कानून पास करने की ताकत मिल गई है। तकाइची की जीत पर पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने X पोस्ट में लिखा- मुझे विश्वास है आपके कुशल नेतृत्व में हम भारत-जापान मित्रता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर… एपस्टीन फाइल्स- 10 देशों में इस्तीफे, 80 की जांच:अमेरिका से यूरोप तक असर; राजनेताओं, राजदूतों, अरबपतियों और शाही परिवारों तक फैली जांच अमेरिका में यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े सीक्रेट दस्तावेज सामने आते ही दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने करीब 30 लाख पेज के डॉक्यूमेंट्स 30 जनवरी को जारी किए हैं। इसके बाद 10 देशों में 15 से ज्यादा बड़े अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा है। 80 से ज्यादा ताकतवर लोगों पर जांच चल रही है। इन फाइलों में नेता, राजदूत, अरबपति और शाही परिवारों के नाम शामिल हैं। ईमेल, फ्लाइट लॉग और संपर्क रिकॉर्ड में 700 से 1000 असरदार लोगों का जिक्र है। कई मामलों में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप भी हैं। दस्तावेजों में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और हिलेरी क्लिंटन जैसे हाई-प्रोफाइल नाम अलग-अलग संदर्भों में सामने आए हैं। पढ़ें पूरी खबर…
फिजिकल हेल्थ- कहीं आपके शरीर में मैग्नीशियम डेफिशिएंसी तो नहीं:नर्व्स, मसल्स और हार्ट के लिए क्यों जरूरी, बता रहे हैं डॉक्टर
अगर आपको अक्सर थकान रहती है, नींद नहीं आती है। थोड़ी सी फिजिकल एक्टिविटी करने से मसल्स में खिंचाव आ जाता है, घबराहट होती है और बार-बार सिरदर्द होता है तो ये मैग्नीशियम की कमी का इशारा हो सकता है। मैग्नीशियम शरीर के लिए एक बेहद जरूरी मिनरल है, जो नर्व्स, मसल्स, हार्ट बीट्स, एनर्जी प्रोडक्शन और ब्रेन हेल्थ से सीधे जुड़ा हुआ है। अनियमित खानपान, स्ट्रेस और नींद की कमी से लोगों में मैग्नीशियम का लेवल कम हो जाता है। ऐसे में मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट मदद करता है। यह मैग्नीशियम का सबसे असरदार और आसानी से एब्जॉर्ब होने वाला सप्लीमेंट सॉल्ट है। इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज जानेंगे कि मैग्नीशियम क्या है। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- मैग्नीशियम क्या है? जवाब- मैग्नीशियम एक बेहद जरूरी मिनरल है, जो शरीर के सैकड़ों कामकाज के लिए जरूरी है। यह वेसल्स के सिग्नल ट्रांसमिशन, मसल मूवमेंट, हार्ट बीट कंट्रोल और एनर्जी प्रोडक्शन में मदद करता है। शरीर में मौजूद ज्यादातर मैग्नीशियम हड्डियों और मांसपेशियों में स्टोर रहता है और थोड़ा हिस्सा खून में रहता है। खून में इसकी कमी होने पर शरीर के कई कामकाज बिगड़ने लगते हैं। चूंकि शरीर खुद मैग्नीशियम नहीं बना सकता, इसलिए मैग्नीशियम डाइट या सप्लीमेंट के जरिए रोज लेना जरूरी होता है। सवाल- मैग्नीशियम शरीर के लिए क्यों जरूरी है? जवाब- यह शरीर के लगभग 300 से ज्यादा एंजाइम रिएक्शन को एक्टिव करता है। ये रिएक्शन हमारे मेटाबॉलिज्म, ब्लड शुगर कंट्रोल, बीपी बैलेंस, मसल कॉन्ट्रैक्शन और नर्व फंक्शन के लिए अनिवार्य हैं। यह विटामिन-D को एक्टिव करने में भी मदद करता है, जिससे कैल्शियम सही तरीके से हड्डियों में पहुंचता है। हार्ट बीट कंट्रोल में रखने में भी इसकी भूमिका रहती है। इसकी कमी से थकान, ऐंठन, घबराहट और अनिद्रा जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। सवाल- मैग्नीशियम शरीर के किन बुनियादी कामों के लिए जिम्मेदार है? जवाब- मैग्नीशियम शरीर के एनर्जी प्रोडक्शन, मसल रिलैक्सेशन, नर्व सिग्नल भेजने, हड्डियों के निर्माण और हॉर्मोन संतुलन के लिए जरूरी है। यह इंसुलिन को प्रभावी बनाने में मदद करता है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है। यह ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में योगदान देता है। दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन से तनाव कम करने और नींद लाने में भी इसका अहम रोल है। पाचन तंत्र