Nepal के Gorkha में Budhi Gandaki नदी की बाढ़ से भारी तबाही, 82 बचाए गए
(फोटो के साथ) (शिरीष बी प्रधान) काठमांडू, 11 अक्टूबर नेपाल के गोरखा जिले में रविवार को बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक आई बाढ़ से मकान और पुल बह गए तथा जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा। अधिकारियों ने नौ विदेशी नागरिकों सहित 80 से अधिक लोगों को बचा लिया, जबकि पांच लोग अब भी लापता हैं। यह आपदा 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ के करीब डेढ़ महीने बाद आई है।
नेपाल अब भी नेपाल-चीन की पहाड़ी सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ से उबर रहा है, जिसमें 1,400 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और हजारों अन्य लापता हो गए थे। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि गोरखा जिले में चार हेलीकॉप्टरों की मदद से नौ विदेशी नागरिकों सहित 82 लोगों को बचाया गया है। लापता पांच लोगों में दो महिलाएं शामिल हैं।
प्राधिकरण के अनुसार बाढ़ और भूस्खलन से दो झूला पुल, दो मोटर योग्य पुल, तीन जलविद्युत परियोजनाएं और मवेशियों के 34 बाड़े क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा, 45 मकान पूरी तरह और 27 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। तीन वाहन भी बाढ़ में बह गए।
अधिकारियों ने नेपाली सेना के 171 जवानों सहित 700 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को राहत एवं बचाव कार्यों में लगाया है। प्रभावित क्षेत्रों में तंबू, कंबल, गद्दे, स्लीपिंग बैग और रसोई के सामान पहुंचाए गए हैं। ‘काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-तीन के वार्ड अध्यक्ष राम कुमार गुरुंग ने बताया कि बाढ़ से सल्लेरी, पैयुका और जगत के नदी तटवर्ती इलाकों में मकान बह गए।
वार्ड को जोड़ने वाला एक झूला पुल भी बह गया। अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय विकास केंद्र (आईसीआईएमओडी) ने एक बयान में नेपाल के अधिकारियों से मिली शुरुआती जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि गोरखा जिले के चुमचेत के पास भूस्खलन के कारण नदी का प्रवाह अस्थायी रूप से बाधित हो गया था। यह अवरोध टूटने से बाढ़ आई हो सकती है।
बाढ़ का पानी अपने साथ कीचड़, गाद और मलबा बहाकर बूढ़ी गंडकी नदी के निचले इलाकों में ले गया। जलस्तर में उतार-चढ़ाव और खतरा बढ़ने के बीच अधिकारियों ने बूढ़ी गंडकी, त्रिशूली और नारायणी नदी तंत्र के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। गोरखा जिला प्रशासन कार्यालय के सहायक मुख्य जिला अधिकारी नेत्र प्रसाद शर्मा ने कहा कि नदी किनारे रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है।
जिला प्रशासन कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी चुड़ा निधि तिवारी के अनुसार, चुमनुब्री में करीब एक किलोमीटर लंबा भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में आकर मवेशियों के पांच बाड़े बह गए। चुमनुब्री-तीन के सल्लेरी में निर्माणाधीन 341 मेगावाट की बुढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना के स्थल पर बना निर्माण शिविर और कुछ उपकरण भी बाढ़ में बह गए। शर्मा ने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, जिले की चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका में करीब तीन दर्जन मकान बाढ़ में बह गए हैं।
समाचार पोर्टल ‘ऑनलाइन खबर’ के अनुसार, चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका की उपाध्यक्ष लक्ष्मी गुरुङ ने कहा कि रविवार सुबह बुढ़ी गंडकी में आई बाढ़ ने रसुवा में भोटेकोशी नदी की बाढ़ की याद दिला दी। उन्होंने कहा, ‘‘बूढ़ी गंडकी में आई बाढ़ भोटेकोशी की बाढ़ जैसी है। इसमें दर्जनों मकान बह गए हैं।
फिलहाल नुकसान का सटीक आकलन करना संभव नहीं है।’’ बाढ़ सुबह करीब चार बजे आई, जिसके बाद स्थानीय लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे। लक्ष्मी ने बताया कि बाढ़ के पानी से चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-तीन के बाजार को काफी नुकसान पहुंचा है। राम कुमार ने कहा, ‘‘बाढ़ सुबह-सुबह आई और हम अपना सामान तक नहीं निकाल सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जैसे ही हमने सुना कि बाढ़ आ रही है, सभी लोग भाग गए।’’ उन्होंने बताया कि नुकसान का पूरा आकलन अभी नहीं हो पाया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह करीब चार बजे नदियों और नालों से तेज गर्जना जैसी आवाजें सुनाई देने के बाद चुमलिंग और लोकपा सहित नदी किनारे की बस्तियों के निवासी अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। स्थानीय होटलों में ठहरे पर्यटक भी वहां से निकल गए। लोकपा निवासी शेराप गुरुंग ने कहा कि आवाज से ऐसा लग रहा था कि पानी का बहाव बार-बार रुक रहा है और फिर शुरू हो रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘अंधेरा होने के कारण हम यह नहीं देख सके कि नाले का प्रवाह रुका था या भूस्खलन हुआ था। बारिश भी नहीं हुई थी।’’ अधिकारी नदी किनारे रहने वाले लोगों को चेतावनी देने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील करने के लिए लाउडस्पीकर का इस्तेमाल कर रहे थे। गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने कहा कि बाढ़ से चुमनुब्री-तीन में न्याकचेत और फिलिम बाजार को जोड़ने वाला पुल भी बह गया है।
उन्होंने बताया कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण बचाव, राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकालने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। इस बीच, मनास्लु की यात्रा पर जा रहे पर्यटक भी फंस गए हैं। मनास्लु संरक्षण क्षेत्र परियोजना (एमसीएपी) ने बताया कि बाढ़ में पैदल रास्ता और पुल बह जाने के कारण पर्यटक शनिवार रात अपने ठहरने के स्थान पर फंस गए थे।
एमसीएपी के सूचना अधिकारी भुवन ओझा ने कहा कि पर्यटक शनिवार को अपने ठहरने के स्थान पर सुरक्षित थे।
स्मृति मंधाना बनीं यूनिसेफ इंडिया की सेलिब्रिटी एडवोकेट, लड़कियों के लिए करेंगी काम
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नई कप्तान स्मृति मंधाना के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। रविवार को यूनिसेफ इंडिया ने उन्हें अपना सेलिब्रिटी एडवोकेट नियुक्त किया। यह घोषणा अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर की गई। इस दिन का उद्देश्य लड़कियों के अधिकारों, सुरक्षा, नेतृत्व क्षमता और आगे बढ़ने के अवसरों पर ध्यान देना है। इस नई जिम्मेदारी के जरिए मंधाना अब क्रिकेट के साथ-साथ बच्चों और किशोरियों के बेहतर भविष्य के लिए भी काम करती नजर आएंगी।
यूनिसेफ इंडिया के साथ जुड़ने पर स्मृति मंधाना ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि क्रिकेट खेलते हुए उन्हें यह सीखने को मिला कि हर सपना एक अवसर से शुरू होता है। मेहनत, लगन और प्रोत्साहन मिलने पर यही अवसर बड़ी सफलता में बदल सकता है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे और युवा को बड़े सपने देखने और अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने का मौका मिलना चाहिए।
अपनी नई भूमिका में मंधाना किशोरियों को सशक्त बनाने, उनके स्वास्थ्य और बेहतर जीवन को बढ़ावा देने तथा पढ़ाई, खेल और नेतृत्व के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए यूनिसेफ के प्रयासों का समर्थन करेंगी। खेल जगत में उनकी पहचान और युवाओं के बीच लोकप्रियता इस अभियान को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने भी मंधाना की नियुक्ति का स्वागत किया। दक्षिण एशिया में यूनिसेफ के क्षेत्रीय राजदूत और लंबे समय से उसके सहयोगी तेंदुलकर ने सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि मंधाना मैदान पर लाखों लोगों को प्रेरित करती हैं और उन्हें भरोसा है कि वह मैदान के बाहर भी बच्चों के अधिकारों की एक मजबूत आवाज बनेंगी।
गौरतलब है कि मंधाना को हाल ही में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इससे पहले हरमनप्रीत कौर ने सभी प्रारूपों में कप्तानी छोड़ने का फैसला किया था। हरमनप्रीत की अगुवाई में भारतीय टीम ने 2025 का एकदिवसीय विश्व कप खिताब जीता था। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के महीनों में टीम के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए गुवाहाटी में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की बैठक हुई थी। इसमें टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल से पहले भारत के बाहर होने सहित टीम के प्रदर्शन पर चर्चा हुई थी।
मंधाना 2013 से भारतीय टीम का हिस्सा हैं और लंबे समय तक हरमनप्रीत की उपकप्तान भी रही हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अनुसार, अब वह सीमित ओवरों के प्रारूप में पूर्णकालिक कप्तान की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह अब तक भारत की ओर से 18 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 4 एकदिवसीय मुकाबलों में कप्तानी कर चुकी हैं।
29 वर्षीय मंधाना का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रदर्शन भी शानदार रहा है। 2025 के एकदिवसीय विश्व कप में उन्होंने 434 रन बनाए थे और वह टूर्नामेंट में दूसरी सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज रही थीं। जून 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय शतक लगाकर वह तीनों प्रारूपों में अंतरराष्ट्रीय शतक बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर भी बनी थीं।
मौजूदा समय में मंधाना के सामने दो अहम जिम्मेदारियां हैं। एक ओर उन्हें भारतीय टीम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की चुनौती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर यूनिसेफ के साथ मिलकर लड़कियों और बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का अवसर भी मिलेगा। उनकी नई भूमिका खेल और सामाजिक बदलाव के बीच एक मजबूत जुड़ाव बन सकती है।
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