Responsive Scrollable Menu

Prashant Kishor Victory: जब लालू यादव को लगा था 'लवली' झटका, बांकीपुर रिजल्ट की तुलना 1994 के वैशाली उपचुनाव से क्यों हो रही?

Prashant Kishore News: बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने 19324 वोटों से जीत दर्ज की है. इस जीत की इसलिए चर्चा हो रही है क्योंकि उन्होंने बीजेपी के गढ़ में घुसकर 35-40 दिनों की मेहनत के बूते इसे हासिल किया है. उन्होंने इस उपचुनाव को राज्य स्तरीय बनाने का काम किया है. ऐसे में प्रशांत किशोर की जीत को 1994 में वैशाली लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. आइए 1994 के वैशाली उपचुनाव की कहानी जानते हैं और उसकी तुलना बांकीपुर उपचुनाव रिजल्ट से समझने की कोशिश करते हैं.

Continue reading on the app

'डिलीवरी के बाद बेटे को उठा नहीं पाती थी':ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सीमा बोलीं- पहली बार थ्रो 15 मीटर भी नहीं गया; पति ने कॉमनवेल्थ की तैयारी कराई

डिलीवरी के बाद मैं अपने बेटे को भी गोद में नहीं उठा पाती थी... पहली बार दोबारा डिस्कस फेंका तो 15 मीटर भी नहीं गया। वहीं खड़ी होकर रो पड़ी थी। लगा था कि अब मेरा खेल खत्म हो चुका है। यह कहना है स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में 58.65 मीटर दूर थ्रो फेंककर ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली भिवानी के दिनोद गांव की बहू और डिस्कस थ्रो खिलाड़ी सीमा कालीरमन का। शादी, मां बनने, गंभीर शारीरिक परेशानी और करियर खत्म होने जैसी परिस्थितियों के बीच सीमा ने हार नहीं मानी। पति के भरोसे ने उन्हें फिर मैदान तक पहुंचाया और मेडल जीता। अब सीमा एशियन गेम्स व ओलिंपिक का सपना देख रही है। दैनिक भास्कर से बातचीत में सीमा ने अपनी जिंदगी के संघर्ष, दर्द और डिस्कस थ्रो में वापसी की कहानी बताई। अब पढ़िए सीमा कालीरमन से हुए सवाल-जवाब… सवाल: यहां तक पहुंचने के संघर्ष को कैसे देखती हैं? सीमा: जब कोई खिलाड़ी मेडल जीतता है तो लोगों को सिर्फ उसका मेडल दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे की मेहनत, त्याग और संघर्ष बहुत कम लोग जानते हैं। यह सिर्फ खिलाड़ी और उसके परिवार को ही पता होता है कि यहां तक पहुंचने के लिए कितना कुछ छोड़ना पड़ता है। सवाल: डिस्कस थ्रो से जुड़ने की शुरुआत कैसे हुई? सीमा: मेरे पिता आर्मी से रिटायर्ड हैं और खुद अच्छे खिलाड़ी रहे हैं। स्कूल में खाली पीरियड के दौरान हमें डिस्कस उठाने के लिए बुलाया जाता था। वहीं मैंने पहली बार थ्रो किया। स्कूल की डीपी सुनीता मैडम ने मेरी प्रतिभा पहचानी। उन्होंने मुझे जोनल, जिला और राज्य स्तर पर खिलाया। बाद में मेरा चयन स्पैट में हुआ, जहां वेदप्रकाश सर ने मेरी तकनीक पर काम कराया। फिर अंडर-14 नेशनल में रिकॉर्ड बनाया। सवाल: शादी और मां बनने के बाद खेल प्रभावित हुआ? सीमा: प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में दर्द और सूजन रहने लगी थी। हमें लगा कि यह सामान्य है, लेकिन डिलीवरी के बाद परेशानी बढ़ गई। शरीर इतना कमजोर हो गया कि मैं ठीक से चल भी नहीं पाती थी और बेटे रुद्र को गोद में भी नहीं उठा सकती थी। मेरे पति मुझे कई डॉक्टरों के पास लेकर गए। इलाज शुरू हुआ। उसी दौरान उन्होंने कहा कि हम दोबारा मैदान में लौटेंगे और जितना होगा, उतना करेंगे। सवाल: जब पति ने वापसी की बात कही तो आपका क्या जवाब था? सीमा: उस समय मेरी शारीरिक हालत बिल्कुल ठीक नहीं थी। मैं सामान्य रूप से चल भी नहीं पाती थी, इसलिए खेल में वापसी की कल्पना भी नहीं कर सकती थी। लेकिन उन्होंने लगातार मेरा हौसला बढ़ाया। सवाल: आखिर वह आपको मैदान तक कैसे लेकर गए? सीमा: उन्होंने कहा कि सिर्फ मैदान चलो, कुछ नहीं करेंगे। फिर बोले कि एक बार डिस्कस फेंककर देखो। मैंने कोशिश की, लेकिन 15 मीटर भी थ्रो नहीं कर पाई। मैं वहीं