स्क्रैप कारोबार में बाधा नहीं डालने के बदले हर महीने मांग रहा था 2 लाख रुपये, भोपाल और कानपुर में ठिकानों पर तलाशी
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मध्य प्रदेश के भोपाल में CGST और केंद्रीय उत्पाद शुल्क आयुक्तालय की प्रिवेंटिव ब्रांच में तैनात सुपरिंटेंडेंट को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है. आरोपी अधिकारी को 10 अक्टूबर 2026 को रंगे हाथों पकड़ा गया. सीबीआई ने आरोपी के भोपाल और कानपुर स्थित आवासीय परिसरों पर तलाशी ली, जहां से 72.50 लाख रुपये नकद और अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं.
स्क्रैप कारोबार के बदले हर महीने 2 लाख की मांग
सीबीआई के मुताबिक, आरोपी सुपरिंटेंडेंट के खिलाफ 10 अक्टूबर को ही रिश्वतखोरी का मामला दर्ज किया गया था. आरोप है कि उसने भोपाल की एक फर्म के मालिक से हर महीने 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी. आरोपी अधिकारी कथित तौर पर यह रकम स्क्रैप सामग्री ले जाने वाले वाहनों को नहीं रोकने और शिकायतकर्ता के स्क्रैप कारोबार में किसी तरह की बाधा नहीं डालने के बदले मांग रहा था.
सीबीआई ने जाल बिछाकर पकड़ा
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया और आरोपी सुपरिंटेंडेंट को 2 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया. इसके बाद जांच एजेंसी ने आरोपी के भोपाल और कानपुर स्थित आवासीय परिसरों की तलाशी ली.
घर से 72.50 लाख रुपये नकद बरामद
तलाशी के दौरान सीबीआई को कुल 72.50 लाख रुपये नकद मिले. इसके अलावा अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. एजेंसी अब बरामद नकदी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. सीबीआई के मुताबिक, मामले में जांच जारी है.
महाराष्ट्र: मुंबई के अस्पताल में रेजिडेंट डॉक्टर मृत पाए गए
मुंबई, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुंबई के सायन अस्पताल में प्रथम वर्ष के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। यह एक चौंकाने वाली घटना है। अधिकारियों के अनुसार, मृतक डॉक्टर की पहचान शिवशरण पाटिल के रूप में हुई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, डॉ. पाटिल का शव कल रात उनके छात्रावास के कमरे के बाथरूम में मिला। इसके बाद अस्पताल प्रशासन और पुलिस को सूचना दी गई।
संदेह यह है कि उन्होंने एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा लेकर आत्महत्या की।
पुलिस ने बताया कि डॉ. पाटिल सायन अस्पताल के सर्जरी विभाग में प्रथम वर्ष के स्नातकोत्तर छात्र थे।
घटना की जांच फिलहाल जारी है।
अगस्त में गुजरात के सूरत के एक अस्पताल से भी इसी तरह की घटना सामने आई थी, जहां प्रथम वर्ष के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।
यह घटना सूरत के न्यू सिविल अस्पताल में घटी, जिसके बाद राज्य द्वारा नियुक्त जांच में रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न के सबूत मिलने पर चार वरिष्ठ डॉक्टरों को निलंबित कर दिया गया। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने यह जानकारी दी थी।
जांच के तहत फॉरेंसिक पोस्टमार्टम का भी आदेश दिया गया। एंटी-रैगिंग कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, मानसिक उत्पीड़न के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार पाए गए चार वरिष्ठ डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
न्यू सिविल अस्पताल के संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष और शिक्षण स्टाफ को भी जूनियर डॉक्टरों की सुरक्षा और उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाने में कथित रूप से विफल रहने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
मंत्री ने कहा कि कोई आत्महत्या नोट नहीं मिला। हालांकि, मृतक डॉक्टर के सहपाठियों के बयानों से पता चलता है कि वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा डॉक्टर को बार-बार मानसिक उत्पीड़न और यातना दी गई थी।
पानसेरिया ने कहा कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर गुजरात सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि जूनियर डॉक्टरों को परेशान करना हमारी संस्कृति नहीं है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ डॉक्टरों को रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न के खिलाफ चेतावनी दी।
--आईएएनएस
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