अदाणी की कच्छ कॉपर का बड़ा विस्तार प्लान, स्मेल्टिंग क्षमता दोगुनी कर 10 लाख टन करने की योजना
अहमदाबाद, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की सहायक कंपनी कच्छ कॉपर लिमिटेड (केसीएल) ने स्थिरता, डीकार्बोनाइजेशन और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर आधारित एक महत्वाकांक्षी विकास रणनीति पेश की है। कंपनी का लक्ष्य भारत की कॉपर उत्पादन क्षमता को मजबूत करना और देश के ऊर्जा परिवर्तन (एनर्जी ट्रांजिशन) को समर्थन देना है।
कच्छ क्षेत्र के मुंद्रा में ग्रीनफील्ड कॉपर रिफाइनरी संचालित करने वाली कंपनी की वर्तमान कॉपर स्मेल्टिंग क्षमता 5 लाख टन प्रतिवर्ष है। कंपनी इसे भविष्य में बढ़ाकर 10 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना बना रही है। यह विस्तार पूरा होने पर इस संयंत्र को दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन कस्टम कॉपर स्मेल्टर बना सकता है।
अपनी पहली सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट में कंपनी ने पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन (ईएसजी) सिद्धांतों को कारोबारी रणनीति का हिस्सा बनाने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसके प्रमुख फोकस क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग, जिम्मेदार जल प्रबंधन, उत्सर्जन नियंत्रण, संसाधन संरक्षण और सामुदायिक विकास शामिल हैं।
डीकार्बोनाइजेशन रोडमैप के तहत कंपनी अपने परिचालन में 115 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा जोड़ने की योजना बना रही है, जिससे उत्पादन गतिविधियों का कार्बन फुटप्रिंट कम होगा और कंपनी के दीर्घकालिक स्थिरता लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा।
कंपनी का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बिजली ट्रांसमिशन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में बढ़ते उपयोग के कारण भविष्य में कॉपर की भूमिका और महत्वपूर्ण होने वाली है। बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विस्तार के साथ कॉपर की मांग बढ़ने की उम्मीद है, इसलिए कंपनी जिम्मेदार उत्पादन पद्धतियों के साथ क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।
जल संरक्षण भी कंपनी की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार, कच्छ कॉपर अपने संचालन में लगभग 100 प्रतिशत डिसैलिनेटेड (समुद्री जल शुद्धिकृत) पानी का उपयोग करती है और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज नीति का पालन करती है। इसका उद्देश्य मीठे पानी पर निर्भरता कम करना और पर्यावरणीय प्रभाव को घटाना है।
कंपनी ने औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण में भी प्रगति का दावा किया है। उसके अनुसार, वह वर्तमान में 99.8 प्रतिशत सल्फर उत्सर्जन का उपचार उन्नत पर्यावरणीय तकनीकों के जरिए कर रही है।
विनिर्माण गतिविधियों के अलावा कंपनी आसपास के क्षेत्रों में सामुदायिक विकास कार्यक्रमों में भी निवेश कर रही है, जिनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका संवर्धन और सामाजिक विकास से जुड़ी पहलें शामिल हैं, जिनका उद्देश्य स्थानीय समुदायों को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाना है।
यह सस्टेनेबिलिटी रोडमैप अदाणी समूह के कॉपर सेक्टर में बड़े निवेश का हिस्सा है। समूह ने इस परियोजना में 1.2 अरब डॉलर का निवेश किया है, जिसके जरिए घरेलू कॉपर उत्पादन बढ़ाने और भारत के औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब बिजली ग्रिड, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में कॉपर की मांग तेजी से बढ़ रही है। घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से भारत की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।
भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इसी को ध्यान में रखते हुए कच्छ कॉपर की क्षमता विस्तार और सस्टेनेबिलिटी पहलों को औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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'भारत के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य दखलंदाजी है', CJP प्रोटेस्ट पर UN को MEA का जवाब
दिल्ली में बीते शनिवार को कॉकरोच जतना पार्टी समेत कई संगठनों के विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थकों के हिरासत में लिए जाने पर संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग चिंता व्यक्त की है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (OHCHR) इस बयान पर विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करते हुए जवाब दिया है. MEA ने ह्यूमन राइट्स की बातों को लेकर कहा, "हमने कल दिल्ली में घटनाओं को लेकर ह्यूमन राइट्स के हाई कमिश्नर के दफ्तर की ओर कही गई कुछ बातों को देखा. भारत विश्व की सबसे बड़ी डेमोक्रेसी है, यहां पर शांति से एकत्र होने का अधिकार हमारे संविधान से मिलता है."
VIDEO | Delhi: MEA spokesperson Randhir Jaiswal reacts to remarks made by the Office of the High Commissioner for Human Rights and said, "We have seen certain remarks by the Office of the High Commissioner for Human Rights about yesterday’s events in New Delhi. India is the… pic.twitter.com/kBe34Xa959
— Press Trust of India (@PTI_News) October 11, 2026
एजेंसियां पूरी तरह से कानून के तहत काम कर रहीं
MEA ने कहा कि हमारे संविधान में शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने के अधिकार की गारंटी दी गई है. मजबूत संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका और स्वतंत्र मीडिया की ओर से इसकी सुरक्षा की जाती है. भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान को जारी करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी है. रणधीर जायसवाल ने कहा,"हमारे कानून लागू करने वाली एजेंसियां पूरी तरह से कानून के तहत काम कर रही हैं. किसी भी शिकायत के निदान को लेकर हमारी अदालतें सभी के लिए उपलब्ध हैं. ऐसे में OHCHR की चिंताएं बेबुनियाद हैं और ये भारत के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य दखलंदाजी है."
किसी भी शिकायत के समाधान के लिए उपलब्ध: MEA
भारत के विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि हर लोकतंत्र की तरह, भारतीय नागरिक भी सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने की शर्तों के साथ इस अधिकार उपयोग करते हैं. हमारे कानून लागू करने वाले अधिकारी कानून के अनुसार सख्ती से काम कर रहे हैं. हमारी अदालतें किसी भी शिकायत के समाधान को लेकर सभी के लिए उपलब्ध हैं.
दोहरे मापदंड विश्वसनीयता को कम करते हैं MEA
MEA ने आगे कहा कि हम यह भी देखते हैं कि सार्वजनिक रुख अपनाने के केस में OHCHR का रवैया काफी चुनिंदा रहा है. हमारे पड़ोस में विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक प्रतिक्रियाओं पर किसी तरह की टिप्पणी नहीं की गई, और न ही उनके अपने आसपास कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई पर कुछ कहा गया. इस तरह के दोहरे मापदंड केवल उनकी विश्वसनीयता को कम करते हैं. यह बहुपक्षवाद में विश्वास को घटाता है.
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