रोने लगी और कहा कि अब मुझसे नहीं होगा। तब उन्होंने समझाया कि खिलाड़ी की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते हैं। धीरे-धीरे उन्होंने मुझे फिर तैयार किया और आज मैं इस मुकाम पर हूं। सवाल: उस समय कभी लगा था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी कर पाएंगी? सीमा: शुरुआत में ऐसा नहीं लगा था, लेकिन खुद पर भरोसा था। मेरा और मेरे पति का अनुशासन ही हमारी सबसे बड़ी ताकत रहा। प्रैक्टिस का समय कभी नहीं बदला। चाहे सुबह हो या शाम, प्रैक्टिस हर हाल में की। सबसे ज्यादा चुनौती शारीरिक थी। मानसिक रूप से मैंने कभी हार नहीं मानी। मेरा मानना है कि इंसान जो ठान ले, वह हासिल कर सकता है। सवाल: शादी के बाद ससुराल का कितना सहयोग मिला? सीमा: मेरे ससुराल वालों ने कभी किसी तरह का दबाव नहीं बनाया। परिवार और पूरे गांव ने हमेशा मेरा साथ दिया। सवाल: पति और कोच के साथ इस सफर का कोई ऐसा पल, जो आज भी याद हो? सीमा: वापसी के दौरान जिम्नास्टिक की एक्सरसाइज करते समय मेरे हाथ छिल गए थे। उस समय पति ने मेरी फोटो खींच ली और कहा कि एक दिन जब तुम स्टेज पर मेडल लेकर खड़ी होगी, तब यह फोटो दिखाऊंगा। आज भी वह फोटो मेरे पास है। अब उसे देखकर हंसी आती है कि तब मैं कैसी थी और आज कहां पहुंच गई हूं। सवाल: इस मेडल के पीछे सबसे बड़ा त्याग किसका मानती हैं? सीमा: मेरे पति का। उन्होंने हर संभव और कई बार असंभव लगने वाली चीज भी मेरे लिए की। हमारी कोई सरकारी नौकरी नहीं है, लेकिन उन्होंने कभी मुझे संसाधनों की कमी महसूस नहीं होने दी। उनके लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। सवाल: लोग कहते हैं कि मां बनने के बाद खिलाड़ी का करियर ढलान पर चला जाता है। आप क्या कहना चाहेंगी? सीमा: मेरे लिए तो बेटा रुद्र बहुत लकी रहा। उसके जन्म से पहले मेरा पर्सनल बेस्ट 48.08 मीटर था। उसके बाद मैंने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया। आज कॉमनवेल्थ में ब्रॉन्ज मेडल जीता है। आगे एशियन गेम्स और ओलिंपिक भी खेलना चाहती हूं। इसकी पूरी योजना मेरे कोच बनाएंगे। सवाल: दूसरी बेटियों और बहुओं को क्या कहना चाहेंगी? सीमा: अगर आपके अंदर किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने की क्षमता है तो पहला कदम जरूर उठाइए। जब आप खुद आगे बढ़ेंगे तो रास्ते में साथ देने वाले लोग भी मिल जाएंगे। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें :- 2022 कॉमनवेल्थ के बाद गेम्स छोड़ना चाहती थीं शर्मिला धनखड़:मां ने कहा-अपने हिस्से की जमीन बेच दूंगी; पति ने फोकस के लिए दुकान छोड़ी कॉमनवेलथ गेम्स 2026 के महिला पैरा शॉट पुट F57 इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वालीं शर्मिला धनखड़ की जिंदगी में एक समय ऐसा भी आया था, जब उन्होंने गेम्स से दूरी बनाने का फैसला कर लिया था। बस उन्होंने आखिरी बार अपनी मां से इसका जिक्र कर लिया। पढ़ें पूरी खबर…

Continue reading on the app

  Sports
  Videos
See all

Alakh Sir Help On Assam Flood: बाढ़ पीड़ितों के लिए आगे आए अलख सर! | Alakh Pandey | PW | Flood News #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-04T01:00:21+00:00

Man Carries Crocodile on Shoulder Viral Video: कंधे पर मगरमच्छ ऐसे उठाया, जैसे बोरी हो! | Bihar News #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-04T01:15:39+00:00

Home Loan EMI Update: घर खरीदने वालों के लिए बड़ी ख़बर, कितना बदलेगा आपका होम लोन ? | Repo Rate #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-04T01:00:12+00:00

Bankipur By-election Result : प्रशांत किशोर का Samrat Choudhary पर बड़ा हमला! | #viralshorts #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-04T00:53:19+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers