Moradabad: BJP MLA Kunwar Sushant Singh के सहयोगियों पर तीन युवकों को बंधक बनाकर पीटने का आरोप
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में बढ़ापुर से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक कुंवर सुशांत सिंह के सहयोगियों पर तीन लोगों को कथित तौर पर बंधक बनाकर पीटने के संबंध में शिकायत दर्ज कराई गयी है। पुलिस के एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) कुंवर आकाश सिंह ने बताया कि ठाकुरद्वारा थाने में तीन लोगों की ओर से शिकायत दी गई और विधायक के सहयोगियों समेत छह नामजद और नौ अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गयी।
उन्होंने बताया कि अब तक मामला दर्ज नहीं किया गया है। पीड़ितों के परिजनों के अनुसार, घरेलू सहायक अतुल व लवेश और उनके दोस्त रामू को विधायक के बेटे का सोने का ब्रेसलेट गायब होने के आरोप में कथित तौर पर बंधक बनाकर पीटा गया। रामू की मां ओमवती ने आरोप लगाया कि सात अक्टूबर को विधायक के एक सहयोगी ने उनके बेटे को घर से बुलाया था, जबकि अन्य दोनों को पहले ही बंधक बना लिया गया था।
उन्होंने दावा किया कि तीनों को उल्टा लटकाकर बेल्ट से पीटा गया, बिजली के झटके दिए गए और उनके घावों पर नमक रगड़ा गया। परिजनों के मुताबिक, चोटिल होने के कारण तीनों को उत्तराखंड के काशीपुर स्थित एक अस्पताल में भर्ती कराया गया और रामू की हालत गंभीर बताई गई है। विधायक सुशांत सिंह ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि घरेलू सहायकों से केवल गायब ब्रेसलेट के बारे में पूछताछ की गई थी।
उन्होंने मारपीट के आरोपों से इनकार किया। वहीं, मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद रुचि वीरा ने पीड़ितों को तत्काल न्याय दिलाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विधायक सुशांत सिंह के पिता दिवंगत कुंवर सर्वेश सिंह और दादा रामपाल सिंह भी कई बार विधायक और सांसद रह चुके हैं। इस परिवार का मुरादाबाद और आसपास के जिलों में राजनीतिक प्रभाव रहा है।
Mallikarjun Kharge और Rahul Gandhi करेंगे CJI से मुलाकात, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाएंगे सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को कहा कि वह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 12 अक्टूबर को भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) से मुलाकात कर लोकतांत्रिक अधिकारों के कथित दमन, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और निर्वाचन आयोग में कथित अनियमितताओं से जुड़ी चिंताओं को उठाएंगे। खरगे ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर देश में ‘‘अघोषित आपातकाल” जैसी स्थिति पैदा करने का आरोप लगाया। खरगे ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने भी राहुल गांधी की तरह सीजेआई को एक पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था और उन्हें सोमवार को शाम चार बजे से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय दिया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम उनके (प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत) सामने किसी चीज की मांग नहीं कर सकते। हम हाथ जोड़कर उनसे अनुरोध करेंगे कि वह इन मुद्दों को ध्यान में रखें।’’ खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी उन युवाओं से डरे हुए हैं, जो ‘‘लोकतंत्र बचाओ, हमारे वोट बचाओ’’ की मांग कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और उनकी सरकार पर नागरिकों के अधिकारों का “दमन” करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस संविधान, लोकतंत्र और लोगों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस का इस्तेमाल लोगों को विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने और उनकी उचित मांगों को उठाने से रोकने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि इसके कारण उन युवाओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जो नौकरी, नियुक्ति, स्कूल या कॉलेज जाने के लिए यात्रा करना चाहते हैं।
खरगे ने शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित बड़े जन आंदोलन को विफल करने के लिए सुरक्षा के अभूतपूर्व बंदोबस्त और कॉजपा के प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘कल लगभग 32,000 पुलिसकर्मियों और सीआरपीएफ के 7,500 जवानों को तैनात किया गया था। यह अपने आप में दर्शाता है कि सरकार युवाओं के आंदोलन से कितनी डरी हुई है।
जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, सड़कों को अवरुद्ध किया गया, संचार माध्यमों को बाधित किया गया, हवाई अड्डे तक पहुंच सीमित कर दी गई और मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिये गये। ये सभी बातें दर्शाती हैं कि वह भारत में लोकतंत्र कायम नहीं रहने देना चाहते।’’ उन्होंने कहा, “हम लोकतंत्र और लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखेंगे।” खरगे ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है लेकिन उसे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, “निर्वाचन आयोग के दो सदस्यों ने खुले तौर पर उजागर किया है कि आयोग किस तरह काम कर रहा है, उसमें किस प्रकार की अनियमितताएं हो रही हैं और इस स्थिति को लेकर आयोग के सदस्य स्वयं क्या महसूस करते हैं।
इसके बावजूद, इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।’’ खरगे ने आरोप लगाया, ‘‘यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि वे (प्रधानमंत्री और भाजपा सरकार) मतों की चोरी का सिलसिला जारी रखना चाहते हैं। अब तक वोटों की जितनी भी चोरी हुई है, उसका इस्तेमाल केंद्र और राज्यों में सरकारें बनाने के लिए किया गया है।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा माहौल बनाने के लिए मोदी ने 2023 में एक कानून बनाया, जिसके तहत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों को कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा संरक्षण दिया गया है, जो भारत के राष्ट्रपति या देश के प्रधान न्यायाधीश को भी प्राप्त नहीं है।
उन्होंने कहा, “एक निर्वाचन आयुक्त को यह विशेष संरक्षण क्यों दिया गया? यह संरक्षण देने के बाद वोटों की चोरी, ईवीएम में हेरफेर और चुनावी धोखाधड़ी की पूरी प्रक्रिया शुरू कर दी गई। मुख्य निर्वाचन आयुक्त कितनी भी गलतियां क्यों न करें, उन्हें उन गलतियों के लिए जवाबदेही से आजीवन छूट दे दी गई है।’’ खरगे ने कहा, ‘‘इसका सीधा मतलब है कि यह जनता के वोट चुराने और लोकतंत्र के साथ धोखाधड़ी करने की साजिश है।
ठीक यही किया जा रहा है और हम इसके खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
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