में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने का काम भी यही मिनरल करता है। सवाल- मैग्नीशियम की कमी से क्या दिक्कतें होती हैं? जवाब- मैग्नीशियम की कमी से सबसे पहले थकान, कमजोरी और मसल क्रैंप्स दिखते हैं। कई लोगों को पैरों में ऐंठन, झनझनाहट या फड़कन महसूस होती है। दिमाग पर असर पड़ने से बेचैनी, चिड़चिड़ापन, नींद न आना और सिरदर्द हो सकता है। दिल पर प्रभाव पड़ने से हार्ट बीट अनियमित हो सकती है और हाई बीपी बढ़ सकता है। लंबे समय तक कमी रहने से डायबिटीज कंट्रोल बिगड़ सकता है और हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। गंभीर मामलों में दौरे पड़ सकते हैं या बेहोशी तक हो सकती है। सवाल- मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट क्या होता है, यह बाकी सप्लीमेंट से कैसे अलग है? जवाब- मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट एक सप्लीमेंट है, जिसमें मैग्नीशियम को एक अमीनो एसिड 'ग्लाइसिन' के साथ बनाया जाता है। यह शरीर में आसानी से अवशोषित हो जाता है। इसे ‘किलेटेड फॉर्म’ कहते हैं। इसके अन्य फॉर्म, जैसे मैग्नीशियम ऑक्साइड, पचने में कमजोर होते हैं और डायरिया की वजह बन सकते हैं। ग्लाइसिनेट पाचन के लिए ज्यादा अनुकूल माना जाता है। पेट खराब होने से बचाता है और ब्लड में आसानी से अवशोषित हो जाता है। इसलिए यह तनाव, नींद और मसल प्रॉब्लम्स में ज्यादा प्रभावी माना जाता है। सवाल- तनाव, एंग्जाइटी और नींद में मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट कैसे मदद करता है? जवाब- मैग्नीशियम दिमाग के GABA (गामा-एमिनोब्यूटिरिक एसिड) न्यूरोट्रांसमीटर को एक्टिव करता है, जो दिमाग को शांत करने वाला केमिकल है। इससे दिमाग की ओवरएक्टिव सोच धीमी पड़ती है और रिलैक्सेशन आता है। यह स्ट्रेस हॉर्मोन कॉर्टिसोल को नियंत्रित करता है, जिससे बेचैनी कम होती है। ग्लाइसिन एमिनो एसिड खुद भी नर्वस सिस्टम को शांत करता है। इस वजह से व्यक्ति जल्दी सो पाता है, नींद गहरी आती है और बार-बार नींद खुलने की समस्या खत्म हो जाती है। इसलिए यह एंग्जाइटी और स्लीप डिस्टरबेंस में सहायक माना जाता है। सवाल- डायबिटीज, हाई बीपी और हार्ट पेशेंट्स में इसके फायदे क्या हैं? जवाब- मैग्नीशियम इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाकर ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करता है। इसकी कमी से डायबिटिक लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यह ब्लड वेसल्स को रिलैक्स करता है, जिससे हाई बीपी को कम करने में मदद मिलती है। हार्ट में कैल्शियम चैनल को बैलेंस कर यह हार्ट बीट सामान्य बनाए रखता है। कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल पर भी सकारात्मक असर देखा गया है। डॉक्टर की सलाह से लिया जाए तो यह हार्ट पेशेंट्स के लिए सपोर्टिव सप्लीमेंट बन सकता है। सवाल- मैग्नीशियम मसल्स क्रैम्प, थकान और कमजोरी में कितना असरदार है? जवाब- मसल क्रैम्प अक्सर मैग्नीशियम की कमी से होते हैं क्योंकि यह मसल रिलैक्सेशन में जरूरी है। कमी होने पर मांसपेशियां आराम नहीं कर पातीं और ऐंठन बनती है। मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट से स्टोर्स भरते हैं, जिससे मसल फंक्शन सुधरता है और क्रैम्प कम होते हैं। यह थकान घटाकर माइटोकॉन्ड्रिया (कोशिका का पावरहाउस) में एनर्जी प्रोडक्शन बढ़ाता है। लंबे समय से चल रही कमजोरी या एक्सरसाइज के बाद दर्द में इसे काफी मददगार पाया गया है। सवाल- हड्डियों और विटामिन-D के साथ इसका क्या संबंध है? जवाब- मैग्नीशियम विटामिन-D को एक्टिव फॉर्म में बदलने के लिए जरूरी है। बिना मैग्नीशियम, विटामिन-D ठीक से काम नहीं कर पाता और कैल्शियम का अवशोषण घट जाता है। इससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। मैग्नीशियम सीधे हड्डी के मिनरल मैट्रिक्स का हिस्सा बनकर मजबूती देता है। यह पैराथायरॉयड हॉर्मोन को भी बैलेंस करता है, जो कैल्शियम लेवल कंट्रोल करता है। सही मात्रा में कैल्शियम, विटामिन-D और मैग्नीशियम तीनों मिलकर बोन हेल्थ को बेहतर बनाए रखते हैं। सवाल- क्या मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट किडनी स्टोन से बचाता है? जवाब- मैग्नीशियम स्टोन बनने से रोकता है। यह आंतों में ऑक्सालेट के अवशोषण को भी कम करता है। इससे यूरिन में स्टोन बनाने वाले कण घटते हैं। लंबे समय तक उचित डोज लेने से स्टोन बनने की आशंका कम हो सकती है, हालांकि यह तब ज्यादा फायदेमंद होता है, जब व्यक्ति को बार-बार स्टोन बनने की समस्या रहती हो। सवाल- क्या यह नींद की गोली की तरह काम करता है? जवाब- नहीं, मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट नशे या सिडेशन वाली नींद की गोली नहीं है। यह दिमाग को दवा से सुलाता नहीं, बल्कि शरीर को प्राकृतिक रूप से रिलैक्स करके नींद की तरफ ले जाता है। यह GABA को सपोर्ट करता है और तनाव घटाता है। नींद की क्वालिटी बेहतर होती है, लेकिन यह तुरंत बेहोशी जैसे स्लीपिंग पिल्स वाला प्रभाव नहीं देता। इसलिए इसे सुरक्षित और नेचुरल स्लीप सपोर्ट माना जाता है। सवाल- क्या माइग्रेन में फायदेमंद होता है? जवाब- माइग्रेन में मैग्नीशियम की कमी आम पाई गई है। यह नर्व सिग्नल को स्टेबल करता है, ब्लड वेसल्स को ओपन रखता है और कुछ दर्द पैदा करने वाले केमिकल्स के रिलीज को कम करता है। नियमित मैग्नीशियम सप्लीमेंट माइग्रेन अटैक की फ्रीक्वेंसी और तीव्रता घटा सकता है। खासतौर पर ग्लाइसिनेट जैसी अच्छी एब्जॉर्प्शन फॉर्म लंबे समय के माइग्रेन मैनेजमेंट में सहायक हो सकती है। हालांकि इसे दवा का विकल्प नहीं बल्कि सहायक उपचार के रूप में प्रयोग किया जाता है। सवाल- मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट किसे लेना चाहिए? जवाब- यह उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिन्हें क्रैम्प, थकान, नींद की कमी, एंग्जाइटी, माइग्रेन या हाई स्ट्रेस हो। डायबिटीज और हाई बीपी में भी डॉक्टर की सलाह से दिया जाता है। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और जिनकी डाइट में मैग्नीशियम कम हो, वे भी इसे ले सकते हैं। यह सामान्य रूप से सभी उम्र के लिए सुरक्षित माना जाता है, लेकिन बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किडनी मरीजों को लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूरी है। सवाल- सही डोज कितनी है और कितने समय तक लेना सुरक्षित है? जवाब- आमतौर पर 200-400 mg एलिमेंटल मैग्नीशियम प्रतिदिन सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती है। शुरू में 200 mg से शुरुआत की जाती है। माइग्रेन में 400–600 mg तक दी जा सकती है, लेकिन यह डॉक्टर तय करते हैं। इसे 2–3 महीने तक लिया जा सकता है। दवा छोड़ने या बढ़ाने का निर्णय हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही होना चाहिए। सवाल- मैग्नीशियम ग्लाइसिनेट लेने का सही समय क्या है? जवाब- इसे रात के खाने के बाद या सोने से 1 घंटा पहले लेना सबसे बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह रिलैक्सेशन और नींद में मदद करता है। जिन्हें मसल क्रैम्प या थकान ज्यादा रहती है, वे दिन में खाने के बाद भी ले सकते हैं। खाली पेट लेने से कुछ लोगों को हल्की गड़बड़ी हो सकती है, इसलिए भोजन के साथ लेना ज्यादा सुरक्षित रहता है। रोज एक ही समय पर लेने से बेहतर अवशोषण होता है। सवाल- किन लोगों को इसे नहीं लेना चाहिए? जवाब- इनलोगों को मैग्नीशियम लेने से बचना चाहिए या डॉक्टर से कंसल्ट करने के बाद ही लेना चाहिए- ………………….. फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- शराब, सोडा से ज्यादा खतरनाक एनर्जी ड्रिंक्स: पीने से खराब होती किडनी, डॉक्टर से जानें किडनी को कैसे रखें हेल्दी एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन, शुगर और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। सब मिलकर किडनी में इंफ्लेमेशन बढ़ाते हैं। साथ ही किडनी की टॉक्सिन फिल्टर करने की क्षमता को भी डैमेज करते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